क्या खत्म हो जाएगा क्रिप्टोकरेंसी का साम्राज्य? Google की 'क्वांटम' रिसर्च से मची खलबली?

क्रिप्टोकरेंसी की दुनिया में पिछले कुछ घंटों से एक ऐसी खबर चर्चा का विषय बनी हुई है, जिसने निवेशकों और तकनीकी विशेषज्ञों की रातों की नींद उड़ा

Apr 2, 2026 - 13:46
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क्या खत्म हो जाएगा क्रिप्टोकरेंसी का साम्राज्य? Google की 'क्वांटम' रिसर्च से मची खलबली?
क्या खत्म हो जाएगा क्रिप्टोकरेंसी का साम्राज्य? Google की 'क्वांटम' रिसर्च से मची खलबली?
  • बिटकॉइन और इथेरियम की सुरक्षा दीवार में बड़ी सेंध: महज 9 मिनट में टूट सकता है दुनिया का सबसे मजबूत पासवर्ड
  • डिजिटल करेंसी के लिए 'Q-Day' की दस्तक: गूगल के नए दावों ने बढ़ा दी करोड़ों निवेशकों की धड़कन

क्रिप्टोकरेंसी की दुनिया में पिछले कुछ घंटों से एक ऐसी खबर चर्चा का विषय बनी हुई है, जिसने निवेशकों और तकनीकी विशेषज्ञों की रातों की नींद उड़ा दी है। दुनिया की दिग्गज टेक कंपनी गूगल (Google) की ओर से जारी की गई एक नई रिसर्च रिपोर्ट में दावा किया गया है कि भविष्य में क्वांटम कंप्यूटिंग (Quantum Computing) के जरिए बिटकॉइन (Bitcoin) और इथेरियम (Ethereum) जैसी प्रमुख डिजिटल मुद्राओं की सुरक्षा को आसानी से भेदा जा सकता है। अब तक यह माना जाता था कि ब्लॉकचेन तकनीक इतनी सुरक्षित है कि इसे दुनिया का कोई भी सुपरकंप्यूटर नहीं तोड़ सकता, लेकिन गूगल के हालिया शोध ने इस धारणा को हिला कर रख दिया है। शोध पत्र में संकेत दिए गए हैं कि जिसे हम अब तक अभेद्य कवच मान रहे थे, वह क्वांटम तकनीक के सामने ताश के पत्तों की तरह ढह सकता है। यह खबर ऐसे समय में आई है जब क्रिप्टो बाजार पहले से ही अपनी अस्थिरता के लिए जाना जाता है और इस तरह की तकनीकी चेतावनी ने भविष्य के प्रति आशंकाओं को और अधिक गहरा कर दिया है।

गूगल के 'क्वांटम एआई' (Quantum AI) विभाग द्वारा प्रकाशित इस श्वेत पत्र (Whitepaper) में एक चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है। रिसर्च के अनुसार, बिटकॉइन और अन्य प्रमुख ब्लॉकचेन नेटवर्क जिस 'एलिप्टिक कर्व क्रिप्टोग्राफी' (ECC) का उपयोग करते हैं, उसे तोड़ने के लिए पहले जितने संसाधनों की जरूरत बताई गई थी, अब उससे 20 गुना कम क्षमता में यह काम किया जा सकता है। पुराने अनुमानों के अनुसार, बिटकॉइन के सुरक्षा कोड को क्रैक करने के लिए लगभग 2 करोड़ (20 मिलियन) फिजिकल क्वबिट्स (Qubits) वाले क्वांटम कंप्यूटर की आवश्यकता थी। लेकिन गूगल के वैज्ञानिकों ने अब यह सिद्ध कर दिया है कि केवल 5 लाख (500,000) क्वबिट्स वाला एक उन्नत क्वांटम सिस्टम भी इस जटिल एन्क्रिप्शन को महज कुछ मिनटों में तोड़ सकता है। यह आंकड़ा इसलिए डराने वाला है क्योंकि क्वांटम तकनीक की प्रगति की गति उम्मीद से कहीं अधिक तेज है, जिससे वह समय (जिसे वैज्ञानिक 'Q-Day' कह रहे हैं) अब बहुत नजदीक दिखाई दे रहा है।

इस शोध का सबसे खतरनाक पहलू 'रियल-टाइम ट्रांजैक्शन हाईजैकिंग' (Real-time Transaction Hijacking) की संभावना है। गूगल के रिसर्चर्स ने एक ऐसा मॉडल तैयार किया है जो यह दिखाता है कि जब कोई व्यक्ति बिटकॉइन भेजता है, तो लेनदेन पूरा होने से पहले उसकी 'पब्लिक की' (Public Key) नेटवर्क पर कुछ समय के लिए दिखाई देती है। एक शक्तिशाली क्वांटम कंप्यूटर इस छोटे से अंतराल (लगभग 9 से 12 मिनट) में उस पब्लिक की से 'प्राइवेट की' (Private Key) का पता लगा सकता है। इसका मतलब यह है कि आपके द्वारा भेजे गए पैसे आपके गंतव्य तक पहुँचने से पहले ही कोई क्वांटम हमलावर अपने खाते में डाइवर्ट कर सकता है। इस तरह का हमला ब्लॉकचेन की मूल भावना 'सुरक्षा' पर सीधा प्रहार है। यदि हमलावर नेटवर्क की पुष्टि से पहले ही चाबियां हासिल कर लेता है, तो बिटकॉइन का पूरा ढांचा ही खतरे में पड़ जाएगा।

खतरे की जद में पुराने वॉलेट शोध के अनुसार, लगभग 69 लाख बिटकॉइन (कुल आपूर्ति का 32%) ऐसे 'लीगेसी वॉलेट' में रखे हैं जिनकी पब्लिक की पहले से ही सार्वजनिक रूप से उपलब्ध है। इन वॉलेट्स पर क्वांटम हमला किसी भी समय किया जा सकता है, क्योंकि इनके पास 'रियल-टाइम' सुरक्षा का कोई विकल्प नहीं है।

इथेरियम के मामले में स्थिति और भी अधिक चिंताजनक बताई जा रही है। रिसर्च के अनुसार, इथेरियम नेटवर्क पर एक बार लेनदेन करने के बाद खाते की पब्लिक की हमेशा के लिए उजागर हो जाती है। यह एक 'एट-रेस्ट अटैक' (At-rest Attack) के लिए रास्ता खोल देता है, जहां एक क्वांटम कंप्यूटर बिना किसी समय सीमा के दबाव के, धीरे-धीरे आपके खाते की सुरक्षा को तोड़ सकता है। गूगल के अनुमान के मुताबिक, अगर कोई शक्तिशाली क्वांटम मशीन अस्तित्व में आती है, तो वह दुनिया के 1,000 सबसे बड़े इथेरियम खातों को, जिनमें लगभग 2 करोड़ से ज्यादा ईथर (ETH) जमा हैं, मात्र 9 दिनों के भीतर साफ कर सकती है। यह तथ्य उन बड़े संस्थागत निवेशकों के लिए बड़ी टेंशन की बात है जिन्होंने अपनी संपत्ति का बड़ा हिस्सा इन डिजिटल एसेट्स में निवेश कर रखा है।

हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम का एक दूसरा सकारात्मक पहलू भी है जिसे समझना जरूरी है। भले ही गूगल की रिसर्च ने खतरे की घंटी बजाई है, लेकिन क्रिप्टो कम्युनिटी भी हाथ पर हाथ धरे नहीं बैठी है। बिटकॉइन और इथेरियम के डेवलपर्स वर्तमान में 'पोस्ट-क्वांटम क्रिप्टोग्राफी' (Post-Quantum Cryptography - PQC) पर तेजी से काम कर रहे हैं। यह एक ऐसी उन्नत सुरक्षा तकनीक है जिसे क्वांटम कंप्यूटर भी नहीं तोड़ पाएंगे। इसके लिए बिटकॉइन नेटवर्क में बदलाव करने के प्रस्तावों पर पहले से ही चर्चा चल रही है और कुछ टेस्टनेट (Testnet) भी तैनात किए जा चुके हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि जैसे-जैसे खतरा बढ़ेगा, ब्लॉकचेन को अपग्रेड कर दिया जाएगा। इतिहास गवाह है कि जब भी किसी तकनीक पर संकट आया है, नवाचार (Innovation) ने उसका समाधान निकाला है। इसलिए, 'खेल खत्म' होने की बात कहना फिलहाल जल्दबाजी होगी।

गूगल के इस खुलासे के पीछे एक बड़ी रणनीति यह भी मानी जा रही है कि वैश्विक स्तर पर सुरक्षा मानकों को समय रहते बदला जाए। गूगल स्वयं 2029 तक अपने सिस्टम को पूरी तरह से क्वांटम-सुरक्षित बनाने का लक्ष्य लेकर चल रहा है। यह रिसर्च केवल क्रिप्टो को निशाना बनाने के लिए नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर (बैंकिंग, सरकारी डेटा, सैन्य संचार) को सचेत करने के लिए है। अगर क्वांटम कंप्यूटर बिटकॉइन तोड़ सकता है, तो वह आपके बैंक खाते और क्रेडिट कार्ड की सुरक्षा को भी कुछ सेकंड में खत्म कर सकता है। इसलिए, यह समस्या केवल क्रिप्टोकरेंसी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरी इंटरनेट सुरक्षा के पुनर्गठन का आह्वान है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस चुनौती से निपटने के लिए सरकारों और निजी कंपनियों को मिलकर काम करना होगा।

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