Varanasi : काशी तमिल संगमम के चौथे संस्करण का भव्य शुभारंभ, योगी और धर्मेंद्र प्रधान ने किया उद्घाटन, सीएम ने वड़क्कम काशी, हर हर महादेव, नमः पार्वती पतये हर हर महादेव से सम्बोधन की शुरुआत की
योगी आदित्यनाथ ने अपने भाषण की शुरुआत तमिल में स्वागत कहते हुए की और फिर हर-हर महादेव तथा नमः पार्वती पतये के जयकारे लगाए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में यह आयोजन एक
वाराणसी। नमो घाट पर काशी तमिल संगमम का चौथा संस्करण शुरू हो गया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसका उद्घाटन किया। इस मौके पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान भी मौजूद रहे। दोनों नेताओं ने काशी विश्वनाथ मंदिर और काल भैरव मंदिर में दर्शन-पूजन भी किया।
योगी आदित्यनाथ ने अपने भाषण की शुरुआत तमिल में स्वागत कहते हुए की और फिर हर-हर महादेव तथा नमः पार्वती पतये के जयकारे लगाए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में यह आयोजन एक भारत-श्रेष्ठ भारत की भावना को मजबूत कर रहा है। काशी और तमिलनाडु का रिश्ता सदियों पुराना है और इसका केंद्र बिंदु भगवान शिव हैं।
इस बार संगमम की थीम आओ तमिल सीखें रखी गई है। योगी ने बताया कि उत्तर प्रदेश में व्यावसायिक शिक्षा के पाठ्यक्रम में अब तमिल के साथ कन्नड़, मलयालम, तेलुगु, मराठी और बंगाली भाषाएं भी पढ़ाई जा रही हैं। इन भाषाओं को सीखने का पूरा खर्च सरकार उठाएगी।
तमिलनाडु से आने वाले श्रद्धालुओं का स्वागत करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश के लोग रामेश्वरम, मदुरई और कन्याकुमारी के दर्शन बहुत आदर के साथ करते हैं। अब राज्य सरकार विशेष तीर्थ यात्रा पैकेज शुरू करने जा रही है, जिसमें इन पवित्र स्थानों की यात्रा सस्ते दामों पर कराई जाएगी।
उन्होंने बताया कि प्रयागराज के त्रिवेणी संगम का जल हर महीने रामेश्वरम पहुंचता है और वहां से लौटकर काशी विश्वनाथ का अभिषेक करता है। यह परंपरा अब नियमित रूप से चल रही है। अयोध्या में राम मंदिर परिसर में महर्षि अगस्त्य का मंदिर बन चुका है और उनकी प्रतिमा स्थापित हो चुकी है। दक्षिण भारत के तीन बड़े संत त्यागराज, पुरंदर दास और अरुणाचल कवि की प्रतिमाएं भी अयोध्या में लगाई गई हैं।
पिछले चार साल में काशी विश्वनाथ धाम बनने के बाद 26 करोड़ से ज्यादा श्रद्धालु काशी आ चुके हैं। इनमें दूसरे नंबर पर दक्षिण भारत के यात्री हैं। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि काशी तमिल संगमम अब एक जन आंदोलन बन चुका है। यह उत्तर और दक्षिण के बीच ज्ञान और संस्कृति का सेतु बना रहा है। भारत बहुभाषी देश है और हमें एक-दूसरे की भाषा व संस्कृति का सम्मान करना चाहिए। तमिल व्याकरण का 13 भारतीय भाषाओं में अनुवाद हो चुका है, यह अपने आप में बड़ा काम है।
कार्यक्रम में तमिलनाडु के राज्यपाल आरएन रवि, पुडुचेरी के उपराज्यपाल कैलाशनाथन, केंद्रीय मंत्री एल मुरुगन, उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक समेत कई नेता मौजूद रहे।
इससे पहले योगी और धर्मेंद्र प्रधान ने केंद्रीय संचार ब्यूरो की प्रदर्शनी भी देखी, जिसमें काशी और तमिलनाडु के महापुरुषों के जीवन और केंद्र सरकार की योजनाओं की जानकारी दी गई थी।
काशी तमिल संगमम में तमिलनाडु से बड़ी संख्या में कलाकार, विद्वान, छात्र और श्रद्धालु पहुंचे हैं। पूरे महीने भर सांस्कृतिक कार्यक्रम, सेमिनार, प्रदर्शनियां और तमिल भाषा सीखने के विशेष सत्र चलते रहेंगे। यह आयोजन काशी को एक बार फिर देश की सांस्कृतिक राजधानी के रूप में स्थापित कर रहा है।
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