Politics News: भारत को G7 शिखर सम्मेलन का निमंत्रण- कनाडा के PM मार्क कार्नी के साथ PM मोदी की बातचीत ने खोला द्विपक्षीय संबंधों का नया अध्याय। 

भारत और कनाडा के बीच कूटनीतिक संबंधों में एक महत्वपूर्ण मोड़ आया, जब कनाडा के नवनिर्वाचित प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को....

Jun 7, 2025 - 18:19
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Politics News: भारत को G7 शिखर सम्मेलन का निमंत्रण- कनाडा के PM मार्क कार्नी के साथ PM मोदी की बातचीत ने खोला द्विपक्षीय संबंधों का नया अध्याय। 

भारत और कनाडा के बीच कूटनीतिक संबंधों में एक महत्वपूर्ण मोड़ आया, जब कनाडा के नवनिर्वाचित प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को फोन कर 51वें G7 शिखर सम्मेलन के लिए आमंत्रित किया। यह सम्मेलन 15 से 17 जून 2025 तक कनाडा के अल्बर्टा प्रांत के कनानास्किस में आयोजित होने वाला है। इस निमंत्रण ने भारत-कनाडा संबंधों में पिछले दो वर्षों से चली आ रही तनातनी के बाद एक सकारात्मक संदेश दिया है। पीएम मोदी ने इस अवसर पर कार्नी को उनकी हालिया चुनावी जीत के लिए बधाई दी और दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने पर जोर दिया।

  • G7 शिखर सम्मेलन और भारत की भूमिका

G7 विश्व की सात सबसे औद्योगिक और विकसित अर्थव्यवस्थाओं—संयुक्त राज्य अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, और कनाडा—का एक अनौपचारिक समूह है। यूरोपीय संघ (EU) भी इसमें भाग लेता है, और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF), विश्व बैंक, और संयुक्त राष्ट्र जैसे संगठनों को भी आमंत्रित किया जाता है। भारत, हालांकि G7 का सदस्य नहीं है, लेकिन अपनी बढ़ती आर्थिक शक्ति और वैश्विक प्रभाव के कारण 2019 से हर साल इस सम्मेलन में अतिथि देश के रूप में आमंत्रित किया जाता रहा है। इस साल के G7 शिखर सम्मेलन में वैश्विक शांति और सुरक्षा, वैश्विक आर्थिक स्थिरता, और डिजिटल परिवर्तन जैसे विषयों पर चर्चा होगी।

पीएम मोदी ने 6 जून 2025 को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस निमंत्रण की पुष्टि करते हुए लिखा, “कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क जे. कार्नी से फोन पर बात करके खुशी हुई। मैंने उन्हें उनकी हालिया चुनावी जीत के लिए बधाई दी और G7 शिखर सम्मेलन के लिए निमंत्रण के लिए धन्यवाद दिया। जीवंत लोकतंत्रों और गहरे लोगों से लोगों के संबंधों से बंधे भारत और कनाडा आपसी सम्मान और साझा हितों के आधार पर नए उत्साह के साथ मिलकर काम करेंगे। सम्मेलन में मुलाकात की प्रतीक्षा है।”

भारत और कनाडा के बीच संबंध पिछले कुछ वर्षों में तनावपूर्ण रहे हैं, खासकर जून 2023 में कनाडा के सरे, ब्रिटिश कोलंबिया में खालिस्तानी अलगाववादी नेता हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के बाद। तत्कालीन कनाडाई प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने भारत सरकार पर इस हत्या में शामिल होने का आरोप लगाया, जिसे भारत ने “निराधार और प्रेरित” बताकर खारिज कर दिया। इस विवाद ने दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संबंधों को चरमराने की स्थिति में ला दिया, जिसके परिणामस्वरूप दोनों देशों ने एक-दूसरे के राजनयिकों को निष्कासित कर दिया। भारत ने कनाडा पर खालिस्तानी अलगाववादियों को शरण देने और उनकी गतिविधियों को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया, जबकि कनाडा ने भारत पर अपने क्षेत्र में अपराध और हस्तक्षेप का आरोप लगाया।

मार्क कार्नी के मार्च 2025 में कनाडा के प्रधानमंत्री बनने के बाद से दोनों देशों के बीच संबंधों में सुधार की उम्मीद जगी थी। कार्नी, जो पहले बैंक ऑफ इंग्लैंड और बैंक ऑफ कनाडा के गवर्नर रह चुके हैं, ने व्यापार के माध्यम से संबंधों को रीसेट करने की इच्छा जताई थी। उनकी सरकार में भारतीय मूल की विदेश मंत्री अनीता आनंद की नियुक्ति ने भी भारत को उम्मीद दी कि कनाडा अब अधिक परिपक्वता के साथ संबंधों को संभालेगा।

इस निमंत्रण का समय विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि कुछ दिन पहले तक यह अनिश्चितता थी कि क्या कनाडा भारत को G7 शिखर सम्मेलन में आमंत्रित करेगा। मई 2025 में, कनाडा के सिख संगठनों, जैसे वर्ल्ड सिख ऑर्गनाइजेशन और सिख फेडरेशन ऑफ कनाडा, ने कार्नी सरकार से भारत को निमंत्रण न देने की मांग की थी। उनका तर्क था कि भारत ने निज्जर की हत्या की जांच में सहयोग नहीं किया और कनाडा में सिख समुदाय के खिलाफ हिंसा को बढ़ावा दिया।

इसके बावजूद, कार्नी ने 6 जून 2025 को पीएम मोदी को फोन कर निमंत्रण दिया, जिसे भारत ने स्वीकार कर लिया। कार्नी ने पत्रकारों से कहा, “भारत विश्व की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था और सबसे अधिक आबादी वाला देश है। यह कई आपूर्ति श्रृंखलाओं का केंद्र है। G7 में ऐसी चर्चाएं होंगी, जिनमें भारत जैसे देशों का होना जरूरी है।” उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि दोनों देशों के बीच कानून प्रवर्तन और सुरक्षा चिंताओं पर संवाद जारी रहेगा।

  • कनाडा के सिख समुदाय की प्रतिक्रिया

कार्नी के इस फैसले ने कनाडा के सिख समुदाय में कुछ असंतोष पैदा किया। वर्ल्ड सिख ऑर्गनाइजेशन के अध्यक्ष दानिश सिंह ने इसे “कनाडाई सिखों के साथ विश्वासघात” करार दिया और कहा, “भारत ने निज्जर की हत्या में अपनी भूमिका से इनकार किया है और कनाडाई अधिकारियों के साथ सहयोग नहीं किया। रूस, चीन, या ईरान के नेताओं को ऐसी परिस्थितियों में आमंत्रित नहीं किया जाता, फिर भारत को क्यों?” सिख फेडरेशन ऑफ कनाडा ने भी इसे “गंभीर अपमान” बताया।

हालांकि, कार्नी ने निज्जर मामले पर टिप्पणी करने से इनकार करते हुए कहा कि यह एक चल रही कानूनी प्रक्रिया है, और इस पर टिप्पणी करना उचित नहीं होगा। चार भारतीय नागरिकों को निज्जर की हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया गया है, और कनाडाई पुलिस का दावा है कि उनके पास भारत सरकार के खिलाफ सबूत हैं।

यह निमंत्रण भारत और कनाडा के बीच संबंधों में सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। कार्नी ने व्यापार विविधीकरण को प्राथमिकता दी है, विशेष रूप से संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ व्यापार युद्ध के बाद। भारत, जो विश्व की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और 6.5% की वार्षिक वृद्धि दर के साथ तेजी से बढ़ रहा है, कनाडा के लिए एक महत्वपूर्ण व्यापारिक साझेदार हो सकता है।

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भारत ने कनाडा से अपनी चिंताओं को गंभीरता से लेने की मांग की है, विशेष रूप से खालिस्तानी अलगाववादियों की गतिविधियों पर। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रंधीर जायसवाल ने मार्च 2025 में कहा था, “भारत-कनाडा संबंधों में गिरावट का कारण कनाडा में चरमपंथी और अलगाववादी तत्वों को दी गई छूट है।” भारत ने कनाडा से अपने राजनयिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और चरमपंथियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने की अपेक्षा की है।

भारत में इस निमंत्रण को सकारात्मक रूप से देखा गया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कई यूजर्स ने इसे भारत की वैश्विक कद और कूटनीतिक सफलता का प्रतीक बताया। एक यूजर ने लिखा, “कनाडा को अपनी भूल का अहसास हुआ। पीएम मोदी को G7 में आमंत्रित करना भारत की बढ़ती ताकत को दर्शाता है।” एक अन्य यूजर ने कहा, “यह निमंत्रण उन लोगों के लिए जवाब है, जो कह रहे थे कि भारत को G7 में नहीं बुलाया जाएगा।

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