Maha Kumbh 2025: महाकुम्भ में नाविक को मिला कुबेर का खजाना, 45 दिनों में 30 करोड़ रुपये कमाए, CM योगी ने सुनाई सक्सेस स्टोरी

पति की मौत के बाद आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी। पूरा परिवार परेशान था। उन्होंने कहा कि ऐसे में महाकुम्भ (Maha Kumbh) उनके लिए संकट मोचक बनकर आया। महाकुम्भ (Maha Kumbh...

Mar 5, 2025 - 23:44
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Maha Kumbh 2025: महाकुम्भ में नाविक को मिला कुबेर का खजाना, 45 दिनों में 30 करोड़ रुपये कमाए, CM योगी ने सुनाई सक्सेस स्टोरी

By INA News Prayagraj.

प्रयागराज (Prayagraj): महाकुम्भ (Maha Kumbh) धार्मिक आस्था और अध्यात्म के साथ साथ लाखों लोगों की जीविका और कारोबार का बड़ा मंच साबित हुआ है। ऑटो चलाने वाले, खाने-पीने की दुकान लगाने वालों से लेकर नाव चलाने वाले लाखों लोगों की जिंदगी इस महा कुम्भ ने बदल दी। ऐसे ही एक नाविक परिवार की सक्सेस स्टोरी का जिक्र यूपी के CM योगी (Yogi) आदित्यनाथ ने विधानसभा के बजट सत्र में किया है जो प्रयागराज (Prayagraj) का रहने वाला है। प्रदेश सरकार के मुताबिक, प्रयागराज (Prayagraj) के अरैल इलाके में रहने वाले नाविक पिंटू महरा (Pintu Mehra) का परिवार करोड़पतियों की कतार में शामिल हो गया।दावा है कि प्रयागराज (Prayagraj) के अरैल इलाके में रहने वाले नाविक पिंटू महरा (Pintu Mehra) ने महाकुम्भ (Maha Kumbh) के दौरान 45 दिनों में 30 करोड़ रुपये की कमाई की है। पिंटू महरा (Pintu Mehra) का कहना है कि उन्होंने 2019 के कुंभ में नाव चलाई थी और उन्हें अनुमान था कि इस बार महाकुम्भ (Maha Kumbh) में बहुत भारी संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ आने वाली है। पिंटू महरा (Pintu Mehra) के परिवार ने महाकुम्भ (Maha Kumbh) के पहले 70 नावें खरीदीं। पहले से उनके सौ से अधिक सदस्यों वाले परिवार में 60 नावें थीं। इस तरह इन 130 नावों को महरा परिवार ने महाकुम्भ (Maha Kumbh) में उतार दिया।पिंटू महरा (Pintu Mehra) और उनके परिवार का कहना है कि CM योगी (Yogi) और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रयास से आयोजित हुए इस महाकुम्भ (Maha Kumbh) (की व्यवस्थाओं) ने उनकी ही नहीं, बल्कि हजारों नाविक परिवारों की जिंदगी बदल दी। उन्होंने कहा कि जिन नाविकों ने कर्ज लेकर नावें खरीदीं, वो सब अब लखपति बन गए हैं।

पिंटू की मां शुक्लावती देवी यह बताते हुए भावुक हो गईं कि उनके पति की मौत के बाद आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी। पूरा परिवार परेशान था। उन्होंने कहा कि ऐसे में महाकुम्भ (Maha Kumbh) उनके लिए संकट मोचक बनकर आया। महाकुम्भ (Maha Kumbh) के दौरान लाखों श्रद्धालुओं की भारी भीड़ ने स्थानीय नाविकों के लिए बंपर कमाई का रास्ता खोल दिया। पिंटू महरा (Pintu Mehra) ने पहले ही अंदाजा लगा लिया था कि इस बार तीर्थयात्रियों की संख्या रिकॉर्ड तोड़ होगी। इसी सोच के साथ उसने अपने परिवार के लिए 70 नई नावें खरीदीं, जबकि पहले से उनके पास 60 नावें थीं। कुल 130 नावों के बेड़े के साथ उन्होंने इस महाकुम्भ (Maha Kumbh) में श्रद्धालुओं को गंगा की सैर कराई और देखते ही देखते करोड़ों की कमाई कर ली।

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केवल पिंटू महरा (Pintu Mehra) ही नहीं, बल्कि उनके जैसे सैकड़ों नाविकों की किस्मत इस महाकुम्भ (Maha Kumbh) में चमक उठी। कई नाविकों ने कर्ज लेकर नावें खरीदीं और अब वे सभी लखपति बन चुके हैं। प्रयागराज (Prayagraj) में त्रिवेणी के किनारे स्थित गांव अरैल के रहने वाले इस नाविक के विजन ने पूरे परिवार की जिंदगी बदल दी। नाव खरीदने के लिए घर की महिलाओं के गहने बेच दिए, घर तक गिरवी रखने की नौबत आ गई, लेकिन जब महाकुम्भ (Maha Kumbh) खत्म हुआ तो पिंटू करोड़ पतियों की कतार में शामिल हो गया। CM योगी (Yogi) ने विधानसभा में खुद उसकी सक्सेस स्टोरी को सबके सामने रखा। पिंटू बताते हैं कि उनके यहां नाव चलाने का पुस्तैनी है।पिछले अर्धकुंभ में उन्होंने भीड़ की जो स्थिति देखी, उससे उन्हें अंदाजा हो गया था कि इस बार बहुत भीड़ आने वाली है। इसलिए उन्होंने अपने परिवार का सब कुछ दांव पर लगाकर 70 नाव खरीदी, जिससे उनके पास अब 130 नाव हो गई। उनके परिवार में सौ से अधिक लोग हैं। इसके लिए उन्हें घर की महिलाओं ने भी मना किया। उनकी मां भी उनसे नाराज हो गईं, लेकिन उन्होंने किसी की नहीं सुनी।

उनकी मां शकुंतला देवी कामयाबी को याद कर रो पड़ती हैं। उनका कहना है कि घर में बच्चों को पढ़ाने के लिए पैसे तक नहीं बचे थे। अब बच्चे पढ़ेंगे। पिंटू की माता जी बताती हैं,महाकुम्भ (Maha Kumbh) ने पूरे समुदाय को आर्थिक मजबूती दी है। प्रयागराज (Prayagraj) ही नहीं, मांडा, बनारस, मिर्जापुर, जोशी लवन और दारागंज तक हर नाविक परिवार खुशहाल हो गया है। हमने अपनी आंखों से कभी लाख-दो लाख रुपये नहीं देखे थे, लेकिन अब ऐसा नहीं है।बच्चे खुश हैं, परिवार खुश हैं, गरीबी दूर हो गई।

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