Sambhal : कुर्बानी इबादत है, प्रदर्शन नहीं… सोशल मीडिया पर तस्वीरें और वीडियो वायरल न करें

मुफ़्ती रियाज़ उल हक कासमी ने कहा कि जब अल्लाह का हुक्म किसी ईमान वाले के सामने आ जाए तो उसे अपनी तमाम ख्वाहिशात को पीछे छोड़कर अल्लाह के आदेश को खुशी से कबूल करना चाहिए। उन्होंने कहा कि कुर्बानी इंसान को हर गलत चीज़ की कुर्बानी देने और नेक रास्ते पर

May 22, 2026 - 22:26
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Sambhal : कुर्बानी इबादत है, प्रदर्शन नहीं… सोशल मीडिया पर तस्वीरें और वीडियो वायरल न करें
मुफ्ती रियाज़ उल हक कासमी, इमाम, शाही जामा मस्जिद दरबार सरायतरीन

Report : उवैस दानिश, सम्भल

ईद-उल-अज़हा से पहले सरायतरीन की शाही जामा मस्जिद दरबार के इमाम मुफ़्ती रियाज़ उल हक कासमी ने मुस्लिम समाज से शरीअत, सफाई और सामाजिक जिम्मेदारी के साथ त्योहार मनाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि ईद-उल-अज़हा हज़रत इब्राहिम अलैहिस्सलाम की सुन्नत को ज़िंदा करने का त्योहार है और इसका असली पैगाम अल्लाह के हुक्म के आगे पूरी तरह झुक जाना है।

मुफ़्ती रियाज़ उल हक कासमी ने कहा कि जब अल्लाह का हुक्म किसी ईमान वाले के सामने आ जाए तो उसे अपनी तमाम ख्वाहिशात को पीछे छोड़कर अल्लाह के आदेश को खुशी से कबूल करना चाहिए। उन्होंने कहा कि कुर्बानी इंसान को हर गलत चीज़ की कुर्बानी देने और नेक रास्ते पर चलने का सबक देती है। उन्होंने बताया कि कुर्बानी हर उस शख्स पर वाजिब है जिसके पास साढ़े बावन तोला चांदी या उसके बराबर मालियत मौजूद हो। उन्होंने कहा कि इसके लिए साल भर मालदार होना जरूरी नहीं है, बल्कि 10, 11 या 12 ज़िलहिज्ज में भी यदि इतनी मालियत मौजूद है तो कुर्बानी वाजिब हो जाती है। गोश्त के बंटवारे को लेकर उन्होंने कहा कि बेहतर तरीका यह है कि कुर्बानी के गोश्त के तीन हिस्से किए जाएं- एक हिस्सा अपने लिए, एक रिश्तेदारों और दोस्तों के लिए तथा एक हिस्सा गरीबों और जरूरतमंदों में तक्सीम किया जाए। हालांकि जरूरत पड़ने पर पूरा गोश्त घर में भी इस्तेमाल किया जा सकता है।

ईद-उल-अज़हा के मौके पर नौजवानों को खास नसीहत देते हुए मुफ़्ती साहब ने कहा कि सोशल मीडिया पर कुर्बानी किए गए जानवरों, ज़िबाह या जानवरों के साथ वीडियो और तस्वीरें वायरल करने से बचें। उन्होंने कहा कि कुर्बानी ऐसी जगह की जाए जो आम रास्तों और सार्वजनिक स्थानों से दूर हो। साथ ही उन्होंने अपील की कि गोश्त को एक जगह से दूसरी जगह ले जाते समय उसे ढककर ले जाया जाए और पर्दे का खास एहतमाम रखा जाए। उन्होंने कहा कि कोई भी ऐसा काम न किया जाए जिससे दूसरे लोगों को तकलीफ पहुंचे, क्योंकि इस्लाम अमन, सफाई और इंसानियत का पैगाम देता है।

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