उत्तर-पश्चिमी भारत पर दोहरा पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय, दिल्ली-एनसीआर समेत कई राज्यों में आज आंधी, बारिश और ओलावृष्टि की चेतावनी।
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने उत्तर-पश्चिमी भारत के लिए एक गंभीर मौसम संबंधी चेतावनी जारी की है, जिसमें बताया गया है
- हिमालयी क्षेत्रों में भारी हिमपात और मैदानी इलाकों में बिगड़ा मौसम का मिजाज, मंगलवार तक जारी रहेगा विक्षोभ का घातक असर
- मौसम विभाग का ऑरेंज अलर्ट: 50 किमी की रफ्तार से चलेंगी हवाएं, किसानों की बढ़ी चिंता, तापमान में आएगी अचानक भारी गिरावट
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने उत्तर-पश्चिमी भारत के लिए एक गंभीर मौसम संबंधी चेतावनी जारी की है, जिसमें बताया गया है कि क्षेत्र वर्तमान में लगातार दो शक्तिशाली पश्चिमी विक्षोभों (Western Disturbances) के प्रभाव में है। इन विक्षोभों की सक्रियता के कारण जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्यों के साथ-साथ दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के मैदानी इलाकों में मौसम ने करवट बदल ली है। शुक्रवार को शुरू हुई इस हलचल के बाद शनिवार, 4 अप्रैल 2026 को इसकी तीव्रता अपने चरम पर रहने की संभावना है। विक्षोभ के कारण अरब सागर से आने वाली नमी और ठंडी हवाओं के मिलन से एक चक्रवाती परिसंचरण विकसित हुआ है, जो भारी वर्षा और ओलावृष्टि के लिए अनुकूल परिस्थितियां पैदा कर रहा है।
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, इस दोहरे विक्षोभ की सबसे ज्यादा सक्रियता शनिवार और उसके बाद आगामी मंगलवार को देखी जाएगी। शनिवार सुबह से ही राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और आसपास के सैटेलाइट शहरों में बादलों की आवाजाही तेज हो गई है। विभाग ने पूर्वानुमान जताया है कि दोपहर बाद या शाम तक इन क्षेत्रों में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज धूल भरी आंधी चल सकती है, जिसके साथ गरज-चमक के साथ मध्यम से भारी बारिश होने की संभावना है। कुछ संवेदनशील इलाकों में ओलावृष्टि की भी चेतावनी दी गई है, जिससे न केवल आम जनजीवन प्रभावित होगा बल्कि यातायात और बिजली आपूर्ति में भी व्यवधान आने की आशंका है।
किसानों के लिए 'बदरा' बना मुसीबत
अप्रैल का यह समय रबी की फसलों, विशेषकर गेहूं की कटाई और मड़ाई का मुख्य सीजन होता है। बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि पकी हुई फसलों के लिए विनाशकारी साबित हो सकती है। कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह दी है कि यदि फसल कट चुकी है, तो उसे सुरक्षित स्थानों पर ढक कर रखें और फिलहाल सिंचाई या कीटनाशकों के छिड़काव से बचें। ओलावृष्टि से दानों के झड़ने और फसल के बिछने का खतरा सबसे अधिक है।
पहाड़ी राज्यों की बात करें तो हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के ऊंचाई वाले इलाकों में भारी हिमपात (Snowfall) का सिलसिला शनिवार को भी जारी रहने वाला है। इसके चलते कई प्रमुख राजमार्गों और संपर्क मार्गों पर फिसलन बढ़ने की वजह से यातायात बाधित हो सकता है। पर्यटकों को सलाह दी गई है कि वे ऊंचाई वाले क्षेत्रों की यात्रा करने से बचें। चमोली, उत्तरकाशी, लाहौल-स्पीति और किन्नौर जैसे जिलों में हिमस्खलन की भी चेतावनी दी गई है। पहाड़ों पर हो रही इस बर्फबारी का सीधा असर मैदानी इलाकों के तापमान पर पड़ेगा, जिससे आने वाले दो-तीन दिनों तक लोगों को सुबह और रात के समय हल्की ठंडक का अहसास होगा और भीषण गर्मी से फिलहाल राहत मिलेगी।
पंजाब और हरियाणा के कृषि प्रधान क्षेत्रों में भी विक्षोभ का व्यापक असर दिख रहा है। यहां शनिवार को ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है, जिसका अर्थ है कि निवासियों को खराब मौसम के लिए तैयार रहना चाहिए। गरज के साथ छींटे पड़ने और बिजली गिरने की घटनाएं होने की संभावना है। राजस्थान के पश्चिमी हिस्सों में धूल भरी आंधी चलने से दृश्यता (Visibility) कम हो सकती है, जो सड़क परिवहन के लिए चुनौतीपूर्ण होगा। मौसम विभाग का कहना है कि रविवार और सोमवार को विक्षोभ के प्रभाव में थोड़ी कमी आ सकती है, लेकिन एक और सक्रिय विक्षोभ मंगलवार को फिर से दस्तक देगा, जिससे बारिश का यह दौर दोबारा शुरू हो सकता है।
तापमान के आंकड़ों पर नजर डालें तो इस वर्षा जनित गतिविधि के कारण अधिकतम तापमान में 3 से 5 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट दर्ज की जा सकती है। दिल्ली में जहां कुछ दिन पहले पारा 35 डिग्री के पार जाने लगा था, वहीं अब इसके 30 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने का अनुमान है। हालांकि, आर्द्रता (Humidity) बढ़ने से उमस का अहसास भी हो सकता है। मौसम विभाग ने स्पष्ट किया है कि अप्रैल के महीने में इस तरह के मजबूत पश्चिमी विक्षोभों का आना असामान्य नहीं है, लेकिन लगातार दो प्रणालियों का एक साथ सक्रिय होना मौसम की अनिश्चितता को बढ़ाता है। बिजली कड़कने के दौरान ऊंचे पेड़ों या खंभों के नीचे शरण न लेने की हिदायत दी गई है।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिलों जैसे मेरठ, बागपत, मुजफ्फरनगर और गाजियाबाद में भी शनिवार शाम तक तेज हवाओं के साथ बौछारें पड़ने की उम्मीद है। प्रशासन ने नगर निकायों को जलभराव की स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहने को कहा है। हवाई यातायात पर भी इसका प्रभाव पड़ सकता है, क्योंकि आंधी और खराब दृश्यता के कारण उड़ानों के मार्ग परिवर्तित किए जा सकते हैं या उनमें देरी हो सकती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने बदलते मौसम के कारण सर्दी-खांसी और वायरल बुखार के प्रति लोगों को सचेत रहने की सलाह दी है। मंगलवार तक उत्तर-पश्चिमी भारत के अधिकांश हिस्सों में बादलों का डेरा रहेगा और रुक-रुक कर बारिश की गतिविधियां चलती रहेंगी।
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