Lucknow : गिग एवं प्लेटफार्म वर्कर्स को सामाजिक सुरक्षा देने की दिशा में बड़ी पहल

द्वितीय सत्र में एग्रीगेटर्स के साथ विस्तृत विचार-विमर्श किया गया, जिसमें सेवामित्र पोर्टल की सुविधाओं, श्रम संहिताओं के प्रावधानों तथा सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के क्रियान्वयन पर चर्चा हुई। एग्रीगेटर्स द्वा

Mar 25, 2026 - 21:58
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Lucknow : गिग एवं प्लेटफार्म वर्कर्स को सामाजिक सुरक्षा देने की दिशा में बड़ी पहल
Lucknow : गिग एवं प्लेटफार्म वर्कर्स को सामाजिक सुरक्षा देने की दिशा में बड़ी पहल

  • श्रम विभाग द्वारा आयोजित कार्यशाला में वर्कर्स, एग्रीगेटर्स व ट्रेड यूनियनों के साथ व्यापक संवाद
  • पंजीयन, बीमा, केवाईसी और कार्यदशाओं में सुधार के सुझावों पर हुआ विचार-विमर्श

लखनऊ : उत्तर प्रदेश राज्य सामाजिक सुरक्षा बोर्ड के तत्वावधान में गिग एवं प्लेटफार्म वर्कर्स की चुनौतियों, कल्याण एवं सामाजिक सुरक्षा की आवश्यकताओं के चिन्हांकन हेतु लखनऊ के गोमती नगर स्थित होटल मेरियट में एक महत्वपूर्ण कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रमुख सचिव, श्रम एवं सेवायोजन विभाग डॉ० शन्मुगा सुन्दरम् ने की, जिसमें प्लेटफार्म वर्कर्स, ट्रेड यूनियनों, एग्रीगेटर्स एवं विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

कार्यशाला के प्रथम सत्र में श्रमिक प्रतिनिधियों एवं एग्रीगेटर्स के साथ अलग-अलग संवाद स्थापित कर गिग एवं प्लेटफार्म वर्कर्स के समक्ष आने वाली समस्याओं, कार्यदशाओं, सुरक्षा एवं सामाजिक सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की गई। उप श्रमायुक्त द्वारा श्रम संहिताओं के अंतर्गत गिग एवं प्लेटफार्म वर्कर्स के लिए उपलब्ध सामाजिक सुरक्षा प्रावधानों की जानकारी दी गई।

निदेशक सेवायोजन नेहा प्रकाश ने गिग एवं प्लेटफार्म वर्कर्स की परिभाषा स्पष्ट करते हुए सेवामित्र पोर्टल पर उपलब्ध 28 सेवाओं की जानकारी दी तथा वर्कर्स को इससे जुड़ने के लिए प्रेरित किया। संयुक्त सचिव एवं अन्य अधिकारियों ने गिग इकोनॉमी के महत्व और वर्तमान परिदृश्य पर प्रकाश डाला।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्रमुख सचिव डॉ० शन्मुगा सुन्दरम् ने कहा कि श्रम संहिताओं में पहली बार गिग एवं प्लेटफार्म वर्कर्स को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है और उनकी सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उत्तर प्रदेश में इस प्रकार की पहल एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने बताया कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में गिग वर्कर्स की भागीदारी लगभग एक ट्रिलियन डॉलर है। उन्होंने सभी वर्कर्स से पंजीयन कराने तथा प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन योजना से जुड़ने का आह्वान किया।

कार्यशाला में विभिन्न संगठनों एवं वर्कर्स द्वारा कस्टमर केवाईसी, मेडिकल क्लेम, दुर्घटना बीमा, आईडी ब्लॉक करने से पूर्व वर्कर का पक्ष सुनने जैसी प्रमुख मांगें रखी गईं। एग्रीगेटर्स के प्रतिनिधियों ने भी अपने अनुभव साझा करते हुए पंजीयन प्रक्रिया में आ रही समस्याओं की ओर ध्यान आकर्षित किया।

द्वितीय सत्र में एग्रीगेटर्स के साथ विस्तृत विचार-विमर्श किया गया, जिसमें सेवामित्र पोर्टल की सुविधाओं, श्रम संहिताओं के प्रावधानों तथा सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के क्रियान्वयन पर चर्चा हुई। एग्रीगेटर्स द्वारा हेल्थ इंश्योरेंस, एक्सीडेंटल इंश्योरेंस, बच्चों के लिए छात्रवृत्ति, रियायती ऋण एवं रेस्ट प्वाइंट जैसी सुविधाओं की जानकारी दी गई।

प्रमुख सचिव ने गिग इकोनॉमी की तेजी से बढ़ती भूमिका का उल्लेख करते हुए बताया कि प्रदेश में अनुमानित 14-15 लाख गिग वर्कर्स के मुकाबले अभी केवल लगभग 1.34 लाख का ही पंजीयन हुआ है। उन्होंने इस दिशा में तेजी लाने पर जोर दिया तथा वर्कर्स और एग्रीगेटर्स के बीच त्रिपक्षीय बैठक आयोजित करने का सुझाव दिया, जिससे समस्याओं का समाधान संवाद के माध्यम से किया जा सके।

कार्यक्रम के अंत में अपर श्रमायुक्त द्वारा सभी सुझावों को भविष्य की योजनाओं एवं नीतियों में समाहित करने का आश्वासन दिया गया तथा प्रतिभागियों का धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कार्यशाला का समापन किया गया।

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