Lucknow : उत्तर प्रदेश बनेगा लॉजिस्टिक्स हब, 27 इंटीग्रेटेड क्लस्टर्स से $1 ट्रिलियन अर्थव्यवस्था को मिलेगी रफ्तार

इसी रणनीति के तहत, पश्चिमी उत्तर प्रदेश में दो मेगा प्रोजेक्ट्स पर कार्य युद्ध स्तर पर जारी है। ग्रेटर नोएडा के बोदाकी में 'इंटीग्रेटेड इंडस्ट्रियल टाउनशिप व लॉजिस्टिक्स हब' विकसित कि

Mar 9, 2026 - 00:15
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Lucknow : उत्तर प्रदेश बनेगा लॉजिस्टिक्स हब, 27 इंटीग्रेटेड क्लस्टर्स से $1 ट्रिलियन अर्थव्यवस्था को मिलेगी रफ्तार
Lucknow : उत्तर प्रदेश बनेगा लॉजिस्टिक्स हब, 27 इंटीग्रेटेड क्लस्टर्स से $1 ट्रिलियन अर्थव्यवस्था को मिलेगी रफ्तार

  • ग्रेटर नोएडा में 174 एकड़ पर बनेगा अत्याधुनिक लॉजिस्टिक्स पार्क, औद्योगिक विकास और निवेश को मिलेगी गति 
  • 174 एकड़ के मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक्स पार्क से यूपी में मजबूत होगी सप्लाई चेन, घटेगी ट्रांसपोर्ट लागत

लखनऊ : उत्तर प्रदेश को देश का अग्रणी लॉजिस्टिक्स हब बनाने और $1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था के संकल्प को साकार करने की दिशा में राज्य सरकार ने ऐतिहासिक कदम उठाया है। 'उत्तर प्रदेश मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक्स पार्क (एमएमएलपी) नीति-2024' के माध्यम से सरकार का लक्ष्य परिवहन लागत में भारी कटौती कर राज्य की औद्योगिक प्रतिस्पर्धात्मकता को वैश्विक स्तर पर स्थापित करना है। वर्तमान में भारत में लॉजिस्टिक्स लागत जीडीपी का लगभग 13-14% है, जिसे अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप 7-8% तक लाने के लिए राज्य सरकार आधुनिक बुनियादी ढांचे के विकास पर विशेष ध्यान दे रही है।

इसी रणनीति के तहत, पश्चिमी उत्तर प्रदेश में दो मेगा प्रोजेक्ट्स पर कार्य युद्ध स्तर पर जारी है। ग्रेटर नोएडा के बोदाकी में 'इंटीग्रेटेड इंडस्ट्रियल टाउनशिप व लॉजिस्टिक्स हब' विकसित किया जा रहा है, जो सीधे डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (DFC) से जुड़ेगा। इसके अतिरिक्त, दादरी में एक आधुनिक मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक्स पार्क का निर्माण हो रहा है, जो पश्चिमी भारत के प्रमुख बंदरगाहों तक माल की आवाजाही को निर्बाध बनाएगा। 

इसी क्रम में ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण (जीएनआईडीए) ने 174.12 एकड़ भूमि का एक विशाल लैंड पार्सल चिन्हित किया है, जिसे उ.प्र. मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक्स पार्क नीति-2024 के अंतर्गत विकसित किया जाएगा।

नीति के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु 'इन्वेस्ट यूपी' को नोडल एजेंसी नामित किया गया है। सरकार ने ₹1000 करोड़ से अधिक निवेश वाली वृहद परियोजनाओं के लिए विशेष प्रोत्साहन का प्रावधान किया है, जिसके अंतर्गत आवंटित भूमि पर 30 प्रतिशत की 'फ्रंट-एंड लैंड सब्सिडी' दी जाएगी। अनुमान है कि इन पार्कों से परिवहन लागत में 10% की कमी आएगी और कार्बन उत्सर्जन में भी गिरावट दर्ज होगी।

इसके साथ ही यूपीआईएमएलसी (UPIMLC) परियोजना के तहत राज्य के प्रमुख एक्सप्रेसवे के किनारे 27 एकीकृत विनिर्माण एवं लॉजिस्टिक्स क्लस्टर (आईएमएलसी) विकसित किए जा रहे हैं। ये क्लस्टर अत्याधुनिक वेयरहाउसिंग और कस्टम क्लीयरेंस जैसी सुविधाओं से लैस होकर प्रदेश के औद्योगिक परिदृश्य को नई पहचान देंगे। इन परियोजनाओं से न केवल हजारों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित होंगे, बल्कि परिवहन, रियल एस्टेट और कौशल विकास जैसे सहायक क्षेत्रों के समग्र विकास को भी व्यापक बल मिलेगा। इसके साथ ही, 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' (EoDB), 'सिंगल विंडो क्लीयरेंस' और पारदर्शी डिजिटल प्रक्रियाओं के सशक्त क्रियान्वयन से उत्तर प्रदेश अब वैश्विक सप्लाई चेन नेटवर्क के एक प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित होने के लिए पूरी तरह तैयार है।

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