Lucknow : लखनऊ में सर्पदंश चिकित्सकीय प्रबंधन पर एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित
राहत आयुक्त भानु चंद्र गोस्वामी ने कहा कि सर्पदंश के पीड़ितों का तुरंत और उचित इलाज जरूरी है। उन्होंने चिकित्सकों से पूरी संवेदनशीलता के साथ इलाज करने
लखनऊ : राहत आयुक्त कार्यालय ने योजना भवन के वैचारिकी सभागार में सर्पदंश न्यूनीकरण कार्यक्रम के तहत एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया। इस कार्यशाला में 18 जिलों के प्रत्येक तहसील से आए 100 चिकित्सकों को सर्पदंश के त्वरित उपचार के लिए मास्टर ट्रेनर के रूप में प्रशिक्षित किया गया।
राहत आयुक्त भानु चंद्र गोस्वामी ने कहा कि सर्पदंश के पीड़ितों का तुरंत और उचित इलाज जरूरी है। उन्होंने चिकित्सकों से पूरी संवेदनशीलता के साथ इलाज करने और मरीजों को अन्य अस्पतालों में भेजने के बजाय तत्काल उपचार करने की अपील की। उन्होंने बताया कि एक-एक क्षण महत्वपूर्ण होता है। ग्रामीण क्षेत्रों में प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर एंटी स्नेक वेनम की उपलब्धता सुनिश्चित करना जरूरी है। इसके लिए स्वास्थ्य केंद्रों में एंटी स्नेक वेनम की उपलब्धता की जानकारी आम लोगों तक पहुंचाने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि स्नेक बाइट मिटिगेशन पोर्टल पर जल्द ही सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर एंटी स्नेक वेनम की रियल-टाइम निगरानी और लाइव ट्रैकिंग की सुविधा शुरू होगी। राहत आयुक्त कार्यालय के हेल्पलाइन नंबर 1070 पर नजदीकी स्वास्थ्य केंद्रों और वहां एंटी स्नेक वेनम की उपलब्धता की मैपिंग भी की जा रही है। चिकित्सकों के साथ-साथ गैर-तकनीकी कर्मचारियों को भी प्रशिक्षण दिया जाएगा, ताकि सर्पदंश पीड़ितों को एम्बुलेंस से लेकर इलाज तक कोई परेशानी न हो।
चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के सर्पदंश कार्यक्रम के नोडल अधिकारी पंकज सक्सेना ने बताया कि उत्तर प्रदेश में 38 प्रजातियों के सांप पाए जाते हैं, जिनमें 18 जहरीले और 20 गैर-जहरीले हैं। उन्होंने सर्पदंश के लक्षण, बचाव और उपचार की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सांप काटने पर घबराने से बचें और तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर जाकर एंटी स्नेक वेनम लगवाएं। उन्होंने झाड़-फूंक या तांत्रिकों के बहकावे में न आने की सलाह दी, क्योंकि ऐसी भ्रांतियों के कारण कई बार मरीज की जान खतरे में पड़ जाती है। उन्होंने सांपों के बारे में गलत धारणाओं, जैसे कि सांप दूध पीते हैं, नागमणि रखते हैं या जोड़े में रहते हैं, को दूर करने की अपील की। उन्होंने बताया कि सांप ध्वनि या आहट को भोजन समझकर हमला करते हैं और जून से सितंबर तक सर्पदंश की घटनाएं बढ़ जाती हैं।
किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय की प्रोफेसर शैफाली गौतम और नीलकमल मिश्रा ने सर्पदंश के दौरान घबराने से बचने की सलाह दी, क्योंकि घबराहट से जहर तेजी से शरीर में फैलता है। उन्होंने आपातकालीन जीवन रक्षक प्रक्रिया (सीपीआर) और एम्बूबैग के उपयोग का प्रशिक्षण दिया। कार्यशाला में अम्बेडकर नगर, आजमगढ़, बलिया, बस्ती, चंदौली, देवरिया, गोरखपुर, जौनपुर, कुशीनगर, मऊ, मिर्जापुर, प्रतापगढ़, प्रयागराज, रायबरेली, संतकबीर नगर, श्रावस्ती, सिद्धार्थ नगर और सुल्तानपुर के चिकित्सकों ने हिस्सा लिया। कार्यशाला का संचालन शांतनु द्विवेदी ने किया, और काव्या शर्मा ने चिकित्सकों का धन्यवाद दिया। इस अवसर पर संतोष कुमार, शैलेंद्र नाथ मिश्रा, अमित कुमार, आशीष वर्मा, प्रशांत शाही, राम किशोर, अदिति गुप्ता, नवनीत यादव और अविनाश सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
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