शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने पुरानी घटना का जिक्र करते हुए अखिलेश यादव की माफी को याद किया। 

प्रयागराज के माघ मेले में मौनी अमावस्या के अवसर पर ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की पालकी को संगम स्नान

Jan 21, 2026 - 14:10
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शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने पुरानी घटना का जिक्र करते हुए अखिलेश यादव की माफी को याद किया। 
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने पुरानी घटना का जिक्र करते हुए अखिलेश यादव की माफी को याद किया। 
  • माघ मेले में पालकी रोके जाने के बाद धरने पर बैठे शंकराचार्य ने अखिलेश यादव की पूर्व माफी का उल्लेख किया
  • प्रयागराज माघ मेले की घटना के बाद शंकराचार्य ने अखिलेश यादव से जुड़ी पुरानी क्षमा याचना का किया खुलासा

प्रयागराज के माघ मेले में मौनी अमावस्या के अवसर पर ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की पालकी को संगम स्नान के लिए जाते समय प्रशासन द्वारा रोके जाने की घटना ने व्यापक ध्यान आकर्षित किया है। इस घटना के बाद शंकराचार्य ने धरने पर बैठकर विरोध दर्ज कराया और प्रशासन से माफी की मांग की। उन्होंने बताया कि उनके शिष्यों के साथ धक्का-मुक्की हुई और उन्हें स्नान करने से रोका गया। शंकराचार्य ने इस घटना को शंकराचार्य पद की गरिमा का अपमान बताया और कहा कि जब तक प्रशासनिक अधिकारी आकर माफी नहीं मांगते, वे धरने से नहीं उठेंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन ने भीड़ और सुरक्षा का हवाला देकर उन्हें रास्ते में रोक दिया, जबकि अन्य लोग स्नान कर रहे थे। इस दौरान शंकराचार्य ने अपने आश्रम में प्रवेश न करने का फैसला लिया और सड़क पर ही रात गुजारी। उन्होंने कहा कि यह घटना सनातन धर्म की परंपराओं पर आघात है और हिंदू समाज के लिए अपमानजनक है। शंकराचार्य ने इस मुद्दे पर राजनीतिक हस्तक्षेप की संभावना को भी रेखांकित किया, लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका विरोध प्रशासन की कार्रवाई के खिलाफ है। घटना के बाद शंकराचार्य ने प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की जिसमें उन्होंने घटना के विवरण दिए और माफी की मांग दोहराई।

इस घटना के संदर्भ में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने वर्ष 2015 की एक पुरानी घटना का जिक्र किया, जब वाराणसी में गणेश विसर्जन के दौरान संतों पर लाठीचार्ज हुआ था। उन्होंने बताया कि उस समय वे और अन्य संत गंगा में प्रतिमा विसर्जन की मांग कर रहे थे, लेकिन प्रशासन ने रोक दिया और लाठीचार्ज कर दिया। इस घटना में शंकराचार्य को चोटें आईं और कई संत घायल हुए। शंकराचार्य ने कहा कि इस लाठीचार्ज की वजह से हिंदू समाज में रोष था और यह घटना धार्मिक परंपराओं के उल्लंघन के रूप में देखी गई। उन्होंने उल्लेख किया कि बाद में अखिलेश यादव ने उनसे और उनके गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती से माफी मांगी थी। शंकराचार्य ने बताया कि उन्होंने अखिलेश यादव से कहा था कि पहले उनके गुरु से माफी मांगें, यदि गुरु माफ करेंगे तो वे भी माफ कर देंगे। उसके बाद गुरु ने माफी स्वीकार की और फिर उन्होंने भी क्षमा कर दिया। इस माफी की घटना वर्ष 2021 में हरिद्वार में हुई, जहां अखिलेश यादव ने शंकराचार्य मठ में जाकर क्षमा याचना की। शंकराचार्य ने इस पुरानी घटना को मौजूदा माघ मेला की घटना से जोड़ते हुए तुलना की और कहा कि पुरानी घटना में माफी मांगी गई थी।

माघ मेला की घटना के बाद शंकराचार्य ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने जानबूझकर उन्हें अपमानित किया और उनके शिष्यों पर हमला किया। उन्होंने कहा कि वे रात एक बजे तक इंतजार करते रहे, लेकिन कोई वरिष्ठ अधिकारी माफी मांगने या उन्हें स्नान के लिए ले जाने नहीं आया। शंकराचार्य ने धरने के दौरान अन्न-जल त्याग दिया और कहा कि जब तक माफी नहीं मिलती, वे अपने कैंप में नहीं लौटेंगे। उन्होंने इस घटना को शंकराचार्य परंपरा की गरिमा से जोड़ा और कहा कि यह व्यक्तिगत अपमान नहीं बल्कि संस्था का अपमान है। शंकराचार्य ने बताया कि मौनी अमावस्या का स्नान हिंदू धर्म में महत्वपूर्ण है और उन्हें इससे वंचित किया गया। उन्होंने कहा कि जन्म से ही हिंदू को गंगा-यमुना में स्नान का अधिकार है, लेकिन उन्हें यह अधिकार छीन लिया गया। घटना के बाद शंकराचार्य ने प्रेस से बातचीत में कहा कि प्रशासन को घटना के लिए जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए और माफी आवश्यक है। उन्होंने धरने के दौरान पूजा और दंड तर्पण किया और विरोध जारी रखा। इस घटना ने धार्मिक समुदाय में चर्चा छेड़ दी और शंकराचार्य ने इसे धार्मिक स्वतंत्रता पर हमला बताया।

शंकराचार्य की धरना कार्रवाई के दौरान समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने फोन पर उनसे बात की और समर्थन जताया। अखिलेश यादव ने कहा कि घटना दुखद है और शंकराचार्य के साथ जो व्यवहार हुआ, वह नहीं होना चाहिए था। उन्होंने कहा कि सदियों पुरानी परंपरा का सम्मान किया जाना चाहिए। अखिलेश यादव ने शंकराचार्य से कहा कि वे जल्द ही उनसे मिलने प्रयागराज आएंगे और उनके साथ खड़े हैं। शंकराचार्य ने अखिलेश यादव से बातचीत में कहा कि वे अभिमन्यु की तरह चक्रव्यूह में लड़ रहे हैं। उन्होंने वाराणसी में मंदिर तोड़े जाने का भी जिक्र किया और कहा कि संतों का अपमान हो रहा है। अखिलेश यादव ने कहा कि खबरों में सब सुरक्षित होने की बात आ रही है, लेकिन शंकराचार्य ने इसे खारिज किया। इस फोन वार्ता में अखिलेश यादव ने पूर्व विधानसभा अध्यक्ष को शंकराचार्य से मिलने भेजने की बात कही। शंकराचार्य ने इस समर्थन को स्वीकार किया और कहा कि अखिलेश यादव भी देश के नागरिक हैं और अन्याय पर आवाज उठा सकते हैं। इस वार्ता ने घटना को राजनीतिक आयाम दिया, लेकिन शंकराचार्य ने जोर दिया कि उनका मुद्दा प्रशासनिक कार्रवाई से जुड़ा है।

माघ मेला प्रशासन ने घटना पर सफाई देते हुए कहा कि शंकराचार्य को अपमानित नहीं किया गया और भीड़ के कारण रोकना पड़ा। प्रशासन ने कहा कि शंकराचार्य की पालकी को सुरक्षा कारणों से रोका गया और बाद में स्नान की अनुमति दी गई, लेकिन वे नहीं गए। प्रशासन ने कहा कि घटना में कोई हमला नहीं हुआ और सब कुछ नियंत्रण में था। हालांकि शंकराचार्य ने इन दावों को खारिज किया और कहा कि उनके शिष्यों को पीटा गया। प्रशासन ने शंकराचार्य को नोटिस जारी किया, जिसमें उनकी उपाधि पर सवाल उठाया गया, लेकिन शंकराचार्य ने इसे गलत बताया। उन्होंने कहा कि यह नोटिस गलत तथ्यों पर आधारित है और कार्रवाई की मांग की। शंकराचार्य ने कहा कि वे ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य हैं और उनकी पदवी को चुनौती नहीं दी जा सकती। इस नोटिस ने विवाद को और बढ़ा दिया और शंकराचार्य ने कहा कि यह अपमान का हिस्सा है। प्रशासन ने कहा कि नोटिस नियमों के अनुसार है, लेकिन शंकराचार्य ने इसे अस्वीकार किया। इस घटना ने माघ मेला की व्यवस्थाओं पर सवाल उठाए और शंकराचार्य ने माफी की मांग दोहराई।

शंकराचार्य ने पुरानी घटना के संदर्भ में कहा कि अखिलेश यादव ने माफी मांगकर गलती स्वीकार की थी, जबकि मौजूदा घटना में माफी नहीं मांगी गई। उन्होंने कहा कि 2015 की घटना में लाठीचार्ज के बाद माफी मिली थी और उन्होंने क्षमा कर दिया था। शंकराचार्य ने कहा कि गुरु की माफी के बाद ही उन्होंने क्षमा किया। उन्होंने मौजूदा मुख्यमंत्री पर निशाना साधा और कहा कि वे झूठ बोल रहे हैं और पद के योग्य नहीं हैं। शंकराचार्य ने इस्तीफे की मांग की और कहा कि घटना की सच्चाई छिपाई जा रही है। उन्होंने कुंभ मेले में भीड़ में मौतों का जिक्र किया और कहा कि जानकारी छिपाई गई। शंकराचार्य ने कहा कि मुख्यमंत्री ने राष्ट्र को गुमराह किया है। उन्होंने कहा कि झूठ बोलने वाला व्यक्ति पद पर नहीं रहना चाहिए। शंकराचार्य ने इस बयान को घटना से जोड़ा और कहा कि अपमान का जवाब माफी से होना चाहिए। इस बयान ने विवाद को बढ़ाया और शंकराचार्य ने कहा कि वे सत्य के लिए लड़ रहे हैं।

शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने अपनी पदवी को लेकर उठाए गए सवालों का जवाब दिया और कहा कि वे ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य हैं। उन्होंने कहा कि उनकी पदवी पर सवाल उठाना गलत है और यह अपमान का हिस्सा है। शंकराचार्य ने कहा कि वे धार्मिक परंपराओं के रक्षक हैं और अपमान बर्दाश्त नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि माघ मेला की घटना से हिंदू समाज आहत है और माफी आवश्यक है। शंकराचार्य ने कहा कि वे धरने पर बने रहेंगे और न्याय की मांग करेंगे। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई शंकराचार्य पद की गरिमा के लिए है। शंकराचार्य ने कहा कि प्रशासन को घटना के लिए जिम्मेदार ठहराया जाए और माफी मांगी जाए। इस घटना ने धार्मिक और प्रशासनिक मुद्दों को उजागर किया और शंकराचार्य ने कहा कि सत्य शाश्वत रहेगा। उन्होंने पुरानी माफी का जिक्र कर मौजूदा स्थिति की तुलना की और कहा कि गलती स्वीकार करना जरूरी है। शंकराचार्य ने कहा कि वे शांतिपूर्ण विरोध जारी रखेंगे और माफी मिलने तक धरने पर रहेंगे।

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