Sultanpur News: सुल्तानपुर मेडिकल कॉलेज में मरीजों की बदहाली- डॉक्टर-स्टाफ की अनुपस्थिति, बुनियादी सुविधाओं का अभाव
आरोप है कि मेडिकल कॉलेज के शीर्ष अधिकारी अपने निजी अस्पतालों में व्यस्त रहते हैं, जिसके कारण राजकीय मेडिकल कॉलेज की व्यवस्था चरमराई हुई है। मुख्य चिकित्सा...
By INA News Sultanpur.
सुल्तानपुर : सुल्तानपुर के राजकीय मेडिकल कॉलेज में मरीजों की दुर्दशा और अस्पताल प्रशासन की लापरवाही ने स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाल स्थिति को उजागर कर दिया है। मरीजों को न केवल बुनियादी सुविधाओं के लिए तरसना पड़ रहा है, बल्कि डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ की अनुपस्थिति ने उनकी परेशानियों को और बढ़ा दिया है। अस्पताल के नेत्र वार्ड से लेकर अन्य वार्डों तक में अव्यवस्था का आलम है, जिसके कारण मरीज और उनके तीमारदार भारी परेशानी का सामना कर रहे हैं।
बुनियादी सुविधाओं का अभाव
मेडिकल कॉलेज के नेत्र वार्ड में बिजली के उपकरण बंद पड़े हैं, जिसके कारण मरीजों को भीषण गर्मी में हस्तचालित पंखों का सहारा लेना पड़ रहा है। कई मरीजों को मजबूरी में अपने घरों से पंखे मंगवाने पड़े हैं। वार्डों में न तो पर्याप्त वेंटिलेशन की व्यवस्था है और न ही मरीजों की सुविधा के लिए अन्य जरूरी इंतजाम। मरीजों के परिजनों का कहना है कि अस्पताल में स्वच्छता और बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव है, जिससे मरीजों की हालत और खराब हो रही है।
डॉक्टर और स्टाफ की अनुपस्थिति
अस्पताल में मेडिकल स्टाफ की कमी और उनकी ड्यूटी से अनुपस्थिति ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। रजिस्टर में दोपहर 2 बजे की शिफ्ट की हाजिरी दर्ज होने के बावजूद अधिकांश स्टाफ वार्डों में मौजूद नहीं है। मरीजों का कहना है कि सुबह से डॉक्टर राउंड पर नहीं आए, जिसके कारण उनकी जांच और उपचार में देरी हो रही है। उदाहरण के तौर पर, बेजुबान पशु के हमले में घायल बुजुर्ग मरीज गया प्रसाद का टूटा हुआ हाथ न तो किसी डॉक्टर ने देखा और न ही उसकी ड्रेसिंग की गई। इसी तरह, नेत्र वार्ड के बेड नंबर 5 पर भर्ती धंमौर निवासी राम दीन को भी न तो डॉक्टर ने देखा और न ही कोई स्टाफ उनकी देखभाल के लिए उपलब्ध हुआ।
तीमारदारों की शिकायत: लापरवाही का आलम
मरीजों के परिजनों ने अस्पताल की लचर व्यवस्था पर गहरी नाराजगी जताई है। वार्ड के ऊपरी तल पर भर्ती कमला देवी के परिजनों ने बताया कि उन्होंने कई बार नर्स रूम में आवाज लगाई, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला।
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तीमारदार बलराम, मृत्युंजय मिश्रा और सत्य प्रकाश ने शिकायत की कि ग्लूकोज की बोतल खत्म होने के बाद उसे बदलने के लिए कोई स्टाफ उपलब्ध नहीं था। मरीजों के परिजनों का कहना है कि अस्पताल में स्टाफ की कमी और उनकी लापरवाही के कारण मरीजों की जान जोखिम में है।
अधिकारियों की व्यस्तता, मरीजों की अनदेखी
आरोप है कि मेडिकल कॉलेज के शीर्ष अधिकारी अपने निजी अस्पतालों में व्यस्त रहते हैं, जिसके कारण राजकीय मेडिकल कॉलेज की व्यवस्था चरमराई हुई है। मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (सीएमएस) डॉ. आरके मिश्रा ने दावा किया कि उन्हें इस स्थिति की जानकारी नहीं थी। हालांकि, उन्होंने आश्वासन दिया कि डॉक्टरों और स्टाफ की लापरवाही की जांच की जाएगी और दोषियों के खिलाफ उचित कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
मरीजों की मांग: व्यवस्था में सुधार
मरीजों और उनके परिजनों ने मेडिकल कॉलेज में तत्काल सुधार की मांग की है। उनकी मांग है कि अस्पताल में पर्याप्त संख्या में डॉक्टर और स्टाफ की तैनाती की जाए, ताकि मरीजों को समय पर उपचार मिल सके। इसके अलावा, बुनियादी सुविधाओं जैसे बिजली, वेंटिलेशन, स्वच्छता और पंखों की व्यवस्था को दुरुस्त किया जाए। मरीजों का कहना है कि एक सरकारी मेडिकल कॉलेज से उन्हें बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं की उम्मीद थी, लेकिन वर्तमान स्थिति निराशाजनक है।
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