यूपीएससी की जांच में पूजा खेडकर को लेकर चौंकाने वाले खुलासे..

Jul 20, 2024 - 00:54
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यूपीएससी की जांच में पूजा खेडकर को लेकर चौंकाने वाले खुलासे..

पूजा को 'कारण बताओ' नोटिस जारी, मामले में हो सकती है सख्त कार्रवाई

पुणे।
संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) ने सिविल सेवा परीक्षा-2022 की कैंडिडेट पूजा मनोरमा दिलीप खेडकर, के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया है। यूपीएससी ने अपनी जांच में पाया है कि खेडकर ने अपना नाम, अपने माता-पिता का नाम, अपनी तस्वीर, हस्ताक्षर, ईमेल आईडी, मोबाइल नंबर और पता बदलकर फर्जी पहचान बनाई थी। इसके जरिए उन्होंने परीक्षा नियमों के तहत तय सीमा से ज्यादा बार परीक्षा दी। यूपीएससी ने उनके खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज कराया है। सिविल सेवा परीक्षा-2022 की उनकी उम्मीदवारी रद्द करने और भविष्य की परीक्षाओं/चयनों से प्रतिबंधित करने के लिए कारण बताओ नोटिस जारी किया है। आईएएस अधिकारी पूजा खेडकर मामले में संघ लोक सेवा आयोग ने अपनी जांच पूरी कर ली है। इस जांच में जो नतीजे आए हैं वो चौंकाने वाले हैं। जांच में पाया गया है कि पूजा ने कई सारे घपले किए हैं। उन्होंने अपने अटेंप्ट से ज्यादा बार ये परीक्षा दी। इसके लिए उन्होंने अपना, अपने पिता और मां का नाम तक बदला। यही नहीं, उन्होंने कई फर्जीवाड़े किए हैं। उन्होंने अपनी तस्वीर, सिग्नेचर, ई-मेल आईडी और मोबाइल नंबर तक फर्जी दिए थे। यूपीएससी ने पूजा के इस फर्जीवाड़े पर अब सख्त कार्रवाई के मूड में आ गई है।

यूपीएससी ने कहा कि उसे देश की जनता, खासकर अपने कैंडिडेट्स का भरोसा और विश्वसनीयता हासिल है। आयोग ने कहा है कि यूपीएससी ने लोगों, खासकर उम्मीदवारों का बहुत हाई लेवल की विश्वसनीयता अर्जित की है। आयोग यह सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है कि इस तरह का विश्वास और विश्वसनीयता बरकरार रहे और इसमें किसी भी तरह से समझौता न हो। पूजा खेडकर का नाम हाल ही में अचानक सुर्खियों में आ गया। उन्होंने UPSC परीक्षा में 821वीं रैंक हासिल की थी और प्रोबेशन पीरियड में थी। पूजा उस समय विवादों में घिर गईं जब उन्होंने अपनी निजी ऑडी कार का इस्तेमाल लाल-नीली बत्ती और वीआईपी नंबर प्लेट के साथ किया। उन पर सिविल सेवा परीक्षा पास करने के लिए फर्जी दिव्यांग सर्टिफिकेट और अन्य पिछड़ा वर्ग प्रमाण पत्र जमा करने समेत फर्जीवाड़े के कई आरोप भी लगे थे। इन विवादों के बीच, महाराष्ट्र सरकार ने पिछले हफ्ते खेडकर का ट्रांसफर पुणे से वाशिम कर दिया था। इसी बीच, केंद्र सरकार ने सिविल सेवा में उम्मीदवारी हासिल करने के लिए पूजा खेडकर की ओर से जमा किए गए सभी दस्तावेजों की जांच के लिए एक समिति भी बनाई। अब यूपीएससी ने जांच के बाद पूजा मामले में और भी कई अनियमितता पाई। जिसके बाद एफआईआर दर्ज कराया गया और कारण बताओ नोटिस भी दिया गया है।

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यूपीएससी की जांच में सामने आया है कि पूजा ने जालसाजी कर अपने डॉक्यूमेंट बदले और नियमों के मुताबिक तय अटेम्प्ट से ज्यादा बार यूपीएससी की परीक्षा दी. इसके लिए पूजा खेडकर ने अपना नाम, माता-पिता का नाम, सिग्नेचर, ईमेल आईडी, फोटोग्राफ, मोबाइल नंबर, पिता का नाम और घर का पता बदला था। आरोप है कि पूजा खेडकर ने विकलांगता प्रमाण पत्र ही नहीं, माता-पिता का नाम और पता भी फर्जी दिया था. यूपीएससी की जांच में ये बात सामने आई कि पूजा खेडकर ने न सिर्फ माता-पिता का नाम बल्कि मोबाइल नंबर, घर का पता, ईमेल आईडी तक की गलत जानकारी दी। 

यूपीएससी ने बताया कि पूजा मनोरमा दिलीप खेडकर के गलत आचरण की विस्तृत और गहन जांच की गई है. इस जांच से ये पता चला है कि उसने अपना नाम, अपने पिता और माता का नाम, अपनी फोटो/हस्ताक्षर, अपनी ई-मेल आईडी, मोबाइल नंबर और पता बदलकर फर्जी पहचान बनाकर परीक्षा नियमों से धोखाधड़ी करके अनुचित लाभ उठाया। धोखाधड़ी सामने आने के बाद यूपीएससी ने उसके खिलाफ कार्रवाई की एक श्रृंखला शुरू की है, जिसमें पुलिस अधिकारियों के साथ एफआईआर दर्ज करके आपराधिक अभियोजन शामिल है और सिविल सेवा की उसकी उम्मीदवारी को रद्द करने के लिए कारण बताओ नोटिस (एससीएन) जारी किया है।

दरअसल संघ लोक सेवा आयोग की तरफ से बर्खास्त करने की प्रक्रिया के तौर पर पहले कारण बताओ नोटिस जारी किया जाता है। यही नहीं, नियमों के अनुसार भविष्य की परीक्षाओं/चयनों से वंचित किया जाना भी शामिल है। संघ लोक सेवा आयोग ने कहा कि अपने संवैधानिक दायित्वों को पूरा करने में, यूपीएससी अपने संवैधानिक जनादेश का सख्ती से पालन करता है और बिना किसी समझौते के उचित परिश्रम के उच्चतम क्रम के साथ सभी परीक्षाओं सहित अपनी सभी प्रक्रियाओं का संचालन करता है। यूपीएससी ने अत्यंत निष्पक्षता और नियमों के सख्त पालन के साथ अपनी सभी परीक्षा प्रक्रियाओं की पवित्रता और अखंडता सुनिश्चित की है. आयोग ने बयान में कहा है कि जांच से पता चला है कि खेडकर ने अपना नाम, अपने पिता और माता का नाम, अपनी तस्वीर/हस्ताक्षर, अपनी ईमेल आईडी, मोबाइल नंबर और पता बदलकर अपनी पहचान बदलकर परीक्षा नियमों के तहत स्वीकार्य सीमा से अधिक प्रयास किए।

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