सिद्धार्थनगर में पूर्व भाजपा विधायक का विवादित बयान: '10 मुस्लिम लड़कियां लाओ, शादी-नौकरी का इंतजाम हम करेंगे'; सोशल मीडिया पर आक्रोश, पुलिस कार्रवाई की मांग। 

उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जिले में एक सभा को संबोधित करते हुए पूर्व भाजपा विधायक राघवेंद्र प्रताप सिंह का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया है। इस वीडियो में

Oct 28, 2025 - 18:49
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सिद्धार्थनगर में पूर्व भाजपा विधायक का विवादित बयान: '10 मुस्लिम लड़कियां लाओ, शादी-नौकरी का इंतजाम हम करेंगे'; सोशल मीडिया पर आक्रोश, पुलिस कार्रवाई की मांग। 
सिद्धार्थनगर में पूर्व भाजपा विधायक का विवादित बयान: '10 मुस्लिम लड़कियां लाओ, शादी-नौकरी का इंतजाम हम करेंगे'; सोशल मीडिया पर आक्रोश, पुलिस कार्रवाई की मांग। 

उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जिले में एक सभा को संबोधित करते हुए पूर्व भाजपा विधायक राघवेंद्र प्रताप सिंह का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया है। इस वीडियो में वे कथित तौर पर हिंदू युवाओं से अपील करते दिख रहे हैं कि वे मुस्लिम लड़कियों को 'लाएं', उन्हें हिंदू धर्म में परिवर्तित करवाएं, शादी का खर्च वहन करेंगे और नौकरी दिलाने का वादा कर रहे हैं। यह बयान 16 अक्टूबर 2025 को धनकरपुर गांव में हिंदू युवा वाहिनी की एक सभा के दौरान दिया गया। राघवेंद्र प्रताप सिंह, जो दोमरीगंज विधानसभा क्षेत्र से 2017 में भाजपा के विधायक चुने गए थे, लेकिन 2022 में समाजवादी पार्टी की सैयदा खातून से हार गए, के इस बयान ने पूरे देश में विवाद खड़ा कर दिया। विपक्षी दलों ने इसे नफरत फैलाने और अपराध को बढ़ावा देने वाला बताया है, जबकि भाजपा ने अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। सोशल मीडिया पर हजारों लोग इसे शेयर कर रहे हैं और पुलिस से तत्काल एफआईआर की मांग कर रहे हैं।

वीडियो की शुरुआत में राघवेंद्र प्रताप सिंह मंच पर खड़े होकर भीड़ से कहते दिख रहे हैं कि 'दो हिंदू लड़कियों के बदले 10 मुस्लिम लड़कियां लाओ। उन्हें प्रेम जाल में फंसाओ, हिंदू बनाओ। शादी हम कराएंगे, नौकरी और खाने-पीने का जिम्मा हमारा।' वे आगे कहते हैं कि 'जो ऐसा करेगा, उसे हम पुरस्कृत करेंगे।' पृष्ठभूमि में कमल का चुनाव चिन्ह, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तस्वीरें लगी हुई हैं, जो विवाद को और भड़का रही हैं। सभा में मौजूद लोग तालियां बजा रहे हैं, और कुछ युवा जोश में नारेबाजी कर रहे हैं। वीडियो करीब डेढ़ मिनट का है, जो सभा के एक हिस्से को कैद करता है। यह वीडियो 26 अक्टूबर को सोशल मीडिया पर अपलोड होने के बाद वायरल हो गया। ट्विटर पर RaghavendraPratapSingh और BJPHateSpeech जैसे हैशटैग ट्रेंड करने लगे। एक यूजर ने लिखा, 'यह क्या संदेश दे रहे हैं? अपहरण को बढ़ावा? भाजपा का यह चेहरा है?' वीडियो को लाखों बार देखा गया, और कई लोग इसे लव जिहाद का उल्टा रूप बता रहे हैं।

राघवेंद्र प्रताप सिंह सिद्धार्थनगर जिले के दोमरीगंज से भाजपा के प्रमुख नेता रहे हैं। वे हिंदू युवा वाहिनी के प्रभारी भी हैं, जो किरन रिजिजू के नेतृत्व वाली एक संगठन है। उनका राजनीतिक सफर विवादों से भरा रहा है। 2022 के विधानसभा चुनाव में वे समाजवादी पार्टी की सैयदा खातून से महज 771 वोटों से हार गए। चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने कई भड़काऊ बयान दिए थे, जैसे 'मुस्लिम वोटर हिंदू लड़कियों को देखते हैं तो पिटेंगे' और 'हिंदू जो मेरा साथ न दें, उनमें मुस्लिम खून है।' इन बयानों पर पुलिस ने एफआईआर दर्ज की थी, लेकिन मामला ज्यादा आगे नहीं बढ़ा। सिद्धार्थनगर सीमांचल इलाका है, जहां हिंदू-मुस्लिम आबादी लगभग बराबर है। यहां जातिगत और धार्मिक तनाव आम हैं, और ऐसे बयान सामाजिक सद्भाव को नुकसान पहुंचा सकते हैं। स्थानीय लोग बताते हैं कि राघवेंद्र सिंह अक्सर हिंदुत्व के नाम पर सभाएं आयोजित करते हैं, लेकिन इस बार का बयान सीमा पार कर गया। एक स्थानीय निवासी ने कहा, 'यह युवाओं को गुमराह करने वाला है। नौकरी के नाम पर अपराध सिखा रहे हैं।'

विपक्ष ने इस बयान की कड़ी निंदा की है। आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता संजय सिंह ने ट्विटर पर वीडियो शेयर करते हुए लिखा, 'पीछे कमल का निशान, मोदी-योगी की तस्वीर। भाजपा कह रही है, हिंदुओं अगर नौकरी पानी है तो पहले एक घटिया इंसान बनो, दूसरे धर्म की लड़की भगाओ। कौन हिंदू मां-बाप अपने बेटों को छिछोरा बनाना चाहता है? क्या दुनिया में हिंदू धर्म की ये पहचान बनेगी?' उन्होंने उत्तर प्रदेश पुलिस से तुरंत कार्रवाई की मांग की और कहा कि यह अपहरण और जबरन धर्मांतरण को उकसावा है। समाजवादी पार्टी के नेता ने कहा कि भाजपा का असली चेहरा सामने आ गया है। कांग्रेस ने भी इसे सामाजिक एकता के खिलाफ बताया। मुस्लिम संगठनों ने चेतावनी दी कि अगर ऐसी बयानबाजी जारी रही तो शांति भंग हो सकती है। सोशल मीडिया पर कई महिलाओं ने इसे महिलाओं की गरिमा पर हमला बताया। एक फेमिनिस्ट एक्टिविस्ट ने लिखा, 'लड़कियों को वस्तु बना रहे हैं। यह पितृसत्ता और सांप्रदायिकता का घालमेल है।' वायरल वीडियो ने मीडिया का भी ध्यान खींचा। टीवी9 हिंदी, मक्तूब मीडिया, द सियासत और न्यूज24 जैसे चैनलों ने इसे प्रमुखता से दिखाया। एक रिपोर्ट में कहा गया कि यह बयान आईपीसी की धारा 153ए (समुदायों के बीच दुश्मनी फैलाना) और 295ए (धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाना) के तहत अपराध है।

पुलिस ने अब तक कोई आधिकारिक कार्रवाई नहीं की है। सिद्धार्थनगर के एसएसपी ने कहा कि वीडियो की जांच की जा रही है, और अगर शिकायत मिली तो एफआईआर दर्ज होगी। लेकिन विपक्ष का आरोप है कि भाजपा नेताओं पर नरमी बरती जाती है। संजय सिंह ने कहा, 'यूपी पुलिस मुसलमानों पर छोटे-मोटे बहाने से केस ठोकती है, लेकिन हिंदू नेताओं की नफरत पर चुप क्यों?' स्थानीय प्रशासन ने सभा को अनुमति दी थी, लेकिन बयान पर रोक नहीं लगाई। हिंदू युवा वाहिनी ने इसे 'सामाजिक सुधार' बताया, लेकिन कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया। भाजपा प्रदेश प्रवक्ता ने कहा कि पार्टी किसी भी सदस्य के बयान की जांच करती है, लेकिन राघवेंद्र सिंह के बयान पर चुप्पी साधी। पूर्व विधायक खुद उपलब्ध नहीं हुए। उनके समर्थक कहते हैं कि यह 'प्रेम जिहाद के खिलाफ' अभियान है, लेकिन आलोचक इसे उल्टा लव जिहाद बता रहे हैं। सिद्धार्थनगर में धार्मिक सद्भाव की मिसालें हैं, जैसे हिंदू-मुस्लिम संयुक्त त्योहार, लेकिन ऐसे बयान तनाव बढ़ा सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि चुनावी माहौल में नफरत की राजनीति तेज हो रही है, और ऐसे बयानों से युवा भटक सकते हैं।

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