Prayagraj : सांवले रंग और आत्मसम्मान के संघर्ष की कहानी ‘गुड़िया की शादी’ ने दर्शकों को किया भावविभोर
नाटक में दिखाया गया कि गुड़िया अपने रूप-रंग की उपेक्षा सहते हुए भी जीवन को सकारात्मक ढंग से जीती है। कहानी में मोड़ तब आता है जब शादी से ठीक पहले एक घटना उसके चेहरे को और बिगाड़ देती है, जिससे परिवार में संकट खड़ा हो
प्रयागराज के उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र में पाँच दिवसीय भरत मुनि नाट्य समारोह का शानदार आगाज हुआ। पहले दिन मंचित नाटक ‘गुड़िया की शादी’ ने एक ऐसी लड़की की मर्मस्पर्शी कहानी पेश की, जो अपने सांवले रंग के कारण समाज और परिवार के तानों का सामना करती है। इसके बावजूद गुड़िया के मन की अच्छाई और चेहरे की मुस्कान कभी कम नहीं होती। समिता सागर की लिखी और संजय श्रीवास्तव के निर्देशन में तैयार इस प्रस्तुति ने बुंदेलखंड के एक साधारण परिवार के संघर्षों को मंच पर जीवंत कर दिया। कार्यक्रम की शुरुआत मुख्य अतिथि अंकित शुक्ला, उपनिदेशक मुकेश उपाध्याय और सलाहकार कल्पना सहाय ने दीप जलाकर की।
नाटक में दिखाया गया कि गुड़िया अपने रूप-रंग की उपेक्षा सहते हुए भी जीवन को सकारात्मक ढंग से जीती है। कहानी में मोड़ तब आता है जब शादी से ठीक पहले एक घटना उसके चेहरे को और बिगाड़ देती है, जिससे परिवार में संकट खड़ा हो जाता है। इस कठिन समय में उसकी भाभी का मजबूत चरित्र उभरकर सामने आता है। जैसे-जैसे नाटक आगे बढ़ता है, घर के सदस्यों की मानसिक पीड़ा और आपसी खिंचाव सामने आने लगता है। गुड़िया की मासूम बातें दर्शकों को यह गहरा संदेश देती हैं कि असली सुंदरता बाहरी रूप में नहीं बल्कि मन की सरलता में होती है। भूमि बाथरी ने गुड़िया की भूमिका को बेहद संजीदगी से निभाया। साथ ही अभिषेक शाही, गीतिका देवदास, कश्फ़ ख़ान, गीता अहिरवार, साक्षी गुप्ता, एकता चौरसिया, लक्ष्य अरोड़ा, विनीता देवी और रोशन अवधिया ने अपने अभिनय से दर्शकों को बांधे रखा। संगीत और सहायक निर्देशन अभिषेक दुबे का रहा।
Also Click : Hathras : हाथरस महिला थाने की पहल से टूटा परिवार फिर जुड़ा, रितु तोमर की काउंसलिंग से पारिवारिक विवाद सुलझा
What's Your Reaction?









