Kanpur News: DM और CMO में ठनी, भ्रष्टाचार और जातिगत टिप्पणियों को लेकर गहराया विवाद, CMO ने दबाव डालने का आरोप लगाया

CMO के अनुसार, DM ने उन्हें बुलाकर डॉ. सुबोध यादव का स्थानांतरण तत्काल रद्द करने और उन्हें पूर्व पदों पर बहाल करने का दबाव डाला। DM ने कथित तौर पर कहा, “सपा, भाजपा से...

Jun 19, 2025 - 23:30
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Kanpur News: DM और CMO में ठनी, भ्रष्टाचार और जातिगत टिप्पणियों को लेकर गहराया विवाद, CMO ने दबाव डालने का आरोप लगाया

By INA News Kanpur.

कानपुर : कानपुर नगर में जिलाधिकारी (DM) जितेंद्र प्रताप सिंह और मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) के बीच का प्रशासनिक विवाद भ्रष्टाचार, वसूली, और जातिगत भेदभाव के गंभीर आरोपों के साथ अब एक बड़े मुद्दे का रूप ले चुका है। CMO, जो अनुसूचित जाति समुदाय से हैं, ने DM पर भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने, अनुचित दबाव डालने, और उनकी जाति को लेकर अपमानजनक टिप्पणियां करने का आरोप लगाया है। यह मामला अब प्रशासनिक हलकों से निकलकर सामाजिक और राजनीतिक मंचों पर चर्चा का केंद्र बन गया है।

विवाद की शुरुआत तब हुई, जब CMO ने 14 दिसंबर 2024 को शासन के आदेश पर कानपुर नगर में मुख्य चिकित्सा अधिकारी के पद पर तैनाती प्राप्त की और 16 दिसंबर 2024 को पदभार ग्रहण किया। पदभार ग्रहण करने के बाद, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. सुबोध प्रकाश यादव के खिलाफ शिकायतें दर्ज कीं। इन शिकायतों में आरोप लगाया गया कि डॉ. सुबोध यादव, जो भंडार और नोडल अधिकारी नर्सिंग होम के पद पर 20 वर्षों से अधिक समय से कार्यरत थे, भ्रष्टाचार में लिप्त हैं और समाजवादी पार्टी के लिए काम करते हैं। इन गतिविधियों से सरकार की छवि को नुकसान पहुंच रहा था।

CMO ने इन शिकायतों की प्रारंभिक जांच की और पाया कि डॉ. सुबोध यादव नियमों का उल्लंघन करते हुए एक विशेष राजनीतिक दल के लिए काम कर रहे हैं और भ्रष्टाचार में संलिप्त हैं। इस आधार पर, CMO ने डॉ. सुबोध यादव को उनके पदों से हटाकर जिला क्षय रोग अधिकारी के पद पर स्थानांतरित कर दिया। इस कार्रवाई ने DM जितेंद्र प्रताप सिंह को नाराज कर दिया।

CMO के अनुसार, DM ने उन्हें बुलाकर डॉ. सुबोध यादव का स्थानांतरण तत्काल रद्द करने और उन्हें पूर्व पदों पर बहाल करने का दबाव डाला। DM ने कथित तौर पर कहा, “सपा, भाजपा से तुम्हारा क्या लेना-देना, जो मैं कहता हूं वही करो।” CMO ने इस दबाव का विरोध करते हुए कहा कि डॉ. सुबोध यादव के खिलाफ जनप्रतिनिधियों और आम जनता की शिकायतें हैं, और उनकी जांच में भी भ्रष्टाचार की पुष्टि हुई है। इसलिए, स्थानांतरण रद्द करना उचित नहीं है। इस जवाब से DM और अधिक क्रुद्ध हो गए और उन्होंने CMO को यह कहकर धमकाया कि “जो मैं कहता हूं वही करो, किसी जनप्रतिनिधि की बात नहीं सुननी।”

इसके अतिरिक्त, DM ने CMO से एक और विवादास्पद मांग की। उन्होंने सीबीआई द्वारा चार्जशीटेड फर्म मेसर्स जे.एम. फार्मा को 1.60 करोड़ रुपये का भुगतान करने का आदेश दिया। CMO ने इस मांग का विरोध करते हुए बताया कि उनके द्वारा गठित जांच समिति ने पाया कि फर्म ने अधोमानक सामग्री, कम मात्रा में आपूर्ति, और गलत बैच नंबर की दवाएं प्रदान की थीं। फर्म पर स्वास्थ्य विभाग में भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप हैं, और सीबीआई की चार्जशीट के कारण भुगतान करना नियमविरुद्ध होगा। इस पर DM ने कथित तौर पर CMO को अपमानित करते हुए कहा, “तुम दलित जाति के मंदबुद्धि व्यक्ति हो, तुम्हें पैसा कमाना नहीं आता और सिस्टम का पता नहीं है।” DM ने यह भी कहा कि “सारे लोग सिस्टम में हैं, तुम क्यों नहीं?” यह टिप्पणी न केवल CMO की जाति को निशाना बनाती थी, बल्कि उन पर वसूली के लिए दबाव डालने का भी संकेत देती थी।

CMO ने यह भी आरोप लगाया कि DM ने उन्हें सार्वजनिक बैठकों में अपमानित किया, मीटिंग से बाहर निकाला, और जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल कर प्रताड़ित किया। इसके अलावा, DM ने स्वास्थ्य विभाग के अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों को भी अनावश्यक रूप से परेशान किया। CMO का दावा है कि उन्होंने कानपुर नगर में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर करने के लिए अथक प्रयास किए। उनके नेतृत्व में जिला कई योजनाओं में सीएम डैशबोर्ड पर राज्य में प्रथम स्थान पर रहा, और संचारी रोगों के नियंत्रण में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। इसके बावजूद, DM ने उनकी उपलब्धियों को नजरअंदाज कर प्रताड़ना जारी रखी।

विवाद के बढ़ने के साथ ही CMO को 19 जून 2025 को उनके पद से हटा दिया गया, और उनकी जगह श्रावस्ती के CMO डॉ. उदय नाथ को कानपुर नगर का नया CMO नियुक्त किया गया। निलंबित CMO ने DM पर और गंभीर आरोप लगाए, जिनमें मीटिंग में जातिसूचक गालियां देना, सिर पर थप्पड़ मारना, और सीबीआई चार्जशीटेड सप्लायर को भुगतान न करने पर साजिश रचने की बात शामिल है।

इस बीच, DM के समर्थन में संत समाज ने रथ यात्रा निकाली, और उनका दावा है कि जितेंद्र प्रताप सिंह एक निष्ठावान और पारदर्शी अधिकारी हैं, जिन्हें साजिश के तहत बदनाम किया जा रहा है। दूसरी ओर, बिठूर के विधायक अभिजीत सिंह सांगा ने CMO पर भ्रष्टाचार और निजी अस्पतालों के साथ मिलीभगत के आरोप लगाए। सोशल मीडिया पर वायरल एक ऑडियो में CMO द्वारा DM के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल करने की बात भी सामने आई, जिसने विवाद को और जटिल कर दिया है।

DM जितेंद्र प्रताप सिंह ने इन आरोपों का खंडन करते हुए बयान जारी किया कि निलंबित CMO द्वारा लगाए गए आरोप असत्य और निराधार हैं। उन्होंने इसे अनुशासनहीनता करार देते हुए कहा कि शासन को सभी तथ्यों से अवगत कराया गया है, और वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

CMO ने शासन से अनुसूचित जाति के अधिकारी के रूप में अपनी रक्षा और न्याय की मांग की है। उन्होंने अपने कार्यकाल में स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार और जनता की संतुष्टि का हवाला दिया। उनका कहना है कि कानपुर नगर के स्वास्थ्य सेवाओं के पैरामीटर उनके और उनके विभाग के कर्मचारियों की मेहनत को दर्शाते हैं।

यह मामला अब भ्रष्टाचार, जातिगत भेदभाव, और प्रशासनिक अनुशासनहीनता के सवालों को उठा रहा है। स्थानीय स्तर पर कुछ लोग इसे भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई के रूप में देख रहे हैं, जबकि अन्य इसे एक अनुसूचित जाति के अधिकारी के उत्पीड़न का मामला मान रहे हैं। निष्पक्ष जांच की मांग तेज हो रही है, और यह देखना बाकी है कि शासन इस संवेदनशील मामले में क्या कदम उठाता है। CM योगी आदित्यनाथ की सरकार ने पहले भी भ्रष्टाचार और प्रशासनिक अनियमितताओं के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है।

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