दिल्ली के बवाना इंडस्ट्रियल एरिया में प्लास्टिक फैक्ट्री धधकने से मचा कोहराम, आसमान में छाया काला धुआं, एक झुलसा

आग जिस फैक्ट्री में लगी, वहां बड़ी मात्रा में प्लास्टिक दाना, रबर और केमिकल रखे होने की बात सामने आ रही है। यही कारण है कि आग ने इतनी जल्दी विकराल रूप धारण कर लिया और काले धुएं का गुबार कई किलोमीटर दूर से देखा जाने ल

Mar 24, 2026 - 11:28
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दिल्ली के बवाना इंडस्ट्रियल एरिया में प्लास्टिक फैक्ट्री धधकने से मचा कोहराम, आसमान में छाया काला धुआं, एक झुलसा
दिल्ली के बवाना इंडस्ट्रियल एरिया में प्लास्टिक फैक्ट्री धधकने से मचा कोहराम, आसमान में छाया काला धुआं, एक झुलसा

देर रात लगी भीषण आग की चपेट में आने से एक दमकलकर्मी गंभीर रूप से झुलसा, 17 गाड़ियों ने संभाला मोर्चा

बवाना सेक्टर 2 में अग्निकांड से करोड़ों के नुकसान की आशंका, रेस्क्यू ऑपरेशन के बीच दमकल विभाग ने तेज की फंसे हुए लोगों की तलाश

देश की राजधानी दिल्ली के उत्तरी हिस्से में स्थित बवाना इंडस्ट्रियल एरिया एक बार फिर भीषण अग्निकांड का गवाह बना है। सेक्टर 2 की एक फैक्ट्री में देर रात अचानक आग की लपटें उठने से पूरे इलाके में दहशत फैल गई। शुरुआती जानकारी के अनुसार, आग इतनी भयानक थी कि देखते ही देखते इसने पूरी इमारत को अपनी चपेट में ले लिया। औद्योगिक क्षेत्र होने के कारण आसपास की फैक्ट्रियों में भी डर का माहौल बन गया और आनन-फानन में स्थानीय लोगों और सुरक्षा गार्डों ने पुलिस व दमकल विभाग को इस तबाही की सूचना दी। चूंकि रात का समय था, इसलिए शुरुआती कुछ मिनटों में आग की भयावहता का अंदाजा लगाना मुश्किल था, लेकिन लपटों की ऊंचाई और धुएं के गुबार ने स्थिति की गंभीरता को स्पष्ट कर दिया।

दमकल विभाग के नियंत्रण कक्ष को इस घटना की पहली आधिकारिक सूचना तड़के करीब 3 बजकर 55 मिनट पर प्राप्त हुई। सूचना मिलते ही विभाग ने स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए तुरंत 17 दमकल की गाड़ियों को घटनास्थल के लिए रवाना कर दिया। जब दमकल की टीमें मौके पर पहुंचीं, तो फैक्ट्री के भीतर से उठ रही लपटें आसपास की इमारतों की ओर बढ़ रही थीं। संकरी गलियों और औद्योगिक कचरे के कारण दमकल कर्मियों को अपनी गाड़ियां फैक्ट्री के करीब ले जाने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। पानी की बौछारों के साथ आग पर काबू पाने की प्रक्रिया शुरू की गई, लेकिन फैक्ट्री के अंदर मौजूद ज्वलनशील पदार्थों ने आग को बुझाने के प्रयासों को और चुनौतीपूर्ण बना दिया।

आग पर काबू पाने के इस साहसिक अभियान के दौरान एक बड़ा हादसा भी सामने आया, जिसमें दमकल विभाग का एक कर्मचारी ड्यूटी के दौरान गंभीर रूप से झुलस गया। आग की भीषण गर्मी और अचानक हुए बैकड्राफ्ट के कारण दमकलकर्मी लपटों की चपेट में आ गया। घायल कर्मचारी को तुरंत साथी सहयोगियों की मदद से सुरक्षित बाहर निकाला गया और नजदीकी अस्पताल में प्राथमिक उपचार के बाद बेहतर इलाज के लिए रेफर किया गया। दमकल विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने इस घटना की पुष्टि करते हुए कहा कि जान जोखिम में डालकर उनके कर्मी आग को फैलने से रोकने की कोशिश कर रहे हैं। वर्तमान में घायल दमकलकर्मी की स्थिति स्थिर बताई जा रही है, लेकिन यह घटना राहत कार्य की चुनौतियों को दर्शाती है। बवाना इंडस्ट्रियल एरिया में पहले भी कई बार आग लगने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। इन घटनाओं के पीछे अक्सर खराब वायरिंग, अग्निशमन उपकरणों की कमी और नियमों की अनदेखी को जिम्मेदार ठहराया जाता है। प्रशासन अब इस बात की जांच कर रहा है कि क्या इस विशेष फैक्ट्री के पास जरूरी अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) था या नहीं।

राहत और बचाव कार्य में जुटी टीमें अब इस बात पर सबसे अधिक ध्यान दे रही हैं कि फैक्ट्री के भीतर कोई कर्मचारी फंसा तो नहीं है। हालांकि आग लगने का समय देर रात और तड़के का था, जब अधिकांश श्रमिक शिफ्ट खत्म कर घर लौट जाते हैं या सो रहे होते हैं, फिर भी सुरक्षा के मद्देनजर चप्पा-चप्पा छाना जा रहा है। दमकल विभाग के अधिकारी कूलिंग प्रक्रिया के साथ-साथ सर्च ऑपरेशन भी चला रहे हैं। फैक्ट्री के मालिक और वहां काम करने वाले ठेकेदारों से कर्मचारियों की उपस्थिति की जानकारी मांगी गई है। धुएं के कारण इमारत के भीतर प्रवेश करना अभी भी काफी कठिन है, इसलिए मशीनों और ऑक्सीजन मास्क के सहारे टीम अंदर दाखिल होने का प्रयास कर रही है।

आग जिस फैक्ट्री में लगी, वहां बड़ी मात्रा में प्लास्टिक दाना, रबर और केमिकल रखे होने की बात सामने आ रही है। यही कारण है कि आग ने इतनी जल्दी विकराल रूप धारण कर लिया और काले धुएं का गुबार कई किलोमीटर दूर से देखा जाने लगा। प्लास्टिक और केमिकल के जलने से निकलने वाली जहरीली गैसों ने आसपास के रिहायशी इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए भी सांस लेना दूभर कर दिया है। पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के अग्निकांड औद्योगिक क्षेत्रों के आसपास की हवा की गुणवत्ता को गंभीर रूप से प्रभावित करते हैं। दमकल विभाग की 17 गाड़ियां लगातार पानी की रिफिलिंग कर आग को शांत करने में जुटी हैं ताकि इसे तीसरी या चौथी मंजिल तक पहुंचने से पहले पूरी तरह बुझाया जा सके।

प्रशासनिक स्तर पर इस मामले की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए जाने की संभावना है। आग लगने के सटीक कारणों का अभी तक पता नहीं चल पाया है, लेकिन प्रथम दृष्टया शॉर्ट सर्किट को ही मुख्य वजह माना जा रहा है। फैक्ट्री के बुनियादी ढांचे की भी जांच की जाएगी ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या बिल्डिंग निर्माण में सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था। पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और फैक्ट्री प्रबंधन से पूछताछ की तैयारी की जा रही है। इस अग्निकांड में करोड़ों रुपये की मशीनरी और तैयार माल जलकर खाक होने का अनुमान लगाया जा रहा है, जिससे औद्योगिक जगत में भारी वित्तीय नुकसान की चिंता जताई जा रही है।

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