Lucknow: संवाद से सशक्तिकरण की ओर: ‘रु-ब-रु’ सामाजिक परिवर्तन का प्रभावी माध्यम- डॉ बबिता सिंह चौहान

उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. बबीता सिंह चौहान ने बताया कि “रु-ब-रु” एक अभिनव, संवाद-आधारित पहल है

By INA News Desk
Feb 3, 2026 - 20:26
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Lucknow: संवाद से सशक्तिकरण की ओर: ‘रु-ब-रु’ सामाजिक परिवर्तन का प्रभावी माध्यम- डॉ बबिता सिंह चौहान
संवाद से सशक्तिकरण की ओर: ‘रु-ब-रु’ सामाजिक परिवर्तन का प्रभावी माध्यम- डॉ बबिता सिंह चौहान
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  • रु-ब-रु पहल से संवाद के माध्यम से लैंगिक समानता और सुरक्षा को मिल रहा नया आयाम- डॉ बबिता सिंह चौहान

लखनऊ: उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. बबीता सिंह चौहान ने बताया कि “रु-ब-रु” एक अभिनव, संवाद-आधारित पहल है, जो लैंगिक समानता, अधिकारों एवं सामाजिक परिवर्तन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर पुलिस अधिकारियों और छात्रों के बीच संरचित एवं आमने-सामने की सार्थक बातचीत को बढ़ावा देती है। यह पहल पारंपरिक जागरूकता कार्यक्रमों से अलग हटकर संवाद, आपसी विश्वास और साझा उत्तरदायित्व के माध्यम से अमूर्त अवधारणाओं को व्यवहारिक जीवन में रूपांतरित करती है।

डॉ. चौहान ने बताया कि रु-ब-रु कार्यक्रम के अंतर्गत होने वाली चर्चाओं का प्रमुख उद्देश्य लैंगिक रूढ़ियों को तोड़ना तथा विद्यार्थियों की दैनिक सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं का समाधान करना है। पुलिस अधिकारी छात्रों को यौन उत्पीड़न, घरेलू हिंसा, साइबर अपराध, बाल संरक्षण सहित विभिन्न लैंगिक कानूनों, सुरक्षा प्रावधानों एवं रिपोर्टिंग तंत्रों की सरल और प्रत्यक्ष जानकारी प्रदान करते हैं। इससे छात्रों में बिना भय के अपराधों की रिपोर्ट करने का आत्मविश्वास विकसित होता है तथा शीघ्र रिपोर्टिंग और सार्वजनिक सतर्कता के महत्व को बल मिलता है।

उन्होंने बताया कि यह पहल अब तक स्कूलों और विश्वविद्यालयों में 30,000 से अधिक छात्रों तक पहुँच बना चुकी है, जो इसके व्यापक प्रभाव को दर्शाता है। कार्यक्रम का विस्तार अभिभावकों, शिक्षकों, विद्यालय कर्मियों एवं बस चालकों तक किया गया है, जिससे बच्चों और किशोरों के आसपास एक सुरक्षित, संवेदनशील एवं उत्तरदायी वातावरण निर्मित हो सके। यह सहभागिता शैक्षिक संस्थानों में लैंगिक संवेदनशीलता और सुरक्षा को संस्थागत रूप प्रदान करती है।

डॉ. बबीता सिंह चौहान ने यह भी उल्लेख किया कि यूनिसेफ के साथ साझेदारी ने रु-ब-रु पहल को तकनीकी मजबूती और संस्थागत गहराई प्रदान की है। बाल अधिकारों, किशोर विकास और लैंगिक संवेदनशील संचार में यूनिसेफ की विशेषज्ञता के माध्यम से कार्यक्रम की सामग्री को परिष्कृत किया गया है तथा इसे राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाल संरक्षण मानकों के अनुरूप बनाया गया है। इससे यह पहल एक-दिवसीय जागरूकता कार्यक्रम से आगे बढ़कर स्थायी व्यवहार-परिवर्तन मॉडल के रूप में विकसित हो रही है।

उन्होंने कहा कि फीडबैक और जमीनी अनुभवों के आधार पर रु-ब-रु कार्यक्रम को निरंतर परिष्कृत किया जाता है। इसका मानकीकृत किंतु लचीला पाठ्यक्रम व्यवहार विज्ञान, सॉफ्ट स्किल्स, केस स्टडी, रोल-प्ले और सफलता की कहानियों को समाहित करता है। “अच्छा स्पर्श-बुरा स्पर्श”, मासिक धर्म स्वच्छता, किशोर स्वास्थ्य जैसे विषयों पर आयु-उपयुक्त सत्र आयोजित किए जाते हैं, जिससे ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में समान प्रभावशीलता सुनिश्चित होती है।

अध्यक्ष ने बताया कि रु-ब-रु केवल जागरूकता तक सीमित नहीं है, बल्कि आंतरिक शिकायत तंत्र को प्रोत्साहित कर तथा उत्पीड़न के प्रति शून्य-सहिष्णुता की संस्कृति को बढ़ावा देकर संस्थागत सुरक्षा और जवाबदेही को भी मजबूत करता है। सहानुभूति-आधारित पुलिसिंग और भेदभाव-विरोधी संवाद के माध्यम से यह पहल कानून प्रवर्तन को मानवीय स्वरूप प्रदान करती है और पुलिस-नागरिक विश्वास को सुदृढ़ बनाती है।

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