सीएम योगी की तारीफ़ कर विधायक पूजा पाल ने रो-रोकर बताई आपबीती, अतीक अहमद ने ऐसे की थी पति की हत्या

पूजा पाल के पति राजू पाल, जो बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के विधायक थे, की 2005 में प्रयागराज में माफिया अतीक अहमद और उनके सहयोगियों द्वारा गोली मारकर हत्या कर दी ग

By INA News Desk
Aug 15, 2025 - 00:42
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सीएम योगी की तारीफ़ कर विधायक पूजा पाल ने रो-रोकर बताई आपबीती, अतीक अहमद ने ऐसे की थी पति की हत्या
सीएम योगी की तारीफ़ कर विधायक पूजा पाल ने रो-रोकर बताई आपबीती, अतीक अहमद ने ऐसे की थी पति की हत्या

समाजवादी पार्टी (सपा) ने चायल विधानसभा सीट की विधायक पूजा पाल को पार्टी विरोधी गतिविधियों और अनुशासनहीनता के आरोप में निष्कासित कर दिया। यह कार्रवाई तब हुई जब पूजा ने उत्तर प्रदेश विधानसभा में 'विजन डॉक्यूमेंट 2047' पर चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तारीफ की। उन्होंने योगी सरकार की अपराध के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति की सराहना करते हुए कहा कि इस नीति ने उनके पति राजू पाल की हत्या के मामले में न्याय दिलाया, जिसके लिए माफिया अतीक अहमद को जिम्मेदार ठहराया गया था। पूजा ने निष्कासन के बाद भी अपने बयान पर कायम रहते हुए कहा कि वे प्रयागराज की उन महिलाओं की आवाज हैं, जिन्होंने अतीक अहमद के आतंक के कारण अपने प्रियजनों को खोया।

  • पूजा पाल के बारे में

पूजा पाल के पति राजू पाल, जो बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के विधायक थे, की 2005 में प्रयागराज में माफिया अतीक अहमद और उनके सहयोगियों द्वारा गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। यह हत्या तब हुई जब राजू ने 2004 के उपचुनाव में अतीक अहमद के भाई खालिद अजीम को हराकर इलाहाबाद पश्चिम (अब प्रयागराज पश्चिम) विधानसभा सीट जीती थी। उस समय अतीक सपा के नेता और सांसद थे। राजू की हत्या ने पूजा के जीवन को पूरी तरह बदल दिया। नवविवाहिता पूजा उस समय अपने पति के साथ नई जिंदगी शुरू करने की तैयारी में थीं, लेकिन इस हत्या ने उन्हें अकेला छोड़ दिया। उन्होंने कहा, "मेरे पति की हत्या दिनदहाड़े हुई थी। मैं उस समय नई-नवेली दुल्हन थी, और मेरे घर में कोई नहीं था।"

  • राजू पाल हत्याकांड

25 जनवरी 2005 को प्रयागराज में राजू पाल की हत्या ने पूरे उत्तर प्रदेश में सनसनी मचा दी थी। माफिया अतीक अहमद और उनके सहयोगियों पर इस हत्या का आरोप लगा। इस घटना ने प्रयागराज में अपराध और राजनीति के गठजोड़ को उजागर किया। पूजा पाल ने इस हत्याकांड के बाद न्याय की लड़ाई शुरू की, जो उनकी राजनीतिक यात्रा का आधार बनी।

  • राजनीतिक यात्रा और संघर्ष

पूजा ने अपने दुख को ताकत में बदला और 2007 में बसपा के टिकट पर इलाहाबाद पश्चिम सीट से चुनाव जीता। 2012 में भी वे इस सीट से जीतीं, लेकिन 2018 में बसपा ने उन्हें भाजपा के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य से मुलाकात के बाद निष्कासित कर दिया। 2019 में पूजा सपा में शामिल हुईं और 2022 में चायल विधानसभा सीट से विधायक चुनी गईं। उनकी राजनीतिक यात्रा में कई उतार-चढ़ाव आए, लेकिन उन्होंने हमेशा अपने पति की हत्या के दोषियों को सजा दिलाने की मांग को प्राथमिकता दी।

  • बसपा से सपा तक का सफर

पूजा पाल ने 2007 और 2012 में बसपा के टिकट पर जीत हासिल की, लेकिन 2018 में पार्टी ने उन्हें निष्कासित कर दिया। 2019 में सपा में शामिल होने के बाद उन्होंने 2022 में चायल सीट जीती। उनकी राजनीतिक यात्रा उनकी व्यक्तिगत त्रासदी और न्याय की लड़ाई से गहराई से जुड़ी रही।

  • विधानसभा में बयान

14 अगस्त 2025 को विधानसभा में पूजा पाल ने कहा, "सभी जानते हैं कि मेरे पति की हत्या किसने की थी। मैं मुख्यमंत्री को धन्यवाद देना चाहती हूँ कि उन्होंने मुझे न्याय दिलाया। उनकी जीरो टॉलरेंस नीति ने अतीक अहमद जैसे अपराधियों को मिट्टी में मिला दिया।" उन्होंने यह भी कहा कि योगी सरकार ने न केवल उन्हें, बल्कि प्रयागराज की कई अन्य महिलाओं को भी न्याय दिलाया, जिन्होंने अपराधियों के कारण अपने परिवार खोए। इस बयान ने सपा नेतृत्व को नाराज कर दिया, क्योंकि यह उनकी पार्टी लाइन के खिलाफ था।

  • अतीक अहमद और प्रयागराज में अपराध

अतीक अहमद, जो कभी सपा के प्रमुख नेता थे, पर प्रयागराज में कई आपराधिक गतिविधियों का आरोप था। उनकी और उनके भाई अशरफ की 15 अप्रैल 2023 को पुलिस कस्टडी में हत्या ने उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था पर बहस छेड़ दी। पूजा पाल ने इस घटना को अपने पति के हत्यारों को सजा के रूप में देखा।

  • सपा से निष्कासन और पूजा का जवाब

सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने पूजा के बयान को पार्टी विरोधी माना और उन्हें तत्काल प्रभाव से निष्कासित कर दिया। निष्कासन पत्र में कहा गया कि पूजा ने चेतावनी के बावजूद अनुशासनहीनता की, जिससे पार्टी को नुकसान हुआ। जवाब में पूजा ने कहा, "मैं प्रयागराज की उन माताओं और बहनों की आवाज हूँ, जिन्होंने अपनों को खोया। मैंने यह बात तब भी कही थी, जब मैं पार्टी में थी, और आज भी अपने बयान पर कायम हूँ।" उन्होंने सपा के पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) नारे पर तंज कसते हुए कहा, "मैं भी पिछड़े समुदाय से हूँ, लेकिन सपा ने मेरी पीड़ा को अनदेखा किया। वे पीडीए की बात करते हैं, लेकिन मेरे जैसे लोगों के लिए कुछ नहीं करते।"

  • सपा का पीडीए नारा और विवाद

सपा ने 2022 के बाद से पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) को अपनी रणनीति का हिस्सा बनाया है। हालांकि, पूजा पाल जैसे नेताओं का निष्कासन इस नारे की विश्वसनीयता पर सवाल उठाता है। पूजा ने कहा कि सपा ने उनकी पीड़ा को अनदेखा किया, जो उनके समुदाय का प्रतिनिधित्व करती है।

पूजा का निष्कासन सपा के लिए राजनीतिक रूप से नुकसानदायक साबित हो सकता है। उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने सपा की आलोचना करते हुए कहा, "स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर विकसित भारत के विजन का समर्थन करने वाली पूजा पाल को निष्कासित करना सपा की संकीर्ण मानसिकता को दिखाता है।" यह घटना सपा की छवि को प्रभावित कर सकती है, खासकर तब जब पूजा ने प्रयागराज की महिलाओं और पीड़ितों की आवाज उठाई।

  • योगी सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति

योगी आदित्यनाथ की सरकार ने अपराध के खिलाफ सख्त नीति अपनाई है। अतीक अहमद जैसे माफिया पर कार्रवाई को पूजा पाल ने अपने पति के हत्यारों को सजा के रूप में देखा। इस नीति ने उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था पर व्यापक बहस छेड़ी है। पूजा के निष्कासन ने उनके भविष्य को लेकर अटकलें शुरू कर दी हैं। कुछ का मानना है कि वे भाजपा में शामिल हो सकती हैं, क्योंकि उन्होंने पहले भी भाजपा नेताओं से संपर्क बनाए रखा है। 2024 में राज्यसभा चुनाव के दौरान पूजा ने सपा के खिलाफ जाकर भाजपा उम्मीदवार के पक्ष में वोट दिया था, जिसके लिए उन्हें चेतावनी मिली थी। हालांकि, पूजा ने अभी तक अपने अगले कदम के बारे में कोई स्पष्ट बयान नहीं दिया है। उनकी यह लड़ाई केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय और कानून-व्यवस्था के व्यापक मुद्दों से जुड़ी है।

  • पूजा पाल का साहस और प्रेरणा

पूजा पाल की कहानी उन महिलाओं के लिए प्रेरणा है, जो विपरीत परिस्थितियों में हिम्मत नहीं हारतीं। उन्होंने अपने पति की हत्या के बाद न केवल दुख सहा, बल्कि एक विधायक के रूप में अपनी आवाज को बुलंद किया। उनकी यह लड़ाई सामाजिक न्याय और महिलाओं के अधिकारों की मिसाल है। पूजा पाल की कहानी उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक महत्वपूर्ण अध्याय है। यह एक ऐसी महिला की कहानी है, जिसने अपने पति की हत्या का दुख सहा और न्याय की लड़ाई को अपनी ताकत बनाया। उन्होंने कहा, "मैंने तब आवाज उठाई जब कोई और अपराधियों के खिलाफ बोलने को तैयार नहीं था।"

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