"आप मुझसे ऐसे बात नहीं कर सकते": CEC ज्ञानेश कुमार पर भड़के IAS अनुराग यादव, बैठक में हुआ जोरदार हंगामा।

पश्चिम बंगाल में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए निर्वाचन आयोग द्वारा नियुक्त सामान्य पर्यवेक्षक अनुराग यादव और मुख्य

Apr 9, 2026 - 14:46
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"आप मुझसे ऐसे बात नहीं कर सकते": CEC ज्ञानेश कुमार पर भड़के IAS अनुराग यादव, बैठक में हुआ जोरदार हंगामा।
"आप मुझसे ऐसे बात नहीं कर सकते": CEC ज्ञानेश कुमार पर भड़के IAS अनुराग यादव, बैठक में हुआ जोरदार हंगामा।
  • चुनाव आयोग की बड़ी कार्रवाई: बंगाल पर्यवेक्षक अनुराग यादव पद से हटाए गए, मुख्य चुनाव आयुक्त से तीखी बहस के बाद लिया गया फैसला
  • पश्चिम बंगाल चुनाव 2026: पर्यवेक्षक और चुनाव आयोग के बीच टकराव, प्रशासनिक विवाद के कारण अनुराग यादव की हुई छुट्टी

पश्चिम बंगाल में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए निर्वाचन आयोग द्वारा नियुक्त सामान्य पर्यवेक्षक अनुराग यादव और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के बीच एक उच्च स्तरीय बैठक के दौरान अभूतपूर्व विवाद सामने आया है। यह घटना तब हुई जब चुनाव तैयारियों की समीक्षा के लिए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से राज्य के पर्यवेक्षकों की बैठक ली जा रही थी। चर्चा के दौरान, कानून-व्यवस्था और संवेदनशील मतदान केंद्रों के प्रबंधन को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ने कुछ कड़े सवाल पूछे। बताया जा रहा है कि सीईसी के लहजे और निर्देश देने के तरीके से अनुराग यादव असहमत थे, जिसके बाद उन्होंने खुले तौर पर अपनी नाराजगी व्यक्त की। इस घटना ने आयोग के भीतर अनुशासन और प्रोटोकॉल को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है।

बैठक के दौरान प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, स्थिति उस समय हाथ से बाहर निकल गई जब अनुराग यादव ने सीधे तौर पर सीईसी को संबोधित करते हुए कहा कि एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी होने के नाते उनके साथ इस तरह का व्यवहार अपेक्षित नहीं है। उन्होंने कहा, "आप मुझसे ऐसे बात नहीं कर सकते," जिसके बाद बैठक में सन्नाटा पसर गया। अनुराग यादव का तर्क था कि जमीनी स्तर पर काम कर रहे अधिकारियों की अपनी चुनौतियां होती हैं और उन पर दबाव डालने के बजाय उनके सुझावों को सम्मान दिया जाना चाहिए। हालांकि, चुनाव आयोग के शीर्ष नेतृत्व ने इसे अनुशासनहीनता और एक संवैधानिक संस्था के प्रमुख के अपमान के रूप में देखा। आयोग ने त्वरित कार्रवाई करते हुए अनुराग यादव को उनके वर्तमान कर्तव्यों से मुक्त करने का आदेश जारी कर दिया।

अनुराग यादव को हटाए जाने के पीछे चुनाव आयोग का तर्क है कि चुनाव जैसी संवेदनशील प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की व्यक्तिगत कलह या अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं की जा सकती। आयोग का मानना है कि यदि पर्यवेक्षक और मुख्य निर्वाचन अधिकारी के बीच समन्वय की कमी होगी, तो इसका सीधा असर चुनावी तैयारियों और सुरक्षा व्यवस्था पर पड़ेगा। अनुराग यादव को तत्काल प्रभाव से अपने मूल कैडर में वापस रिपोर्ट करने के निर्देश दिए गए हैं। उनकी जगह अब एक अन्य वरिष्ठ आईएएस अधिकारी को बंगाल में पर्यवेक्षक की जिम्मेदारी सौंपी जा रही है। राजनीतिक गलियारों में इस विवाद को चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवालों से जोड़कर भी देखा जा रहा है, हालांकि आयोग ने इसे विशुद्ध रूप से प्रशासनिक निर्णय बताया है।

  • प्रशासनिक मर्यादा बनाम व्यक्तिगत सम्मान

इस पूरे विवाद ने सिविल सेवा के अधिकारियों और संवैधानिक संस्थाओं के प्रमुखों के बीच कार्यस्थल पर होने वाले व्यवहार और मर्यादा को केंद्र में ला दिया है। जहां एक ओर मुख्य चुनाव आयुक्त के पास पर्यवेक्षकों को निर्देश देने का सर्वोच्च अधिकार है, वहीं दूसरी ओर आईएएस अधिकारियों का एक वर्ग इसे अधिकारियों के आत्म-सम्मान से जोड़कर देख रहा है। यह मामला अब संघ लोक सेवा आयोग के गलियारों में भी चर्चा का विषय है कि क्या किसी अधिकारी को नीतिगत असहमति दर्ज कराने का अधिकार बैठक के दौरान है या नहीं।

विवाद की पृष्ठभूमि में पश्चिम बंगाल की सुरक्षा चुनौतियां भी शामिल हैं। सूत्रों के अनुसार, बैठक में संवेदनशील क्षेत्रों में केंद्रीय बलों की तैनाती और स्थानीय प्रशासन के साथ समन्वय को लेकर मतभेद उभरे थे। अनुराग यादव ने कुछ क्षेत्रों में स्थानीय इनपुट के आधार पर अलग रणनीति की वकालत की थी, जिसे सीईसी ने संभवतः आयोग की मानक प्रक्रिया के विरुद्ध पाया। इसी बहस ने धीरे-धीरे व्यक्तिगत मोड़ ले लिया। बंगाल में चुनाव हमेशा से ही उच्च तनाव वाले रहे हैं और ऐसे में चुनाव आयोग किसी भी स्तर पर ढिलाई नहीं चाहता। अधिकारियों की अदला-बदली से आयोग यह संदेश देना चाहता है कि उसके निर्देशों का पालन बिना किसी हील-हवाले के होना चाहिए।

इस कार्रवाई के बाद पश्चिम बंगाल में प्रशासनिक अधिकारियों के बीच एक तरह की बेचैनी देखी जा रही है। अनुराग यादव, जिन्हें एक अनुभवी अधिकारी माना जाता है, के इस तरह से हटाए जाने से अन्य पर्यवेक्षकों पर भी मनोवैज्ञानिक दबाव बढ़ा है। राज्य सरकार के अधिकारियों ने इस पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है, लेकिन पर्दे के पीछे इसे "संवैधानिक वर्चस्व की लड़ाई" करार दिया जा रहा है। आयोग ने अपनी अधिसूचना में स्पष्ट किया है कि चुनाव प्रक्रिया को बाधित करने वाली किसी भी गतिविधि या व्यवहार को गंभीरता से लिया जाएगा। फिलहाल, नए पर्यवेक्षक की नियुक्ति के साथ ही आयोग ने बंगाल में अपनी निगरानी व्यवस्था को और अधिक सख्त करने का निर्णय लिया है।

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