सेंसेक्स में 2,600 अंकों का ऐतिहासिक उछाल, ट्रंप-ईरान युद्धविराम की खबर से निफ्टी ने पार किया 23,800 का स्तर।
भारतीय शेयर बाजार के लिए 8 अप्रैल 2026 का दिन एक ऐतिहासिक रिकवरी के रूप में दर्ज किया गया है। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) का सूचकांक
- भारतीय शेयर बाजार में लौटी रौनक: कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और शांति वार्ता की पहल से निवेशकों ने कमाए 12 लाख करोड़
- दलाल स्ट्रीट पर बुल्स का जबरदस्त हमला: शांति समझौते के बाद ऑटो, रियल्टी और बैंकिंग सेक्टर में भारी खरीदारी
भारतीय शेयर बाजार के लिए 8 अप्रैल 2026 का दिन एक ऐतिहासिक रिकवरी के रूप में दर्ज किया गया है। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) का सूचकांक सेंसेक्स सुबह के कारोबार में 2,618 अंकों की भारी बढ़त के साथ 77,235 के स्तर पर पहुंच गया। इसी तरह नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का निफ्टी-50 भी 755 अंकों या 3.3 प्रतिशत की उछाल के साथ 23,878 के स्तर पर कारोबार करता देखा गया। बाजार खुलने के कुछ ही मिनटों के भीतर निवेशकों की संपत्ति में लगभग 12 लाख करोड़ रुपये का इजाफा हुआ। यह तेजी उस समय आई है जब पिछले पांच हफ्तों से अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते संघर्ष के कारण बाजार लगातार दबाव में था और निवेशकों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा था।
इस अभूतपूर्व तेजी का सबसे बड़ा ट्रिगर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा दी गई युद्धविराम की जानकारी है। ट्रंप ने घोषणा की कि ईरान अगले दो सप्ताह तक किसी भी सैन्य कार्रवाई को रोकने और दुनिया के सबसे व्यस्त तेल मार्ग, होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने पर सहमत हो गया है। इस कूटनीतिक जीत ने बाजार में उस जोखिम को कम कर दिया है जो युद्ध की आशंका के कारण बना हुआ था। जैसे ही संघर्ष टलने की खबरें वैश्विक समाचार माध्यमों पर प्रसारित हुईं, दुनिया भर के बाजारों के साथ-साथ भारतीय सूचकांकों ने भी 'राहत रैली' (Relief Rally) दिखाई। निवेशकों ने उन क्षेत्रों में आक्रामक खरीदारी शुरू कर दी, जो पिछले दिनों युद्ध के डर से सबसे ज्यादा प्रभावित हुए थे। आज की तेजी के बाद बीएसई पर सूचीबद्ध सभी कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण बढ़कर 441.18 लाख करोड़ रुपये हो गया है, जो कल 428.77 लाख करोड़ रुपये था।
कच्चे तेल की कीमतों में आई भारी गिरावट ने भारतीय बाजार के लिए उत्प्रेरक का काम किया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमतें, जो हाल ही में 115 डॉलर प्रति बैरल के पार चली गई थीं, युद्धविराम की खबर के बाद 16 प्रतिशत से अधिक गिरकर 95 डॉलर के स्तर पर आ गईं। भारत अपनी तेल जरूरतों का 80 प्रतिशत से अधिक आयात करता है, इसलिए तेल की कीमतों में कमी का सीधा मतलब देश की अर्थव्यवस्था के लिए कम व्यापार घाटा और नियंत्रित मुद्रास्फीति है। यही कारण है कि आज विमानन कंपनियों, पेंट निर्माताओं और ऑटोमोबाइल क्षेत्र के शेयरों में 7 से 10 प्रतिशत तक की बढ़त देखी जा रही है। विशेष रूप से इंडिगो जैसी कंपनियों के शेयरों ने आज दोहरे अंकों में वृद्धि दर्ज की है।
क्षेत्रीय प्रदर्शन के आधार पर देखें तो रियल्टी और ऑटो सेक्टर ने आज बाजार की अगुवाई की है। निफ्टी रियल्टी इंडेक्स में 6 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई, जबकि ऑटो इंडेक्स 4.5 प्रतिशत ऊपर रहा। बैंकिंग और वित्तीय सेवाओं के शेयरों में भी जबरदस्त सुधार देखा गया, जहाँ निजी क्षेत्र के बड़े बैंकों ने इंडेक्स को ऊपर ले जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। आईटी सेक्टर, जो वैश्विक अनिश्चितताओं के प्रति संवेदनशील रहता है, उसमें भी आज खरीदारी का रुझान रहा। बाजार के जानकारों का मानना है कि युद्धविराम ने न केवल आपूर्ति श्रृंखला की चिंताओं को दूर किया है, बल्कि कॉर्पोरेट मुनाफे की उम्मीदों को भी फिर से जिंदा कर दिया है, जिससे निवेशकों का जोखिम लेने का उत्साह (Risk Appetite) बढ़ा है।
बाजार में इस भारी उछाल के बीच भारत वीआईएक्स (India VIX), जो बाजार की अस्थिरता या डर को मापता है, उसमें 19 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। वीआईएक्स का 20 के स्तर के आसपास आना इस बात का संकेत है कि अब बाजार में घबराहट काफी कम हो गई है और निवेशक स्थिरता की उम्मीद कर रहे हैं। पिछले एक महीने में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) ने भारतीय बाजार से सवा लाख करोड़ रुपये से अधिक निकाले थे, लेकिन आज की शांति पहल के बाद एफपीआई के वापस लौटने की प्रबल संभावना दिख रही है। रुपया भी डॉलर के मुकाबले मजबूत हुआ है, जिससे आयातकों को राहत मिली है और विदेशी निवेश के लिए माहौल और अधिक अनुकूल हुआ है।
आज की तेजी के पीछे एक अन्य महत्वपूर्ण कारक भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति की बैठक भी है। बाजार को उम्मीद है कि वैश्विक तनाव कम होने और तेल की कीमतें घटने के बाद केंद्रीय बैंक अपनी ब्याज दरों के रुख में कुछ नरमी ला सकता है या कम से कम यथास्थिति बनाए रख सकता है। महंगाई के मोर्चे पर राहत मिलने की संभावना ने आरबीआई को विकास को प्राथमिकता देने का मौका दिया है। यदि अगले दो सप्ताह के दौरान शांति वार्ता किसी स्थायी समाधान की ओर बढ़ती है, तो विश्लेषकों का अनुमान है कि निफ्टी जल्द ही 24,500 के नए शिखर को छू सकता है। हालांकि, तकनीकी विश्लेषक 23,000 के स्तर को अभी भी एक मजबूत सपोर्ट मान रहे हैं।
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