गैस सिलेंडर से गैस के बजाय निकल रहा है पानी: सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद उपभोक्ताओं में मचा हड़कंप।
डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर इन दिनों एक ऐसा वीडियो तेजी से प्रसारित हो रहा है जिसमें एक उपभोक्ता अपने घर आए नए गैस सिलेंडर को उल्टा
- रसोई गैस में मिलावट का नया तरीका आया सामने: सिलेंडर में पानी भरकर तौल बढ़ाने का खेल, ऐसे पहचानें असली और नकली का फर्क।
- सावधान! कहीं आपके गैस सिलेंडर में भी तो नहीं भरा है पानी? वायरल वीडियो ने खोली वितरण प्रणाली की पोल, जांच के आदेश।
डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर इन दिनों एक ऐसा वीडियो तेजी से प्रसारित हो रहा है जिसमें एक उपभोक्ता अपने घर आए नए गैस सिलेंडर को उल्टा करके उससे भारी मात्रा में पानी निकालते हुए दिखाई दे रहा है। वीडियो में स्पष्ट है कि रेगुलेटर लगाने के स्थान से गैस की जगह तरल रूप में पानी बह रहा है। इस घटना ने उन लाखों परिवारों को सचेत कर दिया है जो पूरी तरह से एलपीजी सिलेंडरों पर निर्भर हैं। सामान्यतः एक घरेलू सिलेंडर का वजन 14.2 किलोग्राम गैस के साथ लगभग 29.5 से 30 किलोग्राम होता है। जालसाज इस वजन को बरकरार रखने के लिए उसमें से कुछ किलो गैस निकालकर उतनी ही मात्रा में पानी भर देते हैं, जिससे पहली नजर में कांटा (तौल मशीन) पर वजन बिल्कुल सही दिखाई देता है।
सिलेंडर में पानी भरने का यह गोरखधंधा बेहद शातिर तरीके से अंजाम दिया जाता है। चूंकि एलपीजी (लिक्विड पेट्रोलियम गैस) दबाव के साथ सिलेंडर के भीतर तरल अवस्था में होती है, इसलिए पानी मिलाने पर वह नीचे बैठ जाता है और शुरुआत में चूल्हा जलाने पर गैस ही बाहर आती है। लेकिन जैसे-जैसे गैस का स्तर कम होता है, बर्नर से पानी आने लगता है या फिर लौ नीली के बजाय पीली या लाल होने लगती है। कई मामलों में तो चूल्हा जलना ही बंद हो जाता है और रेगुलेटर के जरिए पानी चूल्हे की पाइप तक पहुंच जाता है। यह स्थिति न केवल खाना पकाने में बाधा डालती है बल्कि चूल्हे और पाइपलाइन को भी खराब कर सकती है, जिससे भविष्य में गैस रिसाव का खतरा बढ़ जाता है।
इस तरह की मिलावट का सबसे बड़ा कारण गैस एजेंसियों के कुछ भ्रष्ट कर्मचारियों और बिचौलियों की मिलीभगत माना जा रहा है। गैस बॉटलिंग प्लांट से निकलने के बाद और उपभोक्ता के घर पहुंचने के बीच के समय में सिलेंडर के साथ छेड़छाड़ की जाती है। जालसाज एक विशेष उपकरण का उपयोग करके सील को बिना नुकसान पहुंचाए खोल लेते हैं और गैस निकालकर उसमें पानी पंप कर देते हैं। इस प्रक्रिया के माध्यम से वे एक सिलेंडर से बचाई गई गैस को दूसरे खाली सिलेंडरों में भरकर ऊंचे दामों पर बेच देते हैं। यह पूरी प्रक्रिया रिहायशी इलाकों के पीछे या सुनसान गोदामों में चोरी-छिपे की जाती है, जहां सुरक्षा मानकों की पूरी तरह अनदेखी होती है। जब भी आपके घर पर डिलीवरी मैन सिलेंडर लेकर आए, तो केवल वजन चेक करना काफी नहीं है। सिलेंडर की सील को ध्यान से देखें कि कहीं वह ढीली या दोबारा चिपकाई हुई तो नहीं है। सबसे प्रभावी तरीका 'वाटर टेस्ट' है; डिलीवरी मैन से कहें कि वह वाल्व पर थोड़ा पानी डालकर चेक करे कि कहीं लीकेज तो नहीं है। यदि गैस के बजाय पानी के बुलबुले या सीधे पानी बाहर आए, तो तुरंत सिलेंडर वापस कर दें और रसीद पर अपनी शिकायत दर्ज करें।
सुरक्षा के दृष्टिकोण से देखा जाए तो सिलेंडर में पानी होना एक बड़े हादसे का सबब बन सकता है। एलपीजी सिलेंडर के भीतर की सतह को गैस के अनुकूल बनाया जाता है, लेकिन पानी की मौजूदगी से सिलेंडर के अंदरूनी हिस्से में जंग लगने की प्रक्रिया शुरू हो सकती है। लंबे समय तक पानी अंदर रहने से सिलेंडर की दीवारें कमजोर हो सकती हैं, जिससे अत्यधिक दबाव की स्थिति में सिलेंडर फटने की संभावना रहती है। इसके अलावा, यदि पानी रेगुलेटर के माध्यम से चूल्हे तक पहुंच जाए, तो यह आग की लौ को अनियंत्रित कर सकता है। पेट्रोलियम कंपनियों ने इस संबंध में सख्त निर्देश जारी किए हैं कि किसी भी संदिग्ध स्थिति में उपभोक्ता को तुरंत टोल-फ्री नंबर पर संपर्क करना चाहिए। गैस कंपनियों के अधिकारियों का इस विषय पर कहना है कि बॉटलिंग प्लांट में पूरी तरह से स्वचालित प्रणालियों का उपयोग किया जाता है, जहां मिलावट की संभावना शून्य के बराबर होती है। इसलिए, यह स्पष्ट है कि पानी भरने का यह खेल वितरण के स्तर पर ही होता है। प्रशासन अब उन इलाकों में औचक निरीक्षण कर रहा है जहां से इस तरह की शिकायतें अधिक मिल रही हैं। कई शहरों में पुलिस ने ऐसे गिरोहों को पकड़ा भी है जो सिलेंडरों से गैस चोरी कर उसमें पानी भरते थे। पकड़े गए लोगों के खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम और धोखाधड़ी की धाराओं के तहत कठोर कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
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