Lucknow : बाल विवाह को न कहने का संकल्प - मिशन शक्ति के अंतर्गत प्रदेश में 'बाल विवाह को ना' कार्यक्रम का आयोजन
प्रदेश के विभिन्न जिलो में आयोजित कार्यक्रमो मे सामुदायिक संवाद, गोष्ठियाँ, नाटक, वाद-विवाद प्रतियोगिता और व्याख्यानों के माध्यम से बाल विवाह के दुष्परिणामो पर चर्चा की
- सशक्त बेटियाँ, सुरक्षित भविष्य बाल विवाह को ‘ना’ कहने का उत्तर प्रदेश का संकल्प, हौसलों ने तोड़ी बेड़ियाँ बालिकाओं ने ठुकराया समय से पहले विवाह का दबाव
- शिक्षा और स्वाभिमान की राह पर बेटियाँ मिशन शक्ति से जागी नई चेतना, बाल विवाह से आज़ादी की पुकार हर बेटी का अधिकार, अपना निर्णय खुद- अपर मुख्य सचिव लीना जौहरी
लखनऊ : उत्तर प्रदेश के सभी जिलो में महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा मिशन शक्ति के अतर्गत और अन्तर्राष्ट्रीय बालिका सप्ताह के थीम पर "बाल विवाह को ना' विषयक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह आयोजन बालिकाओं और महिलाओं को सामाजिक बंधनों से मुक्त कर उनके अधिकारों एवं संभावनाओं को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध हुआ। इस कार्यक्रम में विशेष रूप से उन बालिकाओं को सम्मानित किया गया, जिन्होंने सामाजिक दबाव के बावजूद बाल विवाह को ठुकराया और अपने लिए शिक्षा, आत्मनिर्भरता और स्वाभिमान का मार्ग चुना।
प्रदेश के विभिन्न जिलो में आयोजित कार्यक्रमो मे सामुदायिक संवाद, गोष्ठियाँ, नाटक, वाद-विवाद प्रतियोगिता और व्याख्यानों के माध्यम से बाल विवाह के दुष्परिणामो पर चर्चा की गई। विशेषज्ञों, अध्यापको, समाजसेवियों और बालिकाओ ने खुलकर इस विषय पर अपने विचार रखे और समाज से बाल विवाह की कुप्रथा को पूर्णतः समाप्त करने का आह्वान किया।
विदित है कि महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा विगत 5 वर्षों में 2000 से अधिक संभावित बाल विवाहों को रूकवाया है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-5) 2019-21 के अनुसार उत्तर प्रदेश में अब भी लगभग 15-18 प्रतिशत बालिकाओं का विवाह 18 वर्ष से कम आयु में हो जाता है। सर्वे में बाल विवाह के प्रकरणों में प्रदेश का औसत 15.8 है जो राष्ट्रीय औसत 23.3 से बहुत नीचे है, पर प्रदेश सरकार वर्ष 2030 तक प्रदेश को बाल विवाह मुक्त प्रदेश बनाने की संकल्पना करती हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में यह प्रतिशत और भी अधिक है। यद्यपि पिछले वर्षों में सरकारी और सामाजिक प्रयासों से इसमे कमी आई है, परतु यह समस्या अभी भी गंभीर है और इसके खिलाफ सामूहिक चेतना जगाने की आवश्यकता है।
कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने बाल विवाह से जुडी स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक समस्याओं को विस्तार से बताया। कम आयु में विवाह होने से बालिकाओं की शिक्षा बाधित होती है, जिससे उनके करियर और आत्मनिर्भरता की संभावनाएँ सीमित हो जाती हैं। इसके अतिरिक्त, नाबालिग आयु में गर्भधारण से मातृ मृत्यु दर और शिशु मृत्यु दर में वृद्धि होती है। किशोरावस्था में मातृत्व से उत्पन्न शारीरिक और मानसिक समस्याएँ जीवन भर साथ रहती है। साथ ही, समय से पहले विवाह होने पर घरेलू हिंसा और शोषण की आशंका भी अधिक रहती है। विशेषज्ञों ने यह भी स्पष्ट किया कि बाल विवाह समाज की आर्थिक और सामाजिक प्रगति में बाधा है।
"बाल विवाह को ना" कार्यक्रम में उन बालिकाओं का सम्मान किया गया जिन्होंने साहस दिखाते हुए समय से पहले विवाह का विरोध किया। मंच पर इन बालिकाओं ने अपने अनुभव साझा किए और बताया कि किस प्रकार उन्होंने शिक्षा और आत्मनिर्भरता को प्राथमिकता दी। उनके अनुभवों ने उपस्थित जनसमूह को गहराई से प्रभावित किया और संदेश दिया कि हर बालिका को अपने जीवन के निर्णय स्वयं लेने का अधिकार होना चाहिए।
कार्यक्रम में यह भी बताया गया कि भारत सरकार द्वारा बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006 लागू किया गया है, जिसके अंतर्गत बाल विवाह कराना, करवाना या उसमें शामिल होना दंडनीय अपराध है। प्रदेश में अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु जिला प्रोबेशन अधिकारियों को बाल विवाह प्रतिषेद्य अधिकारी नियुक्त किया गया है।
कार्यक्रम के आयोजन के विषय में उत्तर प्रदेश की अपर मुख्य सचिव, महिला एवं बाल विकास विभाग, लीना जोहरी ने कहा कि "बाल विवाह केवल एक सामाजिक कुरीति नहीं है, बल्कि यह बालिकाओं के अधिकारों का उल्लंघन है। सरकार शिक्षा, आत्मनिर्भरता और सशक्तिकरण के माध्यम से बालिकाओं को मजबूत बनाने के लिए संकल्पित है। हम सबका सामूहिक प्रयास ही इस कुप्रथा को समाप्त कर सकता है। आज बालिकाओं ने जिस साहस से अपनी आवाज बुलंद की है, वही आने वाले उत्तर प्रदेश की दिशा तय करेगा।"
"बाल विवाह को ना" कार्यक्रम, अन्तर्राष्ट्रीय बालिका सप्ताह (3 से 11 अक्टूबर) के अंतर्गत आयोजित किया गया, जिसका उद्देश्य बालिकाओं को अधिकार संपन्न बनाना और समाज में जागरूकता फैलाना है। बाल विवाह पर लगाम कसने के लिए केवल कानूनी प्रावधान पर्याप्त नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना और परिवार स्तर पर मानसिकता में बदलाव आवश्यक है।
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