Illegal Mining : यमुना में अवैध रेत खनन रोकने को दिल्ली सीएम रेखा गुप्ता ने योगी को लिखा पत्र

Lucknow : रेखा गुप्ता (Rekha Gupta) ने अपने पत्र में बताया कि यमुना नदी के किनारे दिल्ली और उत्तर प्रदेश की सीमा पर हो रहा अवैध रेत खनन पर्यावरणीय नियमों का खुला उल्लंघन है। इस गति

Jul 9, 2025 - 21:33
Jul 9, 2025 - 21:39
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Illegal Mining : यमुना में अवैध रेत खनन रोकने को दिल्ली सीएम रेखा गुप्ता ने योगी को लिखा पत्र
दिल्ली सीएम रेखा गुप्ता ने योगी को लिखा पत्र

Lucknow : दिल्ली और उत्तर प्रदेश की सीमा पर यमुना नदी के किनारे अवैध रेत खनन की समस्या लगातार गंभीर होती जा रही है। इस मुद्दे को लेकर दिल्ली की CM रेखा गुप्ता (Rekha Gupta) ने उत्तर प्रदेश के CM योगी (Yogi) आदित्यनाथ को पत्र लिखकर तत्काल कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने इस अवैध गतिविधि के पर्यावरणीय और सामाजिक प्रभावों पर चिंता जताते हुए दोनों राज्यों के बीच समन्वित प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया है। यह समस्या न केवल यमुना नदी के पारिस्थितिक संतुलन को नुकसान पहुंचा रही है, बल्कि बाढ़ के खतरे को भी बढ़ा रही है, जिससे आसपास की आबादी के लिए जोखिम पैदा हो रहा है।

रेखा गुप्ता (Rekha Gupta) ने अपने पत्र में बताया कि यमुना नदी के किनारे दिल्ली और उत्तर प्रदेश की सीमा पर हो रहा अवैध रेत खनन पर्यावरणीय नियमों का खुला उल्लंघन है। इस गतिविधि के कारण नदी के तटबंध कमजोर हो रहे हैं, जिससे बाढ़ का खतरा बढ़ रहा है। खासकर मानसून के मौसम में, जब उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश जैसे पहाड़ी राज्यों में भारी बारिश होती है, यमुना का जलस्तर तेजी से बढ़ता है। ऐसे में कमजोर तटबंध बाढ़ को रोकने में नाकाम हो सकते हैं, जिसका असर दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों पर पड़ सकता है। इसके अलावा, अवैध खनन से नदी का प्राकृतिक प्रवाह बाधित हो रहा है, जो पारिस्थितिक संतुलन के लिए हानिकारक है।

इस समस्या की गंभीरता को राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) भी कई बार रेखांकित कर चुका है। एनजीटी ने अवैध रेत खनन को रोकने के लिए तत्काल नियामक कार्रवाई और अंतर-राज्यीय समन्वय की जरूरत पर जोर दिया है। रेखा गुप्ता (Rekha Gupta) ने अपने पत्र में एनजीटी की इन चिंताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि यह मुद्दा केवल एक राज्य तक सीमित नहीं है। चूंकि यमुना नदी दिल्ली और उत्तर प्रदेश की सीमा पर बहती है, इसलिए इस समस्या से निपटने के लिए दोनों राज्यों के प्रशासन को मिलकर काम करना होगा। उन्होंने उत्तर प्रदेश के CM से अनुरोध किया कि वे अपने अधिकारियों को संयुक्त अंतर-राज्यीय सीमांकन के लिए निर्देश दें, ताकि अवैध खनन पर प्रभावी रूप से रोक लगाई जा सके।

दिल्ली सरकार के अधिकारियों के अनुसार, उन्होंने उत्तर प्रदेश के संबंधित अधिकारियों के साथ इस मुद्दे पर कई बार पत्राचार किया है। दिल्ली के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि यमुना के किनारे अवैध रेत खनन की गतिविधियां विशेष रूप से सीमावर्ती क्षेत्रों में बढ़ रही हैं। इन गतिविधियों में भारी मशीनों का इस्तेमाल किया जा रहा है, जो नदी के तल में गहरे गड्ढे बना रहे हैं। इससे नदी का प्राकृतिक प्रवाह बदल रहा है, जिसके परिणामस्वरूप बाढ़ का खतरा और पर्यावरणीय क्षति हो रही है। अधिकारियों का कहना है कि यह खनन न केवल नियमों के खिलाफ है, बल्कि स्थानीय आबादी के लिए भी खतरा पैदा कर रहा है।

रेखा गुप्ता (Rekha Gupta) ने अपने पत्र में इस बात पर भी जोर दिया कि अवैध रेत खनन से यमुना नदी का पारिस्थितिक तंत्र गंभीर रूप से प्रभावित हो रहा है। नदी के किनारे रहने वाली आबादी को भी इससे नुकसान हो रहा है। खनन के कारण नदी का जलस्तर और प्रवाह प्रभावित हो रहा है, जिससे आसपास के खेतों में जलभराव या सूखे जैसी समस्याएं पैदा हो सकती हैं। इसके अलावा, गहरे गड्ढों के कारण नदी के किनारे बने ढांचों, जैसे पुलों और तटबंधों, को भी खतरा है। यह स्थिति भविष्य में और गंभीर हो सकती है, अगर समय रहते कार्रवाई नहीं की गई।

इस मुद्दे को हल करने के लिए रेखा गुप्ता (Rekha Gupta) ने एक संयुक्त प्रवर्तन तंत्र की स्थापना का सुझाव दिया है। उन्होंने कहा कि दिल्ली और उत्तर प्रदेश के प्रशासन को मिलकर एक ऐसी व्यवस्था बनानी चाहिए, जिसमें दोनों राज्यों के अधिकारी संयुक्त रूप से अवैध खनन की निगरानी और रोकथाम करें। इसके लिए सीमावर्ती क्षेत्रों का स्पष्ट सीमांकन जरूरी है, ताकि यह तय हो सके कि कौन सा क्षेत्र किस राज्य के अधिकार क्षेत्र में आता है। इससे अवैध खनन पर प्रभावी कार्रवाई करना आसान होगा।

उत्तर प्रदेश सरकार ने पहले भी अवैध खनन को रोकने के लिए कुछ कदम उठाए हैं। उदाहरण के लिए, उत्तर प्रदेश में भू-माफियाओं के खिलाफ कार्रवाई के लिए ‘एंटी भू-माफिया पोर्टल’ बनाया गया है, जहां लोग अवैध खनन या अतिक्रमण की शिकायत दर्ज कर सकते हैं। हालांकि, इस पोर्टल की प्रभावशीलता पर सवाल उठते रहे हैं, क्योंकि कई क्षेत्रों में अवैध खनन अब भी जारी है। दिल्ली और उत्तर प्रदेश की सीमा पर यमुना के किनारे होने वाला खनन इस बात का सबूत है कि मौजूदा व्यवस्था में कहीं न कहीं कमी है।

स्थानीय लोगों और पर्यावरण विशेषज्ञों ने भी इस मुद्दे पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि अवैध रेत खनन न केवल नदी के पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रहा है, बल्कि आसपास के गांवों और कस्बों में रहने वाली आबादी के लिए भी खतरा बन रहा है। खनन माफियाओं की गतिविधियों के कारण नदी के किनारे की मिट्टी का कटाव बढ़ रहा है, जिससे बाढ़ का खतरा और अधिक बढ़ गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इस पर जल्द काबू नहीं पाया गया, तो यह समस्या और विकराल हो सकती है।

रेखा गुप्ता (Rekha Gupta) ने अपने पत्र में विश्वास जताया कि उत्तर प्रदेश के CM के सहयोग से इस समस्या का समाधान संभव है। उन्होंने योगी (Yogi) आदित्यनाथ से अपील की कि वे अपने अधिकारियों को इस दिशा में तुरंत कदम उठाने के लिए कहें। साथ ही, उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि दोनों राज्यों के बीच नियमित संवाद और समन्वय स्थापित किया जाए, ताकि भविष्य में ऐसी समस्याओं को रोका जा सके।

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