गरीबी का तंज चलेगा सरकार को महंगा- SIR के 'वोट चोरी' जाल पर चंद्रशेखर आजाद का तीखा प्रहार, बोले 'अविश्वास की आग में जलेंगे सत्ता-सिंधु', दलित-गरीबों का दर्द संसद तक गूंजेगा। 

आजाद समाज पार्टी (कांशी राम) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और नागिना से सांसद चंद्रशेखर आजाद ने केंद्र सरकार पर विशेष गहन पुनरीक्षण

Dec 1, 2025 - 15:24
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गरीबी का तंज चलेगा सरकार को महंगा- SIR के 'वोट चोरी' जाल पर चंद्रशेखर आजाद का तीखा प्रहार, बोले 'अविश्वास की आग में जलेंगे सत्ता-सिंधु', दलित-गरीबों का दर्द संसद तक गूंजेगा। 
गरीबी का तंज चलेगा सरकार को महंगा- SIR के 'वोट चोरी' जाल पर चंद्रशेखर आजाद का तीखा प्रहार, बोले 'अविश्वास की आग में जलेंगे सत्ता-सिंधु', दलित-गरीबों का दर्द संसद तक गूंजेगा। 

आजाद समाज पार्टी (कांशी राम) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और नागिना से सांसद चंद्रशेखर आजाद ने केंद्र सरकार पर विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को लेकर तीखा हमला बोला है। उन्होंने इसे गरीबी और वंचना का मजाक उड़ाने वाला बताया, जो सरकार को भारी पड़ेगा। "लोगों की गरीबी का मजाक उड़ाना सरकार को भारी पड़ेगा," आजाद ने कहा, जबकि SIR के नाम पर वोट चोरी और BLOs (बूथ लेवल ऑफिसर) पर दबाव को लोकतंत्र पर सीधा प्रहार करार दिया। यह बयान मोरादाबाद में एक शिक्षक की कथित आत्महत्या के बाद आया, जिसे SIR के दबाव से जोड़ा जा रहा है। आजाद ने चुनाव आयोग से SIR सीमा बढ़ाने की मांग की, साथ ही अवैध मतदाताओं के नाम हटाने के लिए ठोस प्रमाण की शर्त रखी। यह हमला न केवल विपक्ष की एकजुटता का संकेत है, बल्कि दलित-बहुजन समाज के गुस्से को भी उजागर करता है, जो संसद के शीतकालीन सत्र में SIR पर बहस की मांग कर रहा है।

चंद्रशेखर आजाद का यह बयान मोरादाबाद जिले के एक शिक्षक की आत्महत्या से जुड़ा है, जहां SIR प्रक्रिया के तहत BLOs पर अत्यधिक दबाव पड़ा। शिक्षक, जो BLO की भूमिका निभा रहे थे, ने कथित रूप से खुदकुशी कर ली, जिससे इलाके में सनसनी फैल गई। आजाद ने इस घटना पर गहरी चिंता जताई और कहा कि SIR जैसी प्रक्रियाएं न केवल मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर रही हैं, बल्कि चुनावी प्रक्रिया में अविश्वास पैदा कर रही हैं। "इस प्रक्रिया से हो रही हानि और विकसित हो रहा अविश्वास भी समस्या है... हमारी कोशिश SIR सीमा बढ़ाने की है... SIR के नाम पर वोट चोरी करना भी ठीक नहीं... यदि कोई अवैध रूप से रह रहा है, तो उसके लिए ठोस प्रमाण होना चाहिए," आजाद ने स्पष्ट शब्दों में कहा। उन्होंने चुनाव आयोग को पत्र लिखकर कई मांगें रखीं, जिनमें SIR की समयसीमा विस्तार और BLOs पर दबाव कम करने की प्रमुख हैं। यह बयान दिल्ली में पत्रकारों से बातचीत के दौरान आया, जहां आजाद ने SIR को 'वोट चोरी का हथियार' करार दिया।

SIR प्रक्रिया क्या है, और यह क्यों विवादों में है? विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision) चुनाव आयोग की एक पहल है, जो 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में चल रही है। इसका उद्देश्य मतदाता सूची को शुद्ध करना है, जिसमें BLOs घर-घर जाकर सत्यापन करते हैं। लेकिन विपक्ष का आरोप है कि यह प्रक्रिया गरीब, दलित और अल्पसंख्यक वोटरों को निशाना बना रही है। पिछले एक महीने में ही 20 से अधिक BLOs की मौतें दर्ज की गईं, जिनमें आत्महत्याएं शामिल हैं। मोरादाबाद की घटना इसका ताजा उदाहरण है, जहां शिक्षक पर लक्ष्य पूरा न करने का दबाव इतना बढ़ गया कि उन्होंने यह कदम उठा लिया। आजाद ने इसे 'अमानवीय कार्य दबाव' बताया, जो चुनाव आयोग और सत्ताधारी दल की साजिश का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि SIR के नाम पर वोटरों को हटाना लोकतंत्र की जड़ें काटने जैसा है, और गरीबी में जी रहे लोगों का मजाक उड़ाना सरकार की हताशा दिखाता है।

आजाद समाज पार्टी का यह रुख नया नहीं है। चंद्रशेखर आजाद, जो भिम आर्मी के संस्थापक भी हैं, ने हमेशा दलित-बहुजन मुद्दों को उठाया है। 2024 लोकसभा चुनाव में नागिना सीट से जीतकर वे संसद पहुंचे, जहां उन्होंने गरीबी, बेरोजगारी और जातिगत भेदभाव पर आवाज बुलंद की। उनकी पार्टी, जो 2020 में कांशी राम की जयंती पर बनी, ने शुरुआत में कई उपचुनावों में अच्छा प्रदर्शन किया, लेकिन 2024 में नागिना की जीत ने उन्हें राष्ट्रीय पटल पर ला दिया। आजाद ने कहा कि SIR जैसी नीतियां गरीबों को वोट से वंचित कर रही हैं, जो भाजपा की सत्ता बचाने की कोशिश है। "संबल, ज्ञानवापी, अजमेर ये सब मुख्य मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए हैं। महंगाई, बेरोजगारी, किसान इन पर चर्चा क्यों नहीं?" उन्होंने केंद्र पर निशाना साधा। यह बयान शीतकालीन सत्र की शुरुआत से ठीक पहले आया, जब लोकसभा में स्थगन प्रस्ताव लाने की चर्चा है।

विपक्ष का समर्थन आजाद के बयान को मजबूत बना रहा है। कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने भी SIR पर हमला बोला है, इसे 'वोटबैंक इंजीनियरिंग' बताया। लोकसभा में कांग्रेस सांसदों ने स्थगन प्रस्ताव दिया, जबकि राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष ने इसे लोकतंत्र के लिए खतरा कहा। आजाद ने इन दलों से एकजुटता की अपील की, कहा कि दलित-गरीबों का मुद्दा अब जातिगत सीमाओं से परे है। उनकी मांग है कि SIR को तुरंत रोका जाए, और BLOs की मौतों की स्वतंत्र जांच हो। चुनाव आयोग ने SIR को आवश्यक बताया, लेकिन विपक्ष के दबाव में समीक्षा का संकेत दिया है। आजाद ने चेतावनी दी कि यदि सुधार न हुए, तो सड़क पर आंदोलन होगा, जो भिम आर्मी की ताकत दिखाएगा।

चंद्रशेखर आजाद का राजनीतिक सफर संघर्षों से भरा है। सहारनपुर के छुटमलपुर गांव में जन्मे आजाद ने बचपन में ही जातिगत भेदभाव का सामना किया। उनके पिता एक रिटायर्ड प्रिंसिपल थे, लेकिन परिवार की गरीबी ने उन्हें सामाजिक न्याय की ओर मोड़ा। 2014 में भिम आर्मी की स्थापना से वे दलित युवाओं के प्रतीक बने। 2015 में सहारनपुर दंगों के बाद गिरफ्तारी हुई, लेकिन इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जमानत दी। 2020 में आजाद समाज पार्टी बनाई, जो बहुजन समाज पार्टी से अलगाव के बाद उभरी। पार्टी ने राजस्थान विधानसभा चुनाव में गठबंधन किया, लेकिन उत्तर प्रदेश में स्वतंत्र लड़ाई लड़ी। नागिना की जीत में दलित-मुस्लिम गठजोड़ की भूमिका रही, जहां उन्होंने भाजपा प्रत्याशी को 1.51 लाख वोटों से हराया। संसद में शपथ लेते हुए आजाद ने कहा कि वे गरीब, दलित, आदिवासी, मुस्लिम, युवा और महिलाओं के मुद्दे उठाएंगे।

SIR विवाद का असर व्यापक है। 12 राज्यों में चल रही यह प्रक्रिया बूथ स्तर पर सत्यापन पर जोर देती है, लेकिन BLOs जिनमें ज्यादातर शिक्षक हैं पर लक्ष्य पूरा न करने की सजा का डर है। मोरादाबाद के अलावा बिहार, झारखंड और अन्य जगहों पर समान शिकायतें हैं। विपक्ष का कहना है कि यह प्रक्रिया गरीब इलाकों को निशाना बना रही, जहां दस्तावेजों की कमी आम है। आजाद ने इसे 'गरीबी का मजाक' कहा, क्योंकि सत्यापन के नाम पर वोटरों को हटाना आर्थिक कमजोरी का फायदा उठाना है। उन्होंने सरकार से अपील की कि बजाय वोट चोरी के, गरीबी उन्मूलन पर ध्यान दें। यह बयान दलित राजनीति में नई ऊर्जा का संकेत है, जहां आजाद मायावती की जगह लेने की कोशिश कर रहे हैं।

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