Lucknow News: उत्तर प्रदेश सरकार ने भ्रष्टाचार के आरोपों के बीच 210 निबंधन अधिकारियों के स्थानांतरण पर लगाई रोक, जांच के आदेश
हालांकि, इन स्थानांतरणों पर गंभीर सवाल उठे हैं। आरोप है कि महानिरीक्षक (निबंधन) ने वर्तमान स्थानांतरण नीति का उल्लंघन करते हुए समूह “ख” और “ग” के अधिकारियों के स्था...
By INA News Lucknow.
लखनऊ : उत्तर प्रदेश सरकार ने निबंधन विभाग में हुए 210 अधिकारियों और कर्मचारियों के स्थानांतरण आदेशों को तत्काल प्रभाव से स्थगित कर दिया है। यह कार्रवाई महानिरीक्षक (निबंधन) के खिलाफ भ्रष्टाचार की शिकायतों और स्थानांतरण प्रक्रिया में अनियमितताओं के गंभीर आरोपों के बाद की गई है। सरकार ने इन प्रकरणों की जांच विशेष कार्य बल (एसटीएफ) से कराने और महानिरीक्षक (निबंधन) को विभाग से हटाने या लंबी छुट्टी पर भेजने की संस्तुति की है।
जानकारी के अनुसार, निबंधन विभाग में गुरुवार और शुक्रवार को महानिरीक्षक (निबंधन) द्वारा कुल 210 स्थानांतरण किए गए थे। इनमें 58 उप निबंधकों के स्थानांतरण, 30 नवप्रोन्नत उप निबंधकों की तैनाती, 114 कनिष्ठ सहायक निबंधकों के स्थानांतरण, और 8 चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के स्थानांतरण शामिल थे। इन आदेशों को महानिरीक्षक (निबंधन) ने पत्र संख्या 2011, 2012, 2013 (13 जून 2025) और 2018 (14 जून 2025) के माध्यम से जारी किया था।
हालांकि, इन स्थानांतरणों पर गंभीर सवाल उठे हैं। आरोप है कि महानिरीक्षक (निबंधन) ने वर्तमान स्थानांतरण नीति का उल्लंघन करते हुए समूह “ख” और “ग” के अधिकारियों के स्थानांतरण से पहले विभागीय मंत्री से आवश्यक चर्चा नहीं की। इसके अलावा, भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे और जांच के दायरे में रहे अधिकारियों को राजस्व की दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थानों पर तैनाती दी गई, जबकि सीधी भर्ती के अधिकारियों को कम महत्वपूर्ण कार्यालयों में भेजा गया। शिकायतों में यह भी कहा गया है कि इन तैनातियों के बदले लाखों रुपये के लेन-देन की बात सामने आई है, जिसमें महानिरीक्षक (निबंधन) की भूमिका संदिग्ध प्रतीत हो रही है।
आरोपों के प्रमुख बिंदु-
- सतही चर्चा और जल्दबाजी: महानिरीक्षक (निबंधन) ने 13 जून को उप निबंधकों और 14 जून को कनिष्ठ सहायक निबंधकों के स्थानांतरण आदेशों पर हस्ताक्षर किए, लेकिन विभागीय मंत्री के साथ केवल 15 जून को सतही चर्चा की, जो भ्रम पैदा करने के उद्देश्य से थी।
- नियमों का उल्लंघन: महत्वपूर्ण कार्यालयों में प्रभारी या प्रोन्नत उप निबंधकों की तैनाती विभागीय निर्देशों के विपरीत की गई।
- प्रस्तावों की अनदेखी: महानिरीक्षक को बार-बार तैनाती प्रस्ताव उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए, लेकिन उन्होंने स्थानांतरण से पहले कोई प्रस्ताव साझा नहीं किया।
- असहयोग और गैरजवाबदेही: स्थानांतरण के बाद महानिरीक्षक ने अपना मोबाइल स्विच ऑफ कर लिया और उनके स्टाफ ने उनकी उपलब्धता के बारे में गलत जानकारी दी।
- भ्रष्टाचार के संकेत: स्थानांतरण सूची में दागी अधिकारियों को प्रमुख स्थानों पर तैनाती और योग्य अधिकारियों को कम महत्वपूर्ण स्थानों पर भेजे जाने से भ्रष्टाचार की आशंका स्पष्ट होती है।
इन शिकायतों के आधार पर सरकार ने सभी स्थानांतरण आदेशों को अग्रिम आदेशों तक स्थगित कर दिया है। साथ ही, महानिरीक्षक (निबंधन) के खिलाफ एसटीएफ जांच और उनके विभाग से स्थानांतरण या लंबी छुट्टी पर भेजने की सिफारिश की गई है। सरकार ने यह भी निर्देश दिया है कि उप निबंधकों और कनिष्ठ सहायक निबंधकों के स्थानांतरण को सुचारु और पारदर्शी तरीके से पुनः किया जाए।
निबंधन विभाग उत्तर प्रदेश में राजस्व संग्रह के मामले में महत्वपूर्ण है, और यह विभाग संपत्ति के दस्तावेजों के पंजीकरण और अन्य वैधानिक कार्यों के लिए जाना जाता है। स्थानांतरण में अनियमितताओं की शिकायतें विभाग की विश्वसनीयता पर सवाल उठाती हैं। स्थानीय स्तर पर इस कार्रवाई को भ्रष्टाचार के खिलाफ सरकार की सख्ती के रूप में देखा जा रहा है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली सरकार ने पहले भी भ्रष्टाचार के मामलों में जीरो टॉलरेंस नीति अपनाई है, और यह कदम उसी दिशा में एक और प्रयास माना जा रहा है। विभागीय सूत्रों का कहना है कि जांच के बाद दोषी अधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जा सकती है, और स्थानांतरण प्रक्रिया को और पारदर्शी बनाने के लिए नए दिशानिर्देश जारी हो सकते हैं।
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