Sambhal: हाजियों पर 10 हजार का ‘बोझ’ या ज़ुल्म? मौलाना वसी अशरफ का हज कमेटी पर बड़ा हमला। 

सम्भल से एक बड़ा मुद्दा सामने आया है, जहां हज यात्रा को लेकर हाजियों पर अचानक 10 हजार रुपये अतिरिक्त किराया बढ़ाए जाने को लेकर

Apr 30, 2026 - 18:15
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Sambhal: हाजियों पर 10 हजार का ‘बोझ’ या ज़ुल्म? मौलाना वसी अशरफ का हज कमेटी पर बड़ा हमला। 
मौलाना वसी अशरफ, धर्मगुरु व पूर्व जिला हज ट्रेनर

उवैस दानिश, सम्भल 

  • सात महीने पहले वसूली, अब फिर बढ़ाया किराया- हाजियों की जेब पर दोहरी मार, सुविधाओं पर भी उठे सवाल

सम्भल से एक बड़ा मुद्दा सामने आया है, जहां हज यात्रा को लेकर हाजियों पर अचानक 10 हजार रुपये अतिरिक्त किराया बढ़ाए जाने को लेकर नाराजगी तेज हो गई है। पूर्व जिला हज ट्रेनर मौलाना वसी अशरफ ने इस फैसले को “सरासर ज़ुल्म और नाइंसाफी” करार देते हुए हज कमेटी ऑफ इंडिया और सरकार पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

मौलाना वसी अशरफ ने कहा कि हाजियों से 7-8 महीने पहले ही पूरी रकम ले ली गई थी और उसी समय फ्लाइट टिकट व अन्य व्यवस्थाएं फाइनल कर दी गई थीं। इसके बावजूद अचानक अतिरिक्त 10 हजार रुपये का बोझ डालना समझ से परे है। उनका आरोप है कि यह फैसला फ्लाइट कंपनियों की मांग के बाद लिया गया, लेकिन इसका भार सीधे हाजियों पर डाल दिया गया। उन्होंने प्रधानमंत्री से अपील करते हुए कहा कि “सबका साथ, सबका विकास” का नारा देने वाली सरकार को हाजियों के साथ हो रहे इस कथित अन्याय पर हस्तक्षेप करना चाहिए। मौलाना ने कहा कि एक आम मुस्लिम परिवार जीवनभर बचत करके हज यात्रा पर जाता है, ऐसे में पति-पत्नी पर 20 हजार रुपये का अतिरिक्त बोझ बेहद भारी पड़ रहा है।

75% हाजी अभी बाकी, बढ़ी चिंता

मौलाना के मुताबिक, सम्भल जिले से अभी केवल एक चौथाई हाजी ही यात्रा पर गए हैं, जबकि 75% हाजी अभी जाना बाकी है। ऐसे में यह बढ़ा हुआ किराया बड़ी संख्या में लोगों के लिए परेशानी का कारण बन सकता है।

सुविधाओं पर भी उठे सवाल

सिर्फ किराया ही नहीं, बल्कि हज यात्रा के दौरान मिलने वाली सुविधाओं को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। मौलाना ने बताया कि सऊदी अरब से लौटे या वहां मौजूद हाजियों ने शिकायत की है कि उन्हें खाने के लिए 2 किलोमीटर तक पैदल जाना पड़ रहा है और दिन में तीन बार करीब 6 किलोमीटर चलना मजबूरी बन गया है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब दूसरे देशों के हाजी मक्का के पास बेहतर होटलों में ठहर सकते हैं, तो भारतीय हाजियों को दूर और असुविधाजनक स्थानों पर क्यों रखा जा रहा है।

खादिमुल हुज्जाज की भूमिका पर भी सवाल

मौलाना ने हज कमेटी द्वारा भेजे गए खादिमुल हुज्जाज (सेवकों) की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि हाजियों को अभी तक पर्याप्त मदद नहीं मिल रही है और लाखों रुपये खर्च होने के बावजूद व्यवस्थाएं नाकाफी हैं।

सरकार और हज कमेटी से मांग

मौलाना वसी अशरफ ने मांग की है कि 10 हजार रुपये की बढ़ोतरी तुरंत वापस ली जाए, जमा रकम पर मिलने वाले ब्याज का हिसाब सार्वजनिक किया जाए, हाजियों को बेहतर सुविधाएं और नजदीकी आवास उपलब्ध कराया जाए। इस पूरे मुद्दे ने हज व्यवस्था और पारदर्शिता पर एक बार फिर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। अब देखना होगा कि सरकार और हज कमेटी इस पर क्या कदम उठाती है।

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