मयूरभंज में रोंगटे खड़े कर देने वाला हादसा, मछली पकड़ने के दौरान गले में फंसी जिंदा मछली, दम घुटने से युवक की मौत।
ओडिशा के मयूरभंज जिले से एक ऐसी हृदय विदारक और दुर्लभ घटना सामने आई है, जिसने न केवल स्थानीय ग्रामीणों को बल्कि सोशल मीडिया के माध्यम से
- शिकार बना शिकारी: मयूरभंज के तालाब में मछली पकड़ते समय अचानक गले में समा गई छोटी मछली, तड़प-तड़प कर गई जान
- दुर्लभ और दर्दनाक घटना से मयूरभंज में शोक की लहर, स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने बताया आखिर कैसे सांस की नली में फंसकर काल बन जाती है मछली
ओडिशा के मयूरभंज जिले से एक ऐसी हृदय विदारक और दुर्लभ घटना सामने आई है, जिसने न केवल स्थानीय ग्रामीणों को बल्कि सोशल मीडिया के माध्यम से खबर सुनने वाले हर व्यक्ति को स्तब्ध कर दिया है। जिले के एक सुदूर गांव में रहने वाला युवक अपने दैनिक कार्य के रूप में पास के एक स्थानीय तालाब में मछली पकड़ने गया था, लेकिन उसे क्या पता था कि यह शिकार उसके जीवन का अंतिम शिकार साबित होगा। शनिवार सुबह हुई इस दुर्घटना में युवक के गले में एक छोटी लेकिन बेहद फुर्तीली जिंदा मछली फंस गई। मछली के सांस की नली के पास जाकर फंस जाने के कारण युवक को सांस लेने में भारी कठिनाई होने लगी और देखते ही देखते उसकी तड़प-तड़प कर मृत्यु हो गई। इस अप्रत्याशित हादसे ने पूरे मयूरभंज क्षेत्र में मातम का माहौल पैदा कर दिया है और लोग इस बात पर विश्वास नहीं कर पा रहे हैं कि एक छोटी सी मछली किसी की जान ले सकती है।
घटना के विस्तार में जाने पर पता चलता है कि युवक तालाब के पानी में उतरकर पारंपरिक तरीके से मछलियाँ पकड़ रहा था। बताया जा रहा है कि उसने एक मछली पकड़ ली थी और दूसरी मछली को पकड़ने की कोशिश में उसने पहली मछली को अपने दांतों के बीच दबा लिया था ताकि उसके दोनों हाथ खाली रहें। इसी दौरान वह मछली अचानक उसके मुंह के भीतर फिसल गई और सीधे गले की गहराई में जाकर अटक गई। जिंदा मछली होने के कारण उसने युवक के गले के भीतर छटपटाना शुरू कर दिया, जिससे वह और अधिक अंदर धंसती चली गई। युवक ने उसे बाहर निकालने का भरसक प्रयास किया और चिल्लाने की कोशिश की, लेकिन आवाज गले में ही घुटकर रह गई। पास में मौजूद अन्य मछुआरों ने जब उसे अजीब हरकतें करते और पानी में गिरते देखा, तो वे तुरंत उसकी मदद के लिए दौड़े। चिकित्सा विज्ञान के अनुसार, जब कोई जीवित मछली गले में जाती है, तो वह अपने पंखों (Fins) और छटपटाहट के कारण भोजन नली के बजाय श्वास नली को अवरुद्ध कर देती है। मछली के शरीर पर मौजूद कांटेदार हिस्से ऊतकों में धंस जाते हैं, जिससे उसे बाहर निकालना अत्यंत कठिन हो जाता है। ऐसी स्थिति में ऑक्सीजन की कमी के कारण मस्तिष्क काम करना बंद कर देता है और कुछ ही मिनटों में मृत्यु हो जाती है।
ग्रामीणों और अन्य मछुआरों ने तुरंत युवक को पानी से बाहर निकाला और उसे प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाने का प्रयास किया। रास्ते में ही युवक की हालत बिगड़ती चली गई और उसका चेहरा नीला पड़ने लगा। जब उसे अस्पताल पहुँचाया गया, तो वहां मौजूद डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। डॉक्टरों ने बताया कि मछली ने श्वास नली को पूरी तरह से बंद कर दिया था, जिसके कारण फेफड़ों तक हवा नहीं पहुँच पा रही थी। यह एक 'कार्डियोरेस्पिरेटरी अरेस्ट' का मामला था जो गले में बाहरी वस्तु (Foreign Body) के फंसने की वजह से हुआ। मयूरभंज की पुलिस ने इस मामले में अप्राकृतिक मृत्यु (UDR) का केस दर्ज किया है और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है ताकि तकनीकी रूप से मौत के कारणों की पुष्टि हो सके।
इस घटना ने मछुआरों के बीच सुरक्षा को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है। तटीय और ग्रामीण ओडिशा में लोग अक्सर छोटी मछलियों को पकड़ते समय उन्हें मुंह में दबा लेते हैं, जो कि एक बेहद खतरनाक अभ्यास है। स्थानीय प्रशासन ने अब लोगों को इस तरह के जोखिम भरे तरीकों से बचने की सलाह दी है। मयूरभंज के इस गांव में सन्नाटा पसरा हुआ है और लोग मृतक के परिवार को सांत्वना देने पहुँच रहे हैं। पुलिस की प्रारंभिक जांच में किसी भी तरह की साजिश की बात सामने नहीं आई है और इसे केवल एक दुर्भाग्यपूर्ण दुर्घटना माना जा रहा है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद शव परिजनों को सौंप दिया जाएगा।
मयूरभंज जिले के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वे इस मामले की हर कोण से जांच कर रहे हैं, हालांकि प्राथमिक साक्ष्य और चश्मदीदों के बयान सीधे तौर पर मछली फंसने की बात कह रहे हैं। क्षेत्र में ऐसी घटनाएं पहले भी इक्का-दुक्का सुनी गई हैं, लेकिन किसी की मौत हो जाना विरला ही होता है। प्रशासन अब मछली पकड़ने वाले समुदायों के बीच जागरूकता फैलाने की योजना बना रहा है ताकि वे सुरक्षा उपकरणों का उपयोग करें और शिकार के दौरान ऐसी घातक गलतियां न दोहराएं। इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि प्रकृति के साथ खिलवाड़ या थोड़ी सी लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है। मृतक युवक अपने परिवार का इकलौता कमाने वाला सदस्य था, जिससे परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। स्थानीय स्वयंसेवी संस्थाओं ने सरकार से पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता प्रदान करने की मांग की है। गांव के बुजुर्गों का कहना है कि उन्होंने अपने जीवन में कई तरह के हादसे देखे हैं, लेकिन इस तरह से मछली का गले में फंसकर जान ले लेना उनके लिए भी अविश्वसनीय है। अस्पताल के रिकॉर्ड के अनुसार, युवक के गले से निकाली गई मछली लगभग 3 से 4 इंच लंबी थी, जो आमतौर पर स्थानीय तालाबों में प्रचुर मात्रा में पाई जाती है।
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