सावन का पहला सोमवार: बाबा बालेश्वर के दरबार मे जलाभिषेक करने पहुंचे श्रद्धालु।

खबर उत्तर प्रदेश के बलिया से जहां हर वर्ष की भांति  इस वर्ष भी (श्रावण मास)  शुभ योग के साथ प्रारंभ हो गया है। मान्यता है कि श्रावण मास, के दिन महादेव की उपासना...

Jul 14, 2025 - 20:38
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सावन का पहला सोमवार: बाबा बालेश्वर के दरबार मे जलाभिषेक करने पहुंचे श्रद्धालु।
बाबा बालेश्वर दरबार

Report- S.Asif Hussain zaidi.

खबर उत्तर प्रदेश के बलिया से जहां हर वर्ष की भांति  इस वर्ष भी (श्रावण मास)  शुभ योग के साथ प्रारंभ हो गया है। मान्यता है कि श्रावण मास, के दिन महादेव की उपासना करने से साधक को तनाव, रोग और कर्ज से मुक्ति मिलती हैं। साथ ही जीवन में सुख-शांति बनी रहती हैं। हिंदू धर्म में शिवलिंग पर जल चढ़ाने का विशेष महत्व होता है। इससे महादेव की कृपा और जीवन में सुख-समृद्धि वास करती हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शिवलिंग पर कच्चे चावल चढ़ाना शुभ होता है। इसे अर्पित करने पर साधक को आर्थिक लाभ मिलता। 

मान्यताओं यह भी है कि गंगा जल चढ़ाने से धन प्राप्ति के योग बनते हैं। कष्टो के निवारण के लिए शिवलिंग पर तिल चढ़ाने से कष्टों का निवारण होता । कार्य में तरक्की और समाज में मान-सम्मान पाने का उपाय, अगर आप नौकरी, व्यवसाय या अपने पेशे में सफलता और सामाजिक पहचान की कामना रखते हैं, तो सावन सोमवार को पंचामृत (दूध, दही, शहद, शक्कर और गंगाजल) से शिवलिंग का अभिषेक करें। अभिषेक के दौरान मन में अपने लक्ष्यों और प्रार्थनाओं को दोहराते रहें। यह प्रक्रिया न केवल आत्मविश्वास बढ़ाती है, बल्कि यश, मान-सम्मान और कार्यक्षेत्र में उन्नति भी दिलाती है।

मान्यता के भी है कि "सावन सोमवार" का व्रत रखने से अविवाहित कन्याओं का विवाह जल्दी से होता है। और विवाह में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं। ऐसे में जो लोग विवाह से जुड़ी परेशानियों का सामना कर रहे हैं  तो वे सावन सोमवार के दिन शिवलिंग का जलाभिषेक करते हुए रुद्राक्ष की माला से ऊं श्रीवर प्रदाय श्री नम: मंत्र का पांच माला से जाप करें। वहीं इसके अलावा जल्द विवाह करने के लिए सोमवार के दिन शिवलिंग पर जल में केसर मिलाकर अर्पित करें। इस उपाय से शिवजी जल्द प्रसन्न रहते हैं और विवाह के योग बनते हैं

शास्त्रों में बिल्ववृक्ष का महत्व 

शिवपुराण के अनुसार बेल के पौधे को शिवजी का ही रूप माना गया है, देवताओं ने भी इस शिवस्वरूप वृक्ष की स्तुति की है। तीनों लोकों में जितने पुण्य-तीर्थ प्रसिद्ध हैं,वे सम्पूर्ण तीर्थ बिल्व के मूलभाग में निवास करते हैं। जो पुण्यात्मा मनुष्य बिल्व के मूलभाग में लिंगस्वरूप अविनाशी महादेवजी का पूजन करता है, वह निश्चय ही शिवपद को प्राप्त होता है। जो बिल्व की जड़ के पास जल से अपने मस्तक को सींचता है,वह सम्पूर्ण तीर्थों में स्नान का फल पा लेता है और वही प्राणी इस भूतल पर पावन माना जाता है।

आज सोमवार की सुबह से ही बाबा बालेश्वर के दरबार में श्रद्धालु लंबी कतार लगाए अपनी पारी का इंतजार करते हैं इस अवसर पर पुलिस व्यवस्था चुस्त दुरुस्त दिखी। शहर कोतवाल योगेंद्र कुमार सिंह अपने दलबल के चारों तरफ घूम घूम कर हालात का जाय़जा लेते रहे। मंदिर परिसर व उसके आसपास महिला आरक्षी की तैनात दिखी।

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