Lucknow News: उत्तर प्रदेश में मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना: 2025 में 16,520 ग्राम पंचायतों को संतृप्त करने का लक्ष्य
5 मई 2025 को एक प्रदेशव्यापी बृहद अभियान शुरू किया जाएगा, जिसमें वरिष्ठ अधिकारियों को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। इस अभियान में क्षेत्रीय प्रसार कर्मी, प्रयोगशाला कर्मचारी, और ...
By INA News Lucknow.
लखनऊ: उत्तर प्रदेश सरकार ने मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना के तहत किसानों को उनकी मिट्टी की गुणवत्ता की जानकारी प्रदान करने और संतुलित उर्वरक उपयोग को बढ़ावा देने के लिए व्यापक कदम उठाए हैं। कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने बताया कि इस योजना की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2015 में राजस्थान से की थी, और उत्तर प्रदेश में इसका सतत और प्रभावी क्रियान्वयन किया जा रहा है। वर्ष 2025 में प्रदेश की 16,520 ग्राम पंचायतों को संतृप्त करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा गया है, जिसके तहत प्रत्येक ग्राम पंचायत से 100 मृदा नमूने एकत्र किए जाएंगे।
उत्तर प्रदेश में मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना के तहत पिछले कुछ वर्षों में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। वर्ष 2023 में 4,850 ग्राम पंचायतों और वर्ष 2024 में 8,260 ग्राम पंचायतों में निःशुल्क मृदा स्वास्थ्य कार्ड का वितरण पूरा किया गया। इस योजना का उद्देश्य किसानों को उनकी मिट्टी में पोषक तत्वों की स्थिति की जानकारी देना है, ताकि वे उर्वरकों का संतुलित उपयोग कर सकें, मिट्टी की उर्वरता को बनाए रख सकें, और फसल उत्पादकता को बढ़ा सकें।
2025 का लक्ष्य और कार्ययोजना
वर्ष 2025 के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना को और व्यापक बनाने की योजना बनाई है। इसके तहत:
- 16,520 ग्राम पंचायतों को पूरी तरह से संतृप्त किया जाएगा।
- खरीफ सीजन (70%) में 11,564 ग्राम पंचायतों से 11.56 लाख नमूने और रबी सीजन (30%) में 4,956 ग्राम पंचायतों से 4.96 लाख नमूने एकत्र करने का लक्ष्य है।
- नमूना संग्रहण के लिए 7,500 क्षेत्रीय कृषि प्रसार कर्मी और 1,000 से अधिक प्रयोगशाला कर्मचारी नियुक्त किए गए हैं।
- 50 जनपदों में 7,684 प्रशिक्षित कृषि सखियों को पहली बार नमूना संकलन अभियान में शामिल किया गया है, जिन्हें प्रति नमूना ₹15 का मानदेय दिया जाएगा।
मृदा नमूना संग्रहण को गति देने के लिए 21, 25, और 29 अप्रैल 2025 को विशेष अभियान चलाया गया, जिसके तहत अब तक 3.60 लाख नमूने एकत्र किए जा चुके हैं और इन्हें प्रयोगशालाओं में विश्लेषण के लिए भेजा गया है।
इसके अलावा, 5 मई 2025 को एक प्रदेशव्यापी बृहद अभियान शुरू किया जाएगा, जिसमें वरिष्ठ अधिकारियों को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। इस अभियान में क्षेत्रीय प्रसार कर्मी, प्रयोगशाला कर्मचारी, और कृषि विज्ञान केंद्रों के वैज्ञानिक भी नमूना संग्रह में सहयोग करेंगे।
सभी नमूनों की जानकारी मृदा स्वास्थ्य कार्ड पोर्टल (https://soilhealth.dac.gov.in/) पर ऑनलाइन उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित हो रही है। यह पोर्टल किसानों को उनके मृदा स्वास्थ्य कार्ड की स्थिति और विश्लेषण परिणामों तक आसान पहुँच प्रदान करता है।
मृदा की वर्तमान स्थिति
उत्तर प्रदेश में मिट्टी के हाल के परीक्षणों से कुछ चिंताजनक तथ्य सामने आए हैं। वर्तमान में:
- जीवांश कार्बन की मात्रा 0.25%–0.50% है, जो स्वस्थ मिट्टी के लिए आवश्यक 0.8% से काफी कम है।
- पोटाश की कमी व्यापक रूप से देखी गई है।
- अन्य पोषक तत्वों जैसे नाइट्रोजन, फास्फोरस, सल्फर, जिंक, और आयरन की भी कमी पाई गई है।
स्वस्थ मिट्टी की स्थिति के लिए निम्नलिखित मानक निर्धारित हैं:
- pH: 6.5–8.5
- विद्युत चालकता (EC): 1 से कम
- जीवांश कार्बन (OC): 0.8% से अधिक
- उपलब्ध नाइट्रोजन (N): 522 किग्रा/हेक्टेयर से अधिक
- उपलब्ध फास्फोरस (P): 40 किग्रा/हेक्टेयर से अधिक
- उपलब्ध पोटैशियम (K): 250 किग्रा/हेक्टेयर से अधिक
- उपलब्ध सल्फर (S): 15 PPM से अधिक
- उपलब्ध जिंक (Zn): 1.2 PPM से अधिक
- उपलब्ध बोरॉन (B): 0.5 PPM से अधिक
- उपलब्ध आयरन (Fe): 8.0 PPM से अधिक
- उपलब्ध मैगनीज (Mn): 4.0 PPM से अधिक
- उपलब्ध कॉपर (Cu): 0.4 PPM से अधिक
मृदा स्वास्थ्य कार्ड में 12 पैरामीटरों (pH, EC, जीवांश कार्बन, नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश, सल्फर, जिंक, बोरॉन, आयरन, मैगनीज, और कॉपर) पर मिट्टी का विश्लेषण किया जाता है।
यह कार्ड किसानों को निःशुल्क प्रदान किया जाता है, जो उन्हें मिट्टी की कमियों को समझने और उर्वरकों का संतुलित उपयोग करने में मदद करता है। इससे न केवल फसल की पैदावार बढ़ती है, बल्कि मिट्टी की दीर्घकालिक उर्वरता भी बनी रहती है।
मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना उत्तर प्रदेश के किसानों के लिए एक वरदान साबित हो रही है। यह योजना निम्नलिखित तरीकों से लाभकारी है:
- कृषि उत्पादकता में वृद्धि: मिट्टी की स्थिति के आधार पर उर्वरकों का सही उपयोग फसल की पैदावार को बढ़ाता है।
- लागत में कमी: अनावश्यक उर्वरकों के उपयोग को रोककर किसानों की लागत कम होती है।
- पर्यावरण संरक्षण: संतुलित उर्वरक उपयोग से मिट्टी और जल प्रदूषण में कमी आती है।
- महिला सशक्तिकरण: कृषि सखियों को नमूना संग्रह में शामिल करना ग्रामीण महिलाओं के लिए रोजगार और सशक्तिकरण का अवसर प्रदान करता है।
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