Lucknow: ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक उड़ान: दुग्ध कारोबार बना आत्मनिर्भरता का सबसे बड़ा आधार।

उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य की पहल व उनके कुशल मार्गदर्शन मे उत्तर प्रदेश मे महिला सशक्तिकरण व स्वालम्बन की दिशा मे क्रान्तिकारी

Mar 26, 2026 - 22:30
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Lucknow: ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक उड़ान: दुग्ध कारोबार बना आत्मनिर्भरता का सबसे बड़ा आधार।
ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक उड़ान: दुग्ध कारोबार बना आत्मनिर्भरता का सबसे बड़ा आधार।
  • दूध से दौलत’ का मॉडल: महिला समूहों ने यूपी को दी नई आर्थिक ताकत
  • ग्रामीण भारत की नई पहचान: ‘लखपति दीदी’ बना विकास का इंजन
  • महिला शक्ति की दुग्ध क्रांति: ₹5000 करोड़ का कारोबार, 10 लाख लीटर रोज़ाना संग्रहण
  • ‘लखपति दीदी’ से बदल रहा गांवों का भविष्य,
  •  यूपी बढ़ा ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था की ओर
  • UPSRLM का असर: 3.25 लाख महिलाएं बनीं आर्थिक बदलाव की धुरी
  • उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के नेतृत्व में महिला सशक्तिकरण का नया अध्याय
  • गांव-गांव में ‘आर्थिक क्रांति’: महिला समूहों ने रचा रू 5000 करोड़ का इतिहास
  • महिलाओं के हाथों में समृद्धि की कमान, दुग्ध उत्पादन से बदल रही यूपी की तस्वीर
  • ग्रामीण महिलाओं की भागीदारी से प्रदेश बढ़ रहा ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था की ओर
  • 31 जनपदों में महिला समूहों द्वारा ₹5000 करोड़ का दुग्ध कारोबार

लखनऊ: उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य की पहल व उनके कुशल मार्गदर्शन मे उत्तर प्रदेश मे महिला सशक्तिकरण व स्वालम्बन की दिशा मे क्रान्तिकारी कदम उठाये जा रहे है। स्वयं सहायता समूहो के माध्यम  से महिलाओं को जोड़कर  उन्हे विभिन्न गतिविधियों व क्रियाकलापो के माध्यम से न केवल स्वावलम्बी बनाया जा रहा है, बल्कि उन्हे लखपति दीदी की श्रेणी मे लाने के भरसक प्रयास किये जा रहे हैं। समूहो की दीदियो को विभिन्न विभागो से समन्वय कर उनकी आमदनी मे इजाफा किया जा रहा है। दीदियो को उनके क्रियाकलापो व गतिविधियों मे किसी प्रकार की दिक्कत या अवरोध न आने पाये, उन्हे किसी प्रकार की कठिनाई न होने पाये, इस दिशा मे उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य  की सोच व मन्शा के अनुरूप  राज्य  ग्रामीण आजीविका मिशन द्वारा क्रान्तिकारी कदम उठाये गये है।

उत्तर प्रदेश में ग्रामीण महिलाओं ने दुग्ध उत्पादन एवं संग्रहण के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल करते हुए आत्मनिर्भरता की नई मिसाल स्थापित की है। प्रदेश सरकार के मार्गदर्शन एवं उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (UPSRLM) के प्रभावी क्रियान्वयन के फलस्वरूप महिला स्वयं सहायता समूह आर्थिक सशक्तीकरण की दिशा में सशक्त भूमिका निभा रहे हैं तथा प्रदेश को वन ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था के लक्ष्य की ओर अग्रसर कर रहे हैं।प्रदेश के 31 जनपदों में सक्रिय महिला समूहों द्वारा प्रतिदिन लगभग 10 लाख लीटर दूध का संग्रहण किया जा रहा है, जिससे अब तक लगभग ₹5000 करोड़ का कारोबार सृजित हुआ है। इस पहल से न केवल ग्रामीण महिलाओं की आय में वृद्धि हुई है, बल्कि प्रदेश की अर्थव्यवस्था को भी नई गति प्राप्त हुई है।प्रदेश में महिला संचालित मिल्क प्रोड्यूसर कंपनियां इस परिवर्तन की धुरी के रूप में कार्य कर रही हैं।

  • मिशन निदेशक, राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन

दीपा रंजन के मुताबिक बलिनी  मिल्क प्रोड्यूसर कम्पनी  (बुंदेलखंड क्षेत्र) मे महिलाओ द्विवेदी प्रतिदिन लगभग 2.5 लाख लीटर संग्रहण किया जा रहा है और लगभग रू 2300 करोड़ कारोबार किया जा चुका है।काशी एमपीसीएल (पूर्वांचल क्षेत्र) द्वारा प्रतिदिन लगभग 2 लाख लीटर संग्रहण किया जा रहा है और  लगभग रू 750 करोड़ का करोबार किया गया है।

सामर्थ्य एमपीसीएल (मध्य क्षेत्र) द्वारा प्रतिदिन लगभग 3 लाख लीटर संग्रहण,  किया जा रहा है और  लगभग रू 1450 करोड़ का कारोबार किया गया है। श्री बाबा गोरखनाथ कृपा एमपीसीएल (गोरखपुर मंडल) द्वारा प्रतिदिन लगभग 1 लाख लीटर संग्रहण, किया जा रहा है और  लगभग रू 220 करोड़ का करोबार किया गया है।और सृजनी एमपीसीएल (तराई क्षेत्र) द्वारा प्रतिदिन लगभग 1.5 लाख लीटर संग्रहण किया जा रहा है, तथा लगभग रू 250 करोड़ का कारोबार किया गया है।इन सभी दुग्ध उत्पादक कंपनियों द्वारा अब तक कुल मिलाकर लगभग रू 78.34 करोड़ का लाभ अर्जित किया जा चुका है, जो यह दर्शाता है कि यह मॉडल न केवल सामाजिक दृष्टि से बल्कि आर्थिक रूप से भी अत्यंत सफल एवं टिकाऊ है।बलिनी मिल्क प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड द्वारा लगभग  रू37.74 करोड़, काशी मिल्क प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड  लगभग रू 10.60करोड़,सामर्थ्य मिल्क प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड द्वारा लगभग ₹22.00 करोड़, श्री बाबा गोरखनाथ कृपा मिल्क प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड द्वारा लगभग रू 2.30 करोड़ औरसृजनी मिल्क प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड  द्वारा लगभग रू 4.70 करोड़ का लाभांश अर्जित किया गया है।सभी कंपनियों द्वारा अब तक कुल मिलाकर लगभग ₹78.34 करोड़ का लाभ अर्जित किया जा चुका है। इस करोबार मे  समूहों की तकरीबन 3 लाख 25 हजार महिलाये जुड़ी है, और लगभग 50 हजार दीदियां लखपति दीदी की श्रेणी मे पहुंच गयी हैं।

इस पहल से जुड़े महिला स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से लगभग 3. 25  लाख महिलाएं लाभान्वित हो रही हैं। यह महिलाएं अब केवल दुग्ध उत्पादक ही नहीं, बल्कि संगठित आर्थिक गतिविधियों की सक्रिय भागीदार बनकर अपनी आय में निरंतर वृद्धि कर रही हैं। दुग्ध आपूर्ति के आधार पर महिलाओं को साप्ताहिक/पाक्षिक भुगतान सीधे उनके बैंक खातों में DBT के माध्यम से किया जा रहा है। फैट एवं SNF आधारित मूल्य निर्धारण प्रणाली से पारदर्शिता सुनिश्चित की गई है, जिससे महिलाओं का विश्वास एवं सहभागिता निरंतर बढ़ रही है।

यह मॉडल ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन, स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियों के विस्तार एवं पलायन में कमी लाने में सहायक सिद्ध हो रहा है। महिलाएं अब केवल श्रमिक ही नहीं, बल्कि उद्यमी के रूप में स्थापित हो रही हैं।महिला-नेतृत्व आधारित यह दुग्ध मूल्य श्रृंखला मॉडल प्रदेश को वन ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। यह पहल समावेशी एवं सतत विकास के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने की दिशा में एक प्रभावी आधार स्तंभ के रूप में स्थापित हो रही है।

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