Hardoi News: हरदोई में मनरेगा घोटाला- अधिवक्ता ने वरिष्ठ सहायक मनीष तिवारी (Manish Tiwari) पर भ्रष्टाचार के संगीन आरोप लगाए
अधिवक्ता कौशल कुमार सिंह (Kaushal Kumar Singh) ने दावा किया है कि यदि तिवारी के कार्यकाल की निष्पक्ष और गहन जांच की जाए, तो करोड़ों रुपये का वित्तीय घोटाला सामने आ सकता है। शिकायत में यह भी उल्ले..
By INA News Hardoi.
हरदोई: उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) से संबंधित कार्यों में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताओं का मामला प्रकाश में आया है। ग्राम्य विकास विभाग में कार्यरत वरिष्ठ सहायक मनीष तिवारी (Manish Tiwari) पर भ्रष्टाचार और नियमों के उल्लंघन के गंभीर आरोप लगे हैं। अधिवक्ता कौशल कुमार सिंह (Kaushal Kumar Singh) ने इस मामले को उजागर करते हुए उपमुख्यमंत्री, अपर मुख्य सचिव (ग्राम्य विकास विभाग), आयुक्त, और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को शिकायती पत्र भेजकर तिवारी के तत्काल निलंबन और उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।
आरोपों का विवरण
शिकायत के अनुसार, मनीष तिवारी (Manish Tiwari) ने लंबे समय से एक ही स्थान पर पदस्थ रहते हुए अपने तबादले को रोकने के लिए कथित तौर पर राजनीतिक प्रभाव का सहारा लिया। इस दौरान उन्होंने विभागीय नियमों की अनदेखी करते हुए कई गैरकानूनी गतिविधियों को अंजाम दिया। तिवारी पर लगे प्रमुख आरोप निम्नलिखित हैं:
- अनधिकृत निर्माण कार्य: तिवारी ने लखनऊ रोड पर बिना विभागीय अनुमति के एक प्लॉट पर निर्माण कार्य शुरू कराया, जो नियमों का खुला उल्लंघन है।
- वित्तीय अनियमितताएँ: बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में मनरेगा योजनाओं के नाम पर सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया। शिकायत में दावा किया गया है कि तिवारी ने बिना स्वीकृति के निर्माण कार्य कराए और योजनाओं में हेराफेरी की।
- संपत्ति अर्जन: तिवारी पर बिना वैध आय स्रोत के अवैध रूप से संपत्ति अर्जित करने का आरोप है, जो भ्रष्टाचार का स्पष्ट संकेत देता है।
- नियमों की अवहेलना: लंबे समय तक एक ही स्थान पर जमे रहकर तिवारी ने तबादला नीति का उल्लंघन किया और अपने पद का दुरुपयोग किया।
अधिवक्ता कौशल कुमार सिंह (Kaushal Kumar Singh) ने दावा किया है कि यदि तिवारी के कार्यकाल की निष्पक्ष और गहन जांच की जाए, तो करोड़ों रुपये का वित्तीय घोटाला सामने आ सकता है।
शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि तिवारी की गतिविधियों ने मनरेगा जैसी महत्वपूर्ण योजना की विश्वसनीयता को नुकसान पहुँचाया है, जिसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और विकास को बढ़ावा देना है।
शिकायत और माँग
शिकायती पत्र की प्रतिलिपि उपमुख्यमंत्री, अपर मुख्य सचिव (ग्राम्य विकास विभाग), आयुक्त, और अन्य संबंधित अधिकारियों को भेजी गई है। अधिवक्ता ने माँग की है कि:
- मनीष तिवारी (Manish Tiwari) को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाए।
- उनके कार्यकाल की सभी गतिविधियों की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए।
- दोषी पाए जाने पर तिवारी और अन्य संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए।
शिकायतकर्ता का कहना है कि त्वरित कार्रवाई से न केवल भ्रष्टाचार पर अंकुश लगेगा, बल्कि सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता और जवाबਦेही भी सुनिश्चित होगी।
मनरेगा में भ्रष्टाचार के मामले हरदोई में पहले भी सामने आ चुके हैं। उदाहरण के लिए, जून 2020 में भाजपा नेता आयुष त्रिवेदी और अन्य ग्रामीणों ने ग्राम पंचायत जटपुरा में मनरेगा कार्यों में फर्जीवाड़े की शिकायत की थी, जिसमें फर्जी श्रमिकों के नाम पर धन निकासी का आरोप था। उस मामले में खंड विकास अधिकारी ने जांच की थी, लेकिन बड़े पैमाने पर कार्रवाई का उल्लेख नहीं मिलता।
इसके अलावा, उत्तर प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ योगी सरकार ने हाल के वर्षों में कई कदम उठाए हैं। नवंबर 2024 में हरदोई में सड़क निर्माण में अनियमितताओं के लिए कई अभियंताओं को निलंबित किया गया था, और विभागीय जांच शुरू की गई थी। इन मामलों से स्पष्ट है कि हरदोई में सरकारी योजनाओं और विभागों में भ्रष्टाचार एक गंभीर समस्या रही है और मनीष तिवारी (Manish Tiwari) पर लगे आरोप इस समस्या की गहराई को और उजागर करते हैं।
फिलहाल, इस मामले में शासन स्तर पर कोई औपचारिक कार्रवाई की जानकारी सार्वजनिक नहीं हुई है। सभी की निगाहें अब ग्राम्य विकास विभाग और उत्तर प्रदेश सरकार की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं। यदि शिकायत में लगाए गए आरोप सही साबित होते हैं, तो यह हरदोई में मनरेगा के कार्यान्वयन में एक बड़े घोटाले का पर्दाफाश कर सकता है।
मनरेगा, जो ग्रामीण भारत में रोजगार और बुनियादी ढांचे के विकास के लिए एक महत्वपूर्ण योजना है, में इस तरह की अनियमितताएँ न केवल सरकारी धन का दुरुपयोग दर्शाती हैं, बल्कि गरीब और जरूरतमंद मजदूरों के अधिकारों का हनन भी करती हैं। मनीष तिवारी (Manish Tiwari) पर लगे आरोप, यदि सत्य पाए जाते हैं, तो यह ग्राम्य विकास विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाएंगे और हरदोई में प्रशासनिक पारदर्शिता की कमी को उजागर करेंगे।
हरदोई में मनरेगा से जुड़े इस कथित घोटाले ने एक बार फिर सरकारी योजनाओं में भ्रष्टाचार की गंभीर समस्या को सामने लाया है। वरिष्ठ सहायक मनीष तिवारी (Manish Tiwari) पर लगे भ्रष्टाचार, नियमों के उल्लंघन, और अवैध संपत्ति अर्जन के आरोप न केवल व्यक्तिगत स्तर पर गंभीर हैं, बल्कि यह मनरेगा जैसे महत्वपूर्ण कार्यक्रम की विश्वसनीयता पर भी प्रश्नचिह्न लगाते हैं। अधिवक्ता कौशल कुमार सिंह (Kaushal Kumar Singh) की शिकायत के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि शासन इस मामले में क्या कदम उठाता है। निष्पक्ष जांच और कठोर कार्रवाई से ही इस तरह के भ्रष्टाचार पर लगाम लगाई जा सकती है, जिससे ग्रामीण विकास योजनाओं का लाभ वास्तविक हकदारों तक पहुँच सके।
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