Lucknow : ‘सही ट्रेड्स, मजबूत मॉनिटरिंग और बेहतर मोबिलाइजेशन से ही मिलेगी सफलता’, आगरा में डीडीयू-जीकेवाई 2.0 कार्यशाला संपन्न

विशेष अभियान के तहत दिव्यांगजनों के नामांकन पर भी जोर दिया गया। डीडीयू-जीकेवाई 1.0 में दिव्यांगजनों का नामांकन केवल 0.1 प्रतिशत था, जिसे 2.0 में बढ़ाकर 2 प्रतिशत तक पहुंचाया गया है। लक्ष्य इसे 5 प्रतिशत तक ले जाने का है। इसके लिए नियमित मॉनिटरिंग और

May 8, 2026 - 23:22
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Lucknow : ‘सही ट्रेड्स, मजबूत मॉनिटरिंग और बेहतर मोबिलाइजेशन से ही मिलेगी सफलता’, आगरा में डीडीयू-जीकेवाई 2.0 कार्यशाला संपन्न
Lucknow : ‘सही ट्रेड्स, मजबूत मॉनिटरिंग और बेहतर मोबिलाइजेशन से ही मिलेगी सफलता’, आगरा में डीडीयू-जीकेवाई 2.0 कार्यशाला संपन्न

  • डीडीयू-जीकेवाई 1.0 की सफलता: 2.62 लाख प्रशिक्षित, 2 लाख युवाओं को मिला रोजगार
  • ‘कौशल दृष्टि’ ऐप और डिजिटल मॉनिटरिंग से हाई-टेक हुआ स्किल मिशन
  • ब्लॉक स्तर के रोजगार मेलों से युवाओं को सीधे रोजगार से जोड़ने की पहल
  • राष्ट्रीय स्तर पर यूपी मॉडल की सराहना,  8 राज्यों के प्रतिनिधियों की सहभागिता

आगरा / लखनऊ : उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन द्वारा आगरा में आयोजित डीडीयू-जीकेवाई 2.0 कार्यशाला का शुक्रवार को सफलतापूर्वक समापन हो गया। कार्यशाला में उत्तर प्रदेश सहित 8 अन्य राज्यों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया और डीडीयू-जीकेवाई 1.0 की उपलब्धियों, चुनौतियों, नवाचारों और 2.0 की कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा की गई। कार्यशाला के अंतिम दिन सिक्किम, उड़ीसा, झारखंड और उत्तर प्रदेश द्वारा प्रेजेंटेशन दी गई।कार्यशाला की अध्यक्षता करते हुए ग्रामीण विकास मंत्रालय (कौशल) के अतिरिक्त सचिव  पंकज यादव ने कहा कि DDU-GKY और RSETI योजनाओं का उद्देश्य केवल प्रशिक्षण देना नहीं, बल्कि ग्रामीण युवाओं को रोजगार और स्वरोजगार से जोड़कर उनकी आजीविका मजबूत करना है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि अब सभी राज्यों को योजनाओं के ठोस परिणाम दिखाने होंगे। उन्होंने उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन की व्यवस्थाओं और नवाचारों की सराहना की।उन्होंने कहा कि कार्यशाला का आयोजन बेहद प्रभावी रहा और सभी राज्यों ने सक्रिय भागीदारी करते हुए महत्वपूर्ण सुझाव दिए। उन्होंने कहा कि सही ट्रेड्स, मजबूत मॉनिटरिंग और बेहतर मोबिलाइजेशन से ही सफलता मिलेगी। DDU-GKY और RSETI के फेज-2 लागू होने के बाद अब राज्यों को तेज गति से काम करना होगा। योजना की सफलता के लिए सही ट्रेड्स की पहचान, अच्छे PIAs का चयन और लगातार मॉनिटरिंग सबसे जरूरी है। उन्होंने कहा कि मजबूत निगरानी और बेहतर क्रियान्वयन से कम समय में अतिरिक्त सचिव ने राज्यों से IT टूल्स, पोर्टल और मोबाइल ऐप्स का अधिक उपयोग करने की अपील की ताकि PIAs की नियमित समीक्षा हो सके और समय पर सुधारात्मक कार्रवाई की जा सके। उन्होंने PSC बैठकों को नियमित रूप से आयोजित करने और जरूरत पड़ने पर “सर्कुलेशन मोड” में निर्णय लेने की भी सलाह दी।

उन्होंने उत्तर प्रदेश की सफलता की कहानियों, कॉफी टेबल बुक्स और नवाचारों की विशेष सराहना करते हुए कहा कि अन्य राज्यों को भी ग्रामीण क्षेत्रों में कौशल योजनाओं का व्यापक प्रचार-प्रसार करना चाहिए।

मिशन निदेशक पुलकित खरे ने उत्तर प्रदेश के कौशल विकास मॉडल का विस्तृत प्रेजेंटेशन दिया, जिसमें उद्योगों की मांग आधारित प्रशिक्षण, डिजिटल मॉनिटरिंग और रोजगार लिंकिंग को प्रमुख आधार बताया गया। उन्होंने ‘कौशल दृष्टि’ ऐप जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से प्रशिक्षण केंद्रों की रीयल-टाइम निगरानी और पारदर्शिता सुनिश्चित करने की जानकारी दी। साथ ही ब्लॉक स्तर पर आयोजित रोजगार मेलों की सफलता का उल्लेख करते हुए बताया कि डीडीयू-जीकेवाई 1.0 के अंतर्गत उत्तर प्रदेश में लगभग 2.62 लाख युवाओं को प्रशिक्षण प्रदान किया गया, जिनमें से करीब 2 लाख युवाओं को रोजगार से जोड़ा गया।

 मिशन निदेशक ने बताया कि योजना का उद्देश्य केवल आंकड़े बढ़ाना नहीं, बल्कि युवाओं को स्थायी आजीविका से जोड़ना है। इसी दृष्टिकोण से  मिशन द्वारा ‘कौशलदीप’ कॉफी टेबल बुक तैयार की गई, जिसमें योजना से लाभान्वित युवाओं की प्रेरणादायक सफलता की कहानियों को शामिल किया गया है। प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों का विश्लेषण कर यह पहचाना गया कि किन जिलों में प्रशिक्षण और प्लेसमेंट अधिक हुआ तथा किन क्षेत्रों में अपेक्षाकृत कम प्रगति रही। अब डीडीयू-जीकेवाई 2.0 के अंतर्गत उन जिलों पर विशेष फोकस किया जाएगा जहां अब तक कम रजिस्ट्रेशन और प्लेसमेंट हुआ है।

विशेष अभियान के तहत दिव्यांगजनों के नामांकन पर भी जोर दिया गया। डीडीयू-जीकेवाई 1.0 में दिव्यांगजनों का नामांकन केवल 0.1 प्रतिशत था, जिसे 2.0 में बढ़ाकर 2 प्रतिशत तक पहुंचाया गया है। लक्ष्य इसे 5 प्रतिशत तक ले जाने का है। इसके लिए नियमित मॉनिटरिंग और विशेष नामांकन अभियान चलाए जा रहे हैं।

योजना के अंतर्गत महिलाओं की भागीदारी लगातार बढ़ी है और शीर्ष पांच ट्रेड्स में महिला प्रशिक्षुओं का प्लेसमेंट पुरुषों से अधिक रहा। भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए सरकार द्वारा चिन्हित 192 न्यू एज जॉब रोल्स में भी युवाओं को प्रशिक्षित करने की रणनीति बनाई गई है।

डीडीयू-जीकेवाई के COO आशीष कुमार ने तकनीकी प्रेजेंटेशन देते हुए बताया कि प्रदेश में विभिन्न सेक्टर्स में तेजी से प्रशिक्षण और प्लेसमेंट कार्य चल रहा है। उन्होंने कहा कि मई में ही लगभग 44 हजार नए लक्ष्य  दिए जाएंगे  तथा नए ट्रेनिंग पार्टनर्स को भी जोड़ा जाएगा। ब्लॉक स्तर तक मिशन को मजबूत करने के लिए ब्लॉक प्रोग्राम मैनेजर्स (BPMs) की नियुक्ति, डिजिटल निरीक्षण प्रणाली, टैबलेट आधारित मॉनिटरिंग और लंबित मामलों के त्वरित निस्तारण पर भी हम काम कर रहे हैं. 

इस दो दिवसीय कार्यशाला के समापन पर अधिकारियों ने कहा कि डीडीयू-जीकेवाई 2.0 केवल एक प्रशिक्षण कार्यक्रम नहीं, बल्कि युवाओं को आत्मनिर्भर बनाकर उन्हें सम्मानजनक रोजगार से जोड़ने का एक व्यापक अभियान है। उत्तर प्रदेश मॉडल की राष्ट्रीय स्तर पर सराहना की गई और अन्य राज्यों के प्रतिनिधियों ने भी इसे प्रभावी मॉडल बताया।

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