Hardoi News: नव संवत्सर पर विचार गोष्ठी एवं कवि सम्मेलन कार्यक्रम संपन्न, अमिता मिश्रा 'मीतू' को किया गया सम्मानित

जनपद की वरिष्ठ साहित्यकार अमिता मिश्रा "मीतू"को परिषद द्वारा सम्मानित भी किया गया। नव संवत्सर का इतिहास , महत्ता ,मौसम- अनुकूलता और ज्योतिष गणना पद्धति में सटीक बैठने की बिंदुबार व्याख्या ....

By INA News Desk
Mar 30, 2025 - 21:16
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Hardoi News: नव संवत्सर पर विचार गोष्ठी एवं कवि सम्मेलन कार्यक्रम संपन्न, अमिता मिश्रा 'मीतू' को किया गया सम्मानित

By INA News Hardoi.

हरदोई: रविवार को अखिल भारतीय साहित्य परिषद के तत्वावधान में नवसंवत्सर पर एक वैचारिक संगोष्ठी एवं कवि सम्मेलन का आयोजन यस. डी. इंटर कालेज प्रांगण में किया गया। कार्यक्रम में संस्था ने वरिष्ठ महिला साहित्यकार अमिता मिश्रा "मीतू" को सम्मानित किया।डॉ. नरेशचंद्र शुक्ल ने अमिता मिश्रा "मीतू" के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर अपना एक लिखित वक्तव्य पढ़ते हुए उन्हें जनपद की उद्दियमान साहित्यकार बताया।इस बीच अध्यक्ष डॉ. बी. एस. पाण्डेय ने नवसंवत्सर पर एक परिपत्र बांटा तथा मंच संचालन डॉ शीला पाण्डेय द्वारा किया गया।नव संवत्सर का इतिहास , महत्ता ,मौसम- अनुकूलता और ज्योतिष गणना पद्धति में सटीक बैठने की बिंदुबार व्याख्या करते हुए डॉ. ब्रह्मस्वरूप पांडेय ने वेद में भी नव संवत्सर के उल्लेख की प्रमाण सहित जानकारी दी उन्होंने इस विषय पर अपना लेख भी सभी को उपलब्ध करवाया।डॉ. ईश्वर चंद्र वर्मा ने कहा कि यद्यपि ब्रिटिश शासन में नव संवत्सर के स्थान पर ग्रेगोरियन कैलेंडर भारत में लाया गया, किंतु 22 मार्च 1957 को तत्कालीन प्रधानमंत्री नेहरू ने दुर्भावनावश इसे आधिकारिक तौर पर अपना लिया।इस विषय पर आचार्य शिव शरण सिंह चौहान,सुरेंद्रनाथ अग्निहोत्री, डॉ सावित्री शुक्ला ने भी नव संवत्सर पर प्रकाश डाला। जिनकी एक दर्जन से अधिक एकल एवं साझा संग्रह प्रकाशित हो चुके है।उन्हें अनेक संस्थाओं द्वारा विभिन्न पुरस्कारों से अलंकृत किया जा चुका है।वह वर्तमान में साहित्यिक संस्था अदब मंच और वी - टू क्लब की अध्यक्ष,तथा आई एन ए न्यूज की साहित्यिक संपादक होने के साथ ग्रामीण पत्रकार एसोसिएशन,हरदोई की महिला जिलाध्यक्ष भी हैं।कवियों द्वारा काव्य पाठ ने कभी ओज तो कभी देशभक्ति से ओतप्रोत कर दिया।देश के नेताओं को उनके कर्तव्यों को पूरा न करने पर कवि ने रचना से कहा- हिंदुओं की हत्या पर गला फाड़- फाड़ चीखते हो नेताजी हिंदू होके हिंदुओं के प्राण जो बचा न सके हिन्दमहासागर मे डूब मरो नेताजी। 

ओज की रचना 

जब माने शत्रु नहीं कोई वेदानुकूल आचरणों से 
हम पंडित हैं हमको रण में क्षत्रिय बन जाना पड़ता है।इस दौरान कवि विकास सिंह चौहान ,आशुतोष द्विवेदी, रणवीर कुमार सिंह, कौशलेंद्र सिंह "राष्ट्रवर", सीमा गुप्ता "असीम ",सुशील कुमार वर्मा, मदन मोहन पांडे, राजकुमार सिंह सोमवंशी, बैरिस्टर सिंह यादव, अभिनव दीक्षित ,गिरीश चंद्र श्रीवास्तव, तथा वेद प्रकाश अवस्थी ने अपने काव्य पाठ के द्वारा सभी को भाव विभोर कर दिया मंच का सफल संचालन डॉ. शीला पांडे ने किया कार्यक्रम का समापन राष्ट्रीय गीत से हुआ।

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