बृह्नमुंबई महानगरपालिका चुनाव 2026 में महायुति की निर्णायक जीत ने महाराष्ट्र की राजनीति को नया मोड़ दिया है। 

बृह्नमुंबई महानगरपालिका चुनाव 2026 के नतीजों ने महाराष्ट्र की राजनीतिक तस्वीर को पूरी तरह बदल दिया है। 15 जनवरी 2026 को हुए मतदान के बाद 16 जनवरी

Jan 17, 2026 - 18:35
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बृह्नमुंबई महानगरपालिका चुनाव 2026 में महायुति की निर्णायक जीत ने महाराष्ट्र की राजनीति को नया मोड़ दिया है। 
बृह्नमुंबई महानगरपालिका चुनाव 2026 में महायुति की निर्णायक जीत ने महाराष्ट्र की राजनीति को नया मोड़ दिया है। 
  • महाराष्ट्र नगर निगम चुनावों में बीजेपी-शिवसेना गठबंधन ने विपक्ष को दिया करारा झटका, मुंबई की सत्ता पर कब्जा जमाया
  • अखिलेश यादव की प्रतिक्रिया से राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज, चुनावी रणनीति पर उठे कई सवाल

बृह्नमुंबई महानगरपालिका चुनाव 2026 के नतीजों ने महाराष्ट्र की राजनीतिक तस्वीर को पूरी तरह बदल दिया है। 15 जनवरी 2026 को हुए मतदान के बाद 16 जनवरी को मतगणना में महायुति गठबंधन, जिसमें भारतीय जनता पार्टी और एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना शामिल हैं, ने स्पष्ट बहुमत हासिल कर लिया है। कुल 227 वार्डों में से भारतीय जनता पार्टी ने 89 सीटें जीतीं, जबकि शिवसेना ने 29 सीटें प्राप्त कीं, जिससे गठबंधन का कुल आंकड़ा 118 पहुंच गया, जो बहुमत के 114 के आंकड़े से ऊपर है। इस जीत ने लगभग 30 वर्षों से शिवसेना के कब्जे वाली मुंबई की सत्ता को बदल दिया है। चुनाव आयोग के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, मतदान प्रतिशत 52.94 रहा, जो पिछले चुनाव से 2.59 प्रतिशत अधिक है। महायुति ने न केवल मुंबई में बल्कि पूरे महाराष्ट्र में नगर निगम चुनावों में मजबूत प्रदर्शन किया, जिसमें पुणे, नागपुर और नवी मुंबई जैसे प्रमुख शहर शामिल हैं। भारतीय जनता पार्टी ने कुल 1400 सीटें जीतीं, जबकि शिवसेना ने 397 सीटें हासिल कीं। विपक्षी महा विकास अघाड़ी को करारा झटका लगा, जहां उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) ने 65 सीटें, कांग्रेस ने 24 सीटें, महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना ने 6 सीटें और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) ने 3 सीटें जीतीं।

चुनाव परिणामों की घोषणा देर रात तक चली, और महायुति ने पुणे नगर निगम में 52 सीटें, नागपुर में 85 सीटें और नवी मुंबई में 42 सीटें जीतकर अपनी स्थिति मजबूत की। इस चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने 135 वार्डों में उम्मीदवार उतारे थे, जबकि उद्धव ठाकरे की पार्टी ने 160 वार्डों में प्रतिस्पर्धा की। मतगणना के दौरान शुरुआती रुझानों में महायुति 110 से अधिक वार्डों में आगे चल रही थी, जो एग्जिट पोल्स के अनुमानों से मेल खाता है। एक्सिस माई इंडिया के एग्जिट पोल ने महायुति को 131-151 सीटें मिलने का अनुमान लगाया था, जबकि विपक्षी गठबंधन को 60 से अधिक सीटें। चुनाव आयोग ने कुल मतों में भारतीय जनता पार्टी को 11,79,273 वोट मिलने की पुष्टि की, जो कुल मतों का 21.58 प्रतिशत है। इस जीत ने महाराष्ट्र के शहरी राजनीतिक परिदृश्य में विकास-केंद्रित राजनीति की ओर रुझान को दर्शाया है। चुनाव में कुल 1,452,599 वोट महायुति को मिले, जो 50.22 प्रतिशत है। विपक्षी पार्टियों ने चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाए, लेकिन आयोग ने सभी आरोपों को खारिज कर दिया। इस चुनाव ने महाराष्ट्र में भारतीय जनता पार्टी की बढ़ती ताकत को रेखांकित किया, जहां वह एकल सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है।

चुनाव परिणामों ने उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) को बड़ा झटका दिया है, जो 2017 में 84 सीटें जीतने वाली पार्टी इस बार 65 सीटों पर सिमट गई। ठाकरे परिवार का मुंबई पर 25 वर्षों से अधिक का नियंत्रण समाप्त हो गया, हालांकि उद्धव ठाकरे की पार्टी ने मराठी वोट बैंक में अपनी पकड़ बनाए रखी और दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बनी। चुनाव में शिवसेना (यूबीटी) को 717,736 वोट मिले, जो कुल मतों का 27.52 प्रतिशत है। महा विकास अघाड़ी गठबंधन, जिसमें कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी शामिल हैं, कुल 92 सीटों पर सिमट गया। कांग्रेस ने 24 सीटें जीतीं, जो पिछले प्रदर्शन से कम है, लेकिन राज्य स्तर पर पार्टी ने 324 सीटें हासिल कीं। चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, शिवसेना (यूबीटी) ने 160 वार्डों में उम्मीदवार उतारे थे, जबकि कांग्रेस ने 31 वार्डों में। मतगणना के दौरान रुझानों में महायुति 117 वार्डों में आगे चल रही थी, जिसमें भारतीय जनता पार्टी 88 और शिवसेना 28 पर। अंतिम परिणामों में कुछ वार्डों में करीबी मुकाबला देखा गया, लेकिन महायुति ने बहुमत पार कर लिया। चुनाव में अन्य पार्टियों का प्रदर्शन भी उल्लेखनीय रहा, जहां महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना ने 6 सीटें जीतीं, जबकि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी को 160 सीटें मिलीं। राज्य भर में 27 नगर निगमों और 2,869 वार्डों में चुनाव हुए, जहां भारतीय जनता पार्टी ने प्रमुख शहरों में अपनी पकड़ मजबूत की। पुणे में 162 वार्डों में से 52, नागपुर में 151 में से 85 और नवी मुंबई में 67 में से 42 सीटें जीतीं। चुनाव परिणामों की घोषणा के बाद महायुति ने उत्सव मनाया, जबकि विपक्ष ने चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाए। चुनाव आयोग ने सभी प्रक्रियाओं को पारदर्शी बताया। इस चुनाव ने महाराष्ट्र की राजनीति में भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले गठबंधन की मजबूती को साबित किया, जो शहरी विकास पर केंद्रित रहा।

समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने बृह्नमुंबई महानगरपालिका चुनाव के परिणामों पर अपनी प्रतिक्रिया दी, जिसमें उन्होंने भारतीय जनता पार्टी की जीत का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी से सीखने को भी बहुत कुछ है। यह बयान चुनाव परिणामों के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया। अखिलेश यादव की यह टिप्पणी महाराष्ट्र के बाहर से आई, जहां उन्होंने चुनावी रणनीति और परिणामों पर ध्यान केंद्रित किया। चुनाव में समाजवादी पार्टी ने भी भाग लिया, लेकिन उनका प्रदर्शन सीमित रहा। अखिलेश यादव का बयान भारतीय जनता पार्टी की जीत के संदर्भ में आया, जो महाराष्ट्र नगर निगम चुनावों में व्यापक था। चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, भारतीय जनता पार्टी ने मुंबई में अपनी सीटें 2017 के 82 से बढ़ाकर 89 कर लीं। अखिलेश यादव की प्रतिक्रिया ने विपक्षी दलों के बीच चुनावी विश्लेषण को बढ़ावा दिया। चुनाव में कुल मतदान 52.94 प्रतिशत रहा, और महायुति ने 50.22 प्रतिशत वोट हासिल किए। अखिलेश यादव का बयान चुनाव के बाद के राजनीतिक संवाद का हिस्सा बना, जहां विभिन्न दलों ने परिणामों पर अपनी राय रखी। चुनाव परिणामों ने महाराष्ट्र में भारतीय जनता पार्टी की स्थिति को मजबूत किया, जबकि विपक्ष को अपनी रणनीति पर विचार करने को मजबूर किया।

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने चुनाव परिणामों पर कहा कि भारतीय जनता पार्टी ने इतिहास रचा है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व को श्रेय दिया। फडणवीस ने कहा कि यह जीत विकास और सुशासन की जीत है। चुनाव में महायुति ने मुंबई के अलावा पुणे और अन्य शहरों में भी जीत दर्ज की। फडणवीस ने विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि जनता ने अपना फैसला सुना दिया है। चुनाव आयोग ने परिणामों की पुष्टि की, जिसमें भारतीय जनता पार्टी की सीटें प्रमुख रहीं। एकनाथ शिंदे ने कहा कि यह जीत महाराष्ट्र की जनता की है। उन्होंने उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे की पार्टियों के प्रदर्शन पर टिप्पणी की, लेकिन चुनावी प्रक्रिया पर जोर दिया। चुनाव में कुल 224 वार्डों में महायुति ने उम्मीदवार उतारे थे। परिणामों ने महाराष्ट्र की राजनीति में नए समीकरण बनाए।

उद्धव ठाकरे ने चुनाव परिणामों पर कहा कि उनकी पार्टी ने मराठी वोट बैंक को बनाए रखा है। उन्होंने 64 सीटें जीतने का जिक्र किया, जो भारतीय जनता पार्टी के बाद सबसे अधिक है। ठाकरे ने चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाए, लेकिन जनता के फैसले को स्वीकार किया। चुनाव में उनकी पार्टी ने 160 वार्डों में उम्मीदवार उतारे थे। राज ठाकरे ने अपनी पार्टी के प्रदर्शन पर प्रतिक्रिया दी, जहां महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना 6 सीटों पर सिमटी। चुनाव परिणामों ने ठाकरे भाइयों की राजनीतिक स्थिति को प्रभावित किया। कांग्रेस ने राज्य स्तर पर 324 सीटें जीतीं, लेकिन मुंबई में 24 पर। राहुल गांधी ने चुनाव में अमिट स्याही के मुद्दे पर चुनाव आयोग की आलोचना की। चुनाव ने विपक्ष को एकजुट होने की आवश्यकता दिखाई। चुनाव परिणामों ने महाराष्ट्र में शहरी राजनीति को नई दिशा दी, जहां भारतीय जनता पार्टी ने प्रमुख शहरों में नियंत्रण हासिल किया। चुनाव में कुल 2,869 वार्डों में परिणाम घोषित हुए। महायुति ने विकास मुद्दों पर फोकस किया। विपक्ष ने एकता की कमी पर विचार किया। चुनाव आयोग ने प्रक्रिया को निष्पक्ष बताया। परिणामों ने 2026 के आगे की राजनीति पर असर डाला।

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