Lucknow News : लखनऊ विश्वविद्यालय एल्यूमिनाई फाउंडेशन का 'एक पड़ाव - अपनों से जुड़ाव' समागम, कुमायूं मंडल के पुरातन छात्रों का भावपूर्ण पुनर्मिलन

लखनऊ विश्वविद्यालय एल्यूमिनाई फाउंडेशन का उद्देश्य विश्वविद्यालय के उन पुरातन छात्रों को एक मंच पर लाना है, जो देश-विदेश में विभिन्न क्षेत्रों में अपनी विशिष्ट पहचान ब...

Jun 29, 2025 - 23:39
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Lucknow News : लखनऊ विश्वविद्यालय एल्यूमिनाई फाउंडेशन का 'एक पड़ाव - अपनों से जुड़ाव' समागम, कुमायूं मंडल के पुरातन छात्रों का भावपूर्ण पुनर्मिलन

By INA News Lucknow.

लखनऊ : लखनऊ विश्वविद्यालय एल्यूमिनाई फाउंडेशन के तत्वावधान में “एक पड़ाव - अपनों से जुड़ाव” कार्यक्रम का आयोजन 28 जून 2025 को उत्तराखंड के कुमायूं मंडल के सभी जनपदों के पुरातन छात्र-छात्राओं के लिए काठगोदाम के सीआरपीएफ कैंप के बहुउद्देशीय भवन में सायं 6:00 बजे किया गया। इस समागम को भव्य और उत्साहपूर्ण ढंग से आयोजित किया गया, जिसमें विश्वविद्यालय के पूर्व छात्रों ने एक-दूसरे से मिलकर पुरानी यादों को ताजा किया। इससे पहले, 4 मई 2025 को गढ़वाल मंडल के पुरातन छात्र-छात्राओं का पुनर्मिलन देहरादून में सफलतापूर्वक आयोजित हो चुका है। आयोजकों ने घोषणा की कि जल्द ही दोनों मंडलों का एक संयुक्त भव्य समागम लखनऊ विश्वविद्यालय एल्यूमिनाई फाउंडेशन के बैनर तले आयोजित किया जाएगा।लखनऊ विश्वविद्यालय एल्यूमिनाई फाउंडेशन का उद्देश्य विश्वविद्यालय के उन पुरातन छात्रों को एक मंच पर लाना है, जो देश-विदेश में विभिन्न क्षेत्रों में अपनी विशिष्ट पहचान बना चुके हैं। इस आयोजन का मुख्य लक्ष्य पुरातन छात्रों को एक भावनात्मक सूत्र में जोड़कर उनके बीच परस्पर स्नेह और सहयोग को मजबूत करना है। आयोजकों ने सभी पूर्व छात्रों से अपील की कि जो इस बार कार्यक्रम में शामिल नहीं हो सके, वे अगले आयोजन में अवश्य भाग लें। यह समागम न केवल पुरानी यादों को जीवंत करने का अवसर है, बल्कि विश्वविद्यालय के गौरवशाली इतिहास को संजोने का भी एक प्रयास है।

कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन और लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलगीत के साथ हुई। आयोजन में विश्वविद्यालय से जुड़े वृत्तचित्र और छायाचित्रों का प्रदर्शन किया गया, जिसने सभी उपस्थित लोगों का ध्यान आकर्षित किया। इन चित्रों और वृत्तचित्रों ने पुरातन छात्रों को उनके विश्वविद्यालय के दिनों की यादों में डुबो दिया, मानो वह समय फिर से जीवंत हो उठा हो। उपस्थित लोगों ने एक-दूसरे से मिलकर अपनी पुरानी दोस्ती और साझा अनुभवों को याद किया, जिसकी भावनात्मक गहराई को शब्दों में व्यक्त करना मुश्किल है।

कार्यक्रम में वरिष्ठतम पुरातन छात्र, रिटायर्ड आईएएस चंद्र मोहन बेरी (1961-66 बैच), को अंगवस्त्र और पौधा भेंट कर सम्मानित किया गया। आयोजन में लखनऊ विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र और गोल्डन जुबली हॉस्टल के पूर्व अंतःवासी भानु प्रताप सिंह, पूर्व छात्र अनिल कांत द्विवेदी, पूर्व छात्रसंघ महामंत्री अनिल सिंह वीरू, और हबीबुल्लाह छात्रावास के पूर्व अंतःवासी अश्वनी पांडे ने प्रमुख भूमिका निभाई। कार्यक्रम का संचालन डॉ. अनूप भारती ने किया, जबकि भानु प्रताप सिंह और अनिल सिंह वीरू ने सभी उपस्थित पुरातन छात्रों का उनकी गरिमामयी उपस्थिति के लिए आभार व्यक्त किया। इस समागम में कई अन्य गणमान्य पूर्व छात्रों की उपस्थिति ने आयोजन को और विशेष बना दिया।इनमें डॉ. लालता प्रसाद, कस्तूरी लाल तागड़ा, राजेश पांडे, मनोज तिवारी, सुरेंद्र सिंह, संजय दुबे, पंकज पाठक, सुधीर सिंह, नवीन कोहली, विजय चौबे, त्रिभुवन सिंह सजवान, राम सिंह बासौरा, एल.डी. गोहत्री, लेफ्टिनेंट कर्नल सुनील सेन, हर्षवर्धन रावत, और मानवेंद्र सिंह जैसे नाम शामिल थे। इन सभी ने आयोजन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित पुरातन छात्रों के लिए एक शानदार रात्रि भोज का आयोजन किया गया, जिसका स्वाद और माहौल सभी के लिए अविस्मरणीय रहा। पुरातन छात्रों ने एक-दूसरे के साथ विचार साझा किए, विश्वविद्यालय के दिनों की यादें ताजा कीं, और भविष्य में ऐसे आयोजनों को और भव्य बनाने की प्रतिबद्धता जताई। यह समागम न केवल एक पुनर्मिलन था, बल्कि लखनऊ विश्वविद्यालय की समृद्ध विरासत और उसके पूर्व छात्रों के बीच अटूट बंधन का प्रतीक भी था।

लखनऊ विश्वविद्यालय की विरासत

लखनऊ विश्वविद्यालय, 1867 में स्थापित, भारत के सबसे पुराने और प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों में से एक है। इसका मुख्य परिसर बादशाहबाग और दूसरा परिसर जानकीपुरम में स्थित है। विश्वविद्यालय 7 संकायों और 59 विभागों के माध्यम से 196 से अधिक पाठ्यक्रम संचालित करता है, जिनमें 70 से अधिक व्यावसायिक पाठ्यक्रम शामिल हैं। वर्तमान में 38,000 से अधिक छात्र यहां अध्ययनरत हैं, और 72 संबद्ध महाविद्यालयों में लगभग 80,000 छात्र शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। विश्वविद्यालय के पूर्व छात्रों ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पद्म विभूषण, पद्म भूषण, और पद्म श्री जैसे प्रतिष्ठित पुरस्कार प्राप्त किए हैं।

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