नई दिल्ली: सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने Actor मोहनलाल को COAS कमेंडेशन कार्ड से सम्मानित किया, टेरिटोरियल आर्मी में योगदान को सलाम।
नई दिल्ली में मंगलवार को एक खास मौका आया जब मलयालम सिनेमा के सुपरस्टार और मानद लेफ्टिनेंट कर्नल मोहनलाल को भारतीय सेना के प्रमुख जनरल उपेंद्र
नई दिल्ली में मंगलवार को एक खास मौका आया जब मलयालम सिनेमा के सुपरस्टार और मानद लेफ्टिनेंट कर्नल मोहनलाल को भारतीय सेना के प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने COAS कमेंडेशन कार्ड से सम्मानित किया। यह सम्मान मोहनलाल के टेरिटोरियल आर्मी के साथ लंबे जुड़ाव और बटालियन की कार्यक्षमता बढ़ाने में उनके महत्वपूर्ण योगदान के लिए दिया गया। आर्मी हेडक्वार्टर में आयोजित इस समारोह में सात आर्मी कमांडर्स भी मौजूद थे। मोहनलाल ने अपनी सेना की वर्दी पहनकर यह सम्मान ग्रहण किया और इसे अपने जीवन का गौरवपूर्ण पल बताया। यह घटना न सिर्फ मोहनलाल की सिनेमा के क्षेत्र में उपलब्धियों को रेखांकित करती है, बल्कि उनके देशसेवा के प्रति समर्पण को भी उजागर करती है।
घटना 7 अक्टूबर 2025 को हुई। जनरल उपेंद्र द्विवेदी, जो PVSM और AVSM से सम्मानित हैं, ने आर्मी हेडक्वार्टर में मोहनलाल को बुलाया। समारोह में मोहनलाल ने कहा कि यह सम्मान उनके लिए अपार गर्व का विषय है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर फोटो शेयर की और लिखा, 'आज मुझे चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ जनरल उपेंद्र द्विवेदी द्वारा आर्मी हेडक्वार्टर बुलाया गया, जहां सात आर्मी कमांडर्स की मौजूदगी में मुझे COAS कमेंडेशन कार्ड प्रदान किया गया।' मोहनलाल ने आगे कहा कि यह मानद लेफ्टिनेंट कर्नल के रूप में मिला सम्मान है। उन्होंने पूरी भारतीय सेना और अपनी पैरेंट यूनिट टेरिटोरियल आर्मी का धन्यवाद किया। समारोह के दौरान जनरल द्विवेदी और मोहनलाल ने टेरिटोरियल आर्मी बटालियनों में और अधिक दक्षता लाने पर चर्चा भी की। मोहनलाल ने बताया कि हमने देश के लिए बड़े योजनाओं पर बात की।
मोहनलाल का सेना से गहरा नाता है। वे 2009 में टेरिटोरियल आर्मी में मानद लेफ्टिनेंट कर्नल के पद पर नियुक्त हुए थे। तब से वे 16 वर्षों से सक्रिय रूप से जुड़े हुए हैं। टेरिटोरियल आर्मी एक स्वयंसेवी बल है, जो सिविलियनों को सेना से जोड़ता है। मोहनलाल ने 36 तमिलनाडू बटालियन में अपनी सेवाएं दी हैं। उन्होंने रिक्रूटमेंट ड्राइव, ट्रेनिंग कैंप और सामाजिक कार्यों में हिस्सा लिया। सेना ने कहा कि मोहनलाल ने सेवा, अनुशासन और राष्ट्रीय गौरव के मूल्यों को अपनाया है। उनका योगदान बटालियन की कार्यक्षमता बढ़ाने में महत्वपूर्ण रहा। जनरल द्विवेदी ने कहा कि मोहनलाल का समर्पण प्रेरणादायक है। यह सम्मान उनके निरंतर जुड़ाव और समाज सेवा के लिए है।
यह सम्मान मोहनलाल के हालिया दादासाहेब फाल्के अवॉर्ड के ठीक बाद आया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अगस्त 2025 में उन्हें यह भारत का सर्वोच्च सिनेमाई सम्मान प्रदान किया। मोहनलाल को पद्म श्री (2001) और पद्म भूषण (2019) भी मिल चुके हैं। वे मलयालम, तमिल, तेलुगु, कन्नड़ और हिंदी सिनेमा में 400 से अधिक फिल्मों में काम कर चुके हैं। उनकी फिल्में जैसे 'द्रविड़न', 'किरिड़म' और 'पुलिमुरुगन' ने रिकॉर्ड तोड़े। लेकिन मोहनलाल सिनेमा से इतर भी सक्रिय हैं। उन्होंने विश्वसांति फाउंडेशन की स्थापना की, जो शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल विकास, पर्यावरण संरक्षण और कल्याणकारी योजनाओं पर काम करती है। फाउंडेशन ने देशभर में कई परियोजनाएं चलाई हैं। सेना ने कहा कि मोहनलाल का परोपकार और वर्दी के प्रति सम्मान सराहनीय है।
समारोह के बाद मोहनलाल ने मीडिया से बात की। एएनआई को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा, 'यह सेना प्रमुख से कमेंडेशन प्राप्त करने का बड़ा सम्मान है। दादासाहेब फाल्के अवॉर्ड भी इसका एक कारण है। हमारी अच्छी बैठक हुई। हमने टेरिटोरियल आर्मी की दक्षता बढ़ाने पर चर्चा की।' जब पत्रकारों ने पूछा कि क्या वे सेना पर आधारित फिल्में बनाएंगे, तो मोहनलाल ने हंसते हुए कहा, 'मैंने मेजर रवि के निर्देशन में कई आर्मी फिल्में की हैं। हम और बनाने की योजना में हैं।' उनकी फिल्में जैसे 'केरल वर्सेज पाकिस्तान' और '13 अमेजिंग पर्देसि' ने सेना के साहस को दिखाया। मोहनलाल ने कहा कि सिनेमा सेना के प्रति जागरूकता फैला सकता है।
भारतीय सेना में सेलिब्रिटी अधिकारी आम नहीं हैं। मोहनलाल के अलावा अमिताभ बच्चन, सलमान खान और फरीदा जलाल जैसे सितारे मानद पदों पर रहे हैं। लेकिन मोहनलाल का सक्रिय योगदान अनोखा है। टेरिटोरियल आर्मी 1948 में बनी, जो सिविलियनों को सैन्य प्रशिक्षण देती है। मोहनलाल ने कई ट्रेनिंग कैंप अटेंड किए। 2010 में उन्होंने फ्लड रिलीफ में मदद की। कोविड-19 के दौरान फाउंडेशन ने मास्क और सैनिटाइजर बांटे। सेना ने कहा कि ऐसे अधिकारी सेना की छवि को मजबूत करते हैं। जनरल द्विवेदी ने मोहनलाल को बधाई दी और कहा कि उनका कार्य देश के लिए प्रेरणा है।
मोहनलाल का जन्म 21 मई 1960 को केरल के एलाथुर में हुआ। वे 15 साल की उम्र से फिल्मों में हैं। उनकी पहली फिल्म 'मानवतयम' 1973 में आई। आज वे मलयालम सिनेमा के बादशाह हैं। लेकिन वे सादगी पसंद करते हैं। मोहनलाल ने कभी राजनीति या विवादों से दूर रहे। उनकी पत्नी सुचरिता और बेटे प्रणव व वृष्टि हैं। प्रणव भी अभिनेता हैं। मोहनलाल का सेना प्रेम बचपन से है। वे कहते हैं कि वर्दी ने उन्हें अनुशासन सिखाया। यह सम्मान उनके 65वें जन्मदिन के करीब आया, जो एक और खुशी का पल है।
सोशल मीडिया पर फैंस ने मोहनलाल की तारीफों के पुल बांधे। एक यूजर ने लिखा, 'लालेटन को सलाम, सिनेमा और सेना दोनों में कमाल।' दूसरे ने कहा, 'COAS कार्ड मिलना आसान नहीं, मोहनलाल का योगदान सच्चा है।' हैशटैग जैसे MohanlalArmyHonor ट्रेंड कर रहा। सेना के आधिकारिक अकाउंट ने फोटो शेयर की। मोहनलाल के फैंस क्लब ने जश्न मनाया। केरल में समर्थकों ने पटाखे फोड़े। यह घटना दिखाती है कि सितारे कैसे समाज सेवा से जुड़ सकते हैं।
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