ओला इलेक्ट्रिक के शेयरों में 16% की तूफानी तेजी: मार्च बिक्री के आंकड़ों और नई सेल तकनीक ने भरी निवेशकों में जान।
भारतीय शेयर बाजार में ओला इलेक्ट्रिक के प्रदर्शन ने आज सभी का ध्यान अपनी ओर खींचा है। कंपनी के शेयरों में 16.2% तक की वृद्धि देखी गई
- दलाल बाजार की मंदी के बीच ओला का जलवा: लिथियम आयरन फास्फेट सेल की तैयारी और पीएलआई सर्टिफिकेशन से मिला बूस्ट
- ईवी मार्केट में वापसी की राह पर ओला इलेक्ट्रिक: 150% की मासिक बिक्री वृद्धि और सर्विस गारंटी ने बदला बाजार का मूड
भारतीय शेयर बाजार में ओला इलेक्ट्रिक के प्रदर्शन ने आज सभी का ध्यान अपनी ओर खींचा है। कंपनी के शेयरों में 16.2% तक की वृद्धि देखी गई, जिसके बाद शेयर की कीमत ₹33.14 के स्तर तक पहुंच गई। हालांकि यह अभी भी अपने ₹76 के आईपीओ मूल्य और ₹157 के सर्वकालिक उच्च स्तर से काफी नीचे है, लेकिन हालिया दिनों में आई यह रिकवरी कंपनी के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ मानी जा रही है। पिछले पांच कारोबारी सत्रों में स्टॉक ने लगभग 33% की कुल बढ़त हासिल की है। इस तेजी का सबसे प्रमुख कारण कंपनी की मार्च 2026 की प्रदर्शन रिपोर्ट है, जिसमें ओला ने अपने व्यापारिक प्रदर्शन में "मजबूत वापसी" की घोषणा की है। वाहन डेटा के अनुसार, मार्च में ओला इलेक्ट्रिक की कुल 10,117 इकाइयों का पंजीकरण हुआ, जो फरवरी के मुकाबले 150% से अधिक की वृद्धि को दर्शाता है।
इस उछाल के पीछे एक तकनीकी सफलता भी छिपी है। ओला इलेक्ट्रिक के संस्थापक भाविश अग्रवाल ने हाल ही में घोषणा की है कि कंपनी का इन-हाउस विकसित लिथियम आयरन फास्फेट (LFP) 46100 फॉर्मेट सेल अब उत्पादन के लिए तैयार है। यह नया सेल वर्तमान में उपयोग किए जा रहे एनएमसी (NMC) सेल से आकार में बड़ा और लागत में अधिक किफायती है। कंपनी का दावा है कि अगले क्वार्टर से यह तकनीक उनके उत्पादों का हिस्सा बनने लगेगी, जिससे न केवल ई-स्कूटर्स की कीमतें कम होंगी, बल्कि बैटरी की उम्र और सुरक्षा में भी सुधार होगा। इस घोषणा ने निवेशकों को यह भरोसा दिलाया है कि ओला इलेक्ट्रिक वर्टिकल इंटीग्रेशन (Vertical Integration) के माध्यम से अपनी उत्पादन लागत को कम करने और आत्मनिर्भर बनने की दिशा में सही कदम उठा रही है।
इसके अतिरिक्त, कंपनी को सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय से अपने नए 'रोडस्टर X+ 4.5 kWh' मॉडल के लिए प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) सर्टिफिकेशन प्राप्त हुआ है। यह सर्टिफिकेशन मिलने के बाद ओला इलेक्ट्रिक अब सरकार की पीएलआई योजना के तहत वित्तीय लाभ प्राप्त करने की पात्र हो गई है। यह प्रमाणन इस बात की पुष्टि करता है कि कंपनी अपने उत्पादों में घरेलू मूल्य संवर्धन (DVA) के मानदंडों को पूरा कर रही है। बाजार के जानकारों का कहना है कि पीएलआई लाभ मिलने से कंपनी की लाभप्रदता (Profitability) में सुधार होगा और वह बाजार में अन्य प्रतिस्पर्धियों के मुकाबले अपने उत्पादों की कीमतें अधिक आक्रामक रख सकेगी। हाल ही में रोडस्टर मॉडल की कीमतों में की गई भारी कटौती इसी रणनीति का हिस्सा है।
- सर्विस नेटवर्क में सुधार का असर
ओला इलेक्ट्रिक पिछले कुछ महीनों से ग्राहकों की शिकायतों और सर्विस से जुड़ी समस्याओं के कारण आलोचनाओं के घेरे में थी। हालांकि, कंपनी ने हाल ही में अपने सर्विस ऑपरेशंस में बड़े संरचनात्मक बदलाव किए हैं। वर्तमान रिपोर्टों के अनुसार, ओला अब अपने 80% से अधिक वाहनों की सर्विस उसी दिन (Same Day Service) पूरी कर रही है। स्पेयर पार्ट्स की बेहतर उपलब्धता और तेज़ डायग्नोस्टिक्स के कारण ग्राहकों का भरोसा फिर से बहाल हुआ है। सेवा में इस सुधार ने सीधे तौर पर मार्च की बिक्री के आंकड़ों को प्रभावित किया है, जिसे बाजार ने बहुत ही सकारात्मक रूप से लिया है।
गीगाफैक्ट्री के विस्तार और उत्पादन क्षमता में वृद्धि ने भी स्टॉक को समर्थन दिया है। ओला की गीगाफैक्ट्री की क्षमता वर्तमान 2.5 GWh से बढ़ाकर 6 GWh की जा रही है। कंपनी ने अपनी विनिमय फाइलिंग में बताया है कि उनके स्वदेशी रूप से विकसित '4680 भारत सेल' द्वारा संचालित हजारों वाहन पहले से ही सड़कों पर लाखों किलोमीटर का सफर तय कर चुके हैं। सेल उत्पादन में आने वाली 'इकॉनमी ऑफ स्केल' का लाभ अब धीरे-धीरे कंपनी के वित्तीय परिणामों में दिखने की उम्मीद है। निवेश फर्मों ने भी माना है कि यदि ओला अपनी इस परिचालन गति को बनाए रखती है, तो वह वित्त वर्ष 2027 तक परिचालन लाभ (EBITDA Positive) की स्थिति में पहुंच सकती है।
शेयर बाजार में इस तेजी का एक अन्य कारण 'बार्गेन हंटिंग' भी हो सकता है। अक्टूबर 2025 से मार्च 2026 के बीच ओला इलेक्ट्रिक के शेयर में लगभग 60% की भारी गिरावट आई थी। गिरावट के बाद शेयर काफी आकर्षक मूल्यांकन (Valuation) पर उपलब्ध थे, जिससे बड़े संस्थागत निवेशकों ने निचले स्तरों पर खरीदारी शुरू की। वॉल्यूम डेटा के अनुसार, पिछले कुछ सत्रों में ओला के शेयरों में ट्रेडिंग वॉल्यूम सामान्य औसत से 4-5 गुना अधिक रहा है। हालांकि, कोटक सिक्योरिटीज और गोल्डमैन सैक्स जैसी कुछ ब्रोकरेज फर्मों ने अभी भी सावधानी बरतने की सलाह दी है, क्योंकि कंपनी का नकद खर्च (Cash Burn) और बाजार हिस्सेदारी बनाए रखने की चुनौती अभी भी बनी हुई है।
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