बहराइच में चेहल्लुम जुलूस के दौरान ताजिया हाई वोल्टेज तार से टकराया, आग लगने से अफरा-तफरी, बड़ा हादसा टला।
Bahraich: उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले में चेहल्लुम के जुलूस के दौरान एक खतरनाक हादसा होते-होते टल गया। नानपारा के मसूपुर क्षेत्र में ताजिया 11,000 वोल्ट के हाई ....
उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले में चेहल्लुम के जुलूस के दौरान एक खतरनाक हादसा होते-होते टल गया। नानपारा के मसूपुर क्षेत्र में ताजिया 11,000 वोल्ट के हाई वोल्टेज बिजली के तार से टकरा गया, जिससे उसमें आग लग गई। आग की लपटें देखकर जुलूस में शामिल लोग घबरा गए और इधर-उधर भागने लगे। सौभाग्य से, समय रहते बिजली आपूर्ति बंद कर दी गई, जिससे बड़ा हादसा टल गया और कोई जनहानि नहीं हुई। यह घटना सोशल मीडिया और समाचार चैनलों पर तेजी से वायरल हो रही है, जिसने धार्मिक जुलूसों में सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
घटना नानपारा थाना क्षेत्र के मसूपुर गांव में उस समय हुई, जब चेहल्लुम के अवसर पर जुलूस निकाला जा रहा था। चेहल्लुम, जिसे अरबाईन भी कहा जाता है, शिया मुस्लिम समुदाय द्वारा इमाम हुसैन और उनके साथियों की शहादत की याद में मनाया जाता है। यह यौम-ए-आशूरा के 40 दिन बाद मनाया जाता है और इसमें ताजिया जुलूस निकालना एक महत्वपूर्ण परंपरा है। ताजिया, जो इमाम हुसैन के मकबरे का प्रतीक होता है, को कागज, लकड़ी और धातु से बनाया जाता है और इसे जुलूस में ले जाया जाता है। मसूपुर गांव में यह जुलूस हर साल की तरह उत्साह के साथ निकाला जा रहा था, लेकिन इस बार ताजिया की ऊंचाई के कारण यह हादसा हुआ। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, ताजिया लगभग 15 फीट ऊंचा था और इसे जुलूस में एक गाड़ी पर ले जाया जा रहा था। जुलूस जब गांव की मुख्य सड़क से गुजर रहा था, तभी ताजिया का ऊपरी हिस्सा 11,000 वोल्ट के हाई वोल्टेज तार से टकरा गया। टकराव के साथ ही ताजिया में आग लग गई, और आग की लपटें तेजी से फैलने लगीं। आग और चिंगारियों को देखकर जुलूस में अफरा-तफरी मच गई। लोग अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे। कुछ लोगों ने बताया कि धुआं और चिंगारियां इतनी तेज थीं कि एक पल के लिए लगा कि बड़ा हादसा हो सकता है।
स्थानीय पुलिस और प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई की। नानपारा पुलिस स्टेशन के प्रभारी और बिजली विभाग के कर्मचारियों ने तत्काल बिजली आपूर्ति बंद कर दी, जिससे आग को और फैलने से रोका गया। इस त्वरित कार्रवाई के कारण कोई जनहानि नहीं हुई, और जुलूस में शामिल लोग सुरक्षित रहे। पुलिस ने बताया कि ताजिया पूरी तरह जल गया, लेकिन आसपास की संपत्ति या लोगों को कोई नुकसान नहीं पहुंचा। बहराइच के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) अशोक कुमार ने बताया कि घटना की जांच शुरू कर दी गई है, और यह पता लगाया जा रहा है कि ताजिया की ऊंचाई और जुलूस के मार्ग की योजना में क्या कमियां थीं। यह घटना बहराइच में धार्मिक जुलूसों के दौरान होने वाली दुर्घटनाओं की एक और कड़ी है। अक्टूबर 2022 में भी बहराइच के नानपारा में बारावफात जुलूस के दौरान हाई वोल्टेज तार से टकराने के कारण छह लोगों की मौत हो गई थी, और दो अन्य घायल हुए थे। उस घटना में एक लोहे की रॉड हाई वोल्टेज तार से टकरा गई थी, जिसके कारण करंट फैल गया था। उस समय भी जुलूस में अफरा-तफरी मच गई थी, और चार लोग मौके पर ही मर गए थे, जबकि एक अन्य व्यक्ति को लखनऊ ले जाते समय रास्ते में मृत्यु हो गई थी। इस तरह की घटनाओं ने धार्मिक जुलूसों में सुरक्षा मानकों की कमी को उजागर किया है।
सोशल मीडिया पर इस घटना का वीडियो तेजी से वायरल हुआ। एबीपी लाइव ने अपने यूट्यूब चैनल पर इस घटना का वीडियो साझा किया, जिसमें ताजिया में लगी आग और लोगों के भागने का दृश्य साफ दिखाई दे रहा है। वीडियो में दिखाया गया कि आग लगने के बाद स्थानीय लोग और पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश की। कई यूजर्स ने इस घटना पर चिंता जताई और धार्मिक जुलूसों में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की मांग की। एक एक्स पोस्ट में एक यूजर ने लिखा कि इस तरह की घटनाएं बार-बार हो रही हैं, और प्रशासन को जुलूसों के लिए ऊंचाई और मार्ग की योजना पहले से तय करनी चाहिए।
एक अन्य यूजर ने सवाल उठाया कि क्या इतने ऊंचे ताजिया की अनुमति दी गई थी, और क्या बिजली के तारों की ऊंचाई की जांच की गई थी। चेहल्लुम का इतिहास 1400 साल से भी पुराना है। यह शिया मुस्लिम समुदाय के लिए एक महत्वपूर्ण धार्मिक अवसर है, जिसमें इमाम हुसैन और उनके साथियों की शहादत को याद किया जाता है। भारत में यह जुलूस विभिन्न शहरों और गांवों में निकाले जाते हैं, और इनमें ताजिया को विशेष महत्व दिया जाता है। बहराइच में भी यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है। हालांकि, इस तरह की घटनाएं इस पवित्र अवसर की शांति और गरिमा को प्रभावित करती हैं। इस घटना ने कई सवाल खड़े किए हैं। विशेषज्ञों और स्थानीय लोगों का कहना है कि धार्मिक जुलूसों के लिए सुरक्षा मानकों को और सख्त करना होगा। उत्तर प्रदेश पुलिस ने स्वतंत्रता दिवस, चेहल्लुम, और जन्माष्टमी के अवसर पर संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त सुरक्षा और एंटी-सैबोटाज चेकिंग के निर्देश दिए थे। डीजीपी राजीव कृष्ण ने 14 अगस्त 2025 को एक एक्स पोस्ट में कहा था कि शांति और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जाएंगे। फिर भी, इस घटना ने दिखाया कि जुलूसों के मार्ग और ताजिया की ऊंचाई की पहले से जांच जरूरी है।
स्थानीय प्रशासन ने अब जुलूसों के लिए नए दिशा-निर्देश जारी करने की बात कही है। इनमें ताजिया की अधिकतम ऊंचाई तय करना, बिजली के तारों से सुरक्षित दूरी सुनिश्चित करना, और जुलूस के मार्ग की पहले से जांच शामिल है। बहराइच के जिला मजिस्ट्रेट ने कहा कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए स्थानीय समुदायों के साथ मिलकर काम किया जाएगा। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि इस घटना में कोई घायल नहीं हुआ, और जांच के बाद जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। यह घटना अन्य राज्यों में भी हुई समान घटनाओं की याद दिलाती है।
उदाहरण के लिए, सितंबर 2024 में पुणे के वडगांव शेरी में पैगंबर के जन्मदिन के जुलूस में एक झंडे की रॉड हाई वोल्टेज तार से टकराने के कारण दो लोगों की मौत हो गई थी। इसी तरह, जुलाई 2025 में उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में मुहर्रम जुलूस के दौरान 170 फीट ऊंचा ताजिया बिजली के तार से टकरा गया था, जिससे अफरा-तफरी मच गई थी। इन घटनाओं ने धार्मिक जुलूसों में सुरक्षा मानकों की कमी को बार-बार सामने लाया है। स्थानीय लोगों ने इस घटना पर दुख और चिंता जताई है। मसूपुर गांव के एक निवासी ने कहा कि चेहल्लुम का जुलूस उनके लिए आस्था का प्रतीक है, लेकिन ऐसी घटनाएं उनके उत्साह को कम करती हैं। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि जुलूसों के लिए सुरक्षित मार्ग और बिजली के तारों की व्यवस्था की जाए। एक अन्य निवासी ने सुझाव दिया कि ताजिया की ऊंचाई को सीमित करने के लिए नियम बनाए जाएं, ताकि भविष्य में ऐसी दुर्घटनाएं न हों।
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