नकल जिहाद पर अडिग धामी: 'पेपर लीक नहीं, सिस्टम को बदनाम करने की साजिश', सीबीआई जांच की कही बात
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हाल ही में राज्य में हुई कथित पेपर लीक घटना को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने इसे 'नकल जिहाद' करार देते हुए कहा कि यह एक
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हाल ही में राज्य में हुई कथित पेपर लीक घटना को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने इसे 'नकल जिहाद' करार देते हुए कहा कि यह एक सुनियोजित साजिश थी, जिसका मकसद राज्य सरकार और पूरे सिस्टम को बदनाम करना था। धामी ने स्पष्ट किया कि यह वास्तविक पेपर लीक नहीं था, क्योंकि परीक्षा सुबह 11 बजे शुरू हुई और कथित लीक शाम को हुई। उन्होंने अपनी बात पर अडिग रहते हुए कहा कि दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। इस बयान के बाद छात्र संगठनों के विरोध प्रदर्शन को समाप्त करने के लिए धामी ने सीबीआई जांच का ऐलान किया। यह घटना उत्तराखंड में भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता पर सवाल खड़ी कर रही है।
घटना उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (यूकेएसएसएससी) की ग्रेजुएट लेवल भर्ती परीक्षा से जुड़ी है। यह परीक्षा 21 सितंबर 2025 को विभिन्न विभागों के लिए आयोजित की गई थी। परीक्षा सुबह 11 बजे से दोपहर 1 बजे तक चली। लेकिन उसी शाम सोशल मीडिया पर तीन पन्नों के फोटो वायरल हो गए, जिनमें 12 प्रश्न थे। छात्रों ने इसे पेपर लीक बताते हुए हंगामा मचा दिया। देहरादून और हल्द्वानी में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए। छात्र संगठनों ने परीक्षा रद्द करने, दोषियों पर सख्त कार्रवाई और सीबीआई जांच की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने नारे लगाए, 'पेपर चोर, गद्दी छोड़'। यह विरोध एक हफ्ते तक चला, जिसमें हजारों युवा सड़कों पर उतरे।
पुलिस ने तुरंत विशेष जांच टीम (एसआईटी) का गठन किया। 24 सितंबर को मुख्य आरोपी खालिद मलिक को गिरफ्तार किया गया। खालिद एक कोचिंग सेंटर से जुड़ा था। उसके बाद उसकी बहन सबिया को भी हिरासत में लिया गया। जांच में पता चला कि खालिद ने परीक्षा के दौरान ही प्रश्नों की फोटो ली और सोशल मीडिया पर डाली। लेकिन पुलिस ने कहा कि यह संगठित गिरोह का काम नहीं था। देहरादून के एसएसपी अजय सिंह ने बताया कि प्रारंभिक जांच में साजिश का कोण मिला है, लेकिन कोई बड़ा गैंग शामिल नहीं। खालिद ने 12 प्रश्न लीक किए, लेकिन परीक्षा के समय कोई व्यापक नकल नहीं हुई। इससे पहले 20 सितंबर को पूर्व बीजेपी नेता हकम सिंह को गिरफ्तार किया गया था, जो उम्मीदवारों से 15 लाख रुपये मांग रहा था। हकम सिंह 2021 के पेपर लीक मामले में भी जेल जा चुका था।
मुख्यमंत्री धामी ने 24 सितंबर को बीजेपी की बैठक में इस मुद्दे पर बात की। उन्होंने कहा, 'कोचिंग सेंटर और नकल माफिया मिलकर नकल जिहाद चला रहे हैं। यह राज्य में अराजकता फैलाने की कोशिश है।' धामी ने जोर दिया कि यह युवाओं को गुमराह करने का प्रयास है। उन्होंने कहा, 'मैं अपनी बात पर अडिग हूं। यह साजिश थी। अगर पेपर लीक होता, तो परीक्षा शुरू होने से दो घंटे पहले प्रश्न बाहर आ जाते।' धामी ने सरकार की जीरो टॉलरेंस पॉलिसी का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि पिछले चार सालों में 25,000 नियुक्तियां बिना किसी घोटाले के हुई हैं। लेकिन विपक्ष ने धामी के 'नकल जिहाद' शब्द पर आपत्ति जताई। कांग्रेस नेता करन माहरा ने कहा, 'यह मुसलमानों को निशाना बनाने वाली भाषा है। धामी जी साजिश की बात करते हैं, लेकिन बीजेपी के ही लोग आरोपी हैं।' उन्होंने हकम सिंह, धर्मेंद्र चौहान और सुमन प्रोफेसर का नाम लिया, जो बीजेपी से जुड़े बताए जाते हैं।
प्रदर्शनकारियों की मांग पर धामी ने 29 सितंबर को देहरादून के परेड ग्राउंड पर सरप्राइज विजिट की। उन्होंने छात्रों से भावुक अपील की, 'मैं युवाओं को धूप में बैठे देखकर दुखी हूं। यह उनका हक है।' धामी ने सीबीआई जांच का ऐलान किया। उन्होंने कहा, 'एसआईटी रिटायर्ड जज के नेतृत्व में काम कर रही है। सबूत इकट्ठा हो चुके हैं। सीबीआई को सौंप देंगे।' इस ऐलान के बाद छात्र संगठनों ने 10 अक्टूबर तक प्रदर्शन स्थगित कर दिया। लेकिन कांग्रेस ने कहा कि वे 3 अक्टूबर को सीएम आवास मार्च करेंगे। उन्होंने परीक्षा रद्द करने और यूकेएसएसएससी चेयरमैन गणेश सिंह मार्टोलिया को हटाने की मांग की। प्रदर्शनकारी नेता बॉबी पंवार ने कहा, 'सीएम का ऐलान स्वागतयोग्य है, लेकिन हम निगरानी रखेंगे।'
यह घटना उत्तराखंड में पेपर लीक की पुरानी समस्या को फिर सामने लाई। 2021 में भी यूकेएसएसएससी परीक्षा में लीक हुआ था। उसके बाद सरकार ने उत्तराखंड प्रतियोगी परीक्षा (भर्ती में अनुचित साधन रोकथाम) अध्यादेश 2023 लाया। इसमें नकल करने वालों को 10 साल की सजा और जुर्माना है। लेकिन विपक्ष कहता है कि कानून कागजों पर ही है। 2017 के एनएच-74 घोटाले में भी सीबीआई जांच का वादा हुआ, लेकिन आठ साल बाद भी कुछ नहीं। विशेषज्ञों का कहना है कि कोचिंग माफिया और परीक्षा केंद्रों की मिलीभगत से लीक होते हैं। धामी ने कहा, 'हम भर्ती प्रक्रिया को मजबूत करेंगे। युवाओं का भविष्य सुरक्षित होगा।' उन्होंने अमृत काल में उत्तराखंड को अग्रणी राज्य बनाने का लक्ष्य बताया।
उत्तराखंड में बेरोजगारी एक बड़ी समस्या है। राज्य में लाखों युवा सरकारी नौकरियों के लिए तैयारी करते हैं। पेपर लीक से उनके सपने टूट जाते हैं। धामी सरकार ने चार सालों में कई भर्तियां कीं, लेकिन ऐसी घटनाएं विश्वास तोड़ती हैं। सोशल मीडिया पर बहस छिड़ी है। एक यूजर ने लिखा, 'नकल जिहाद शब्द गलत है, समस्या सिस्टम की है।' दूसरे ने कहा, 'धामी साहब साजिश की बात सही कह रहे, लेकिन कार्रवाई दिखाओ।' एबीपी न्यूज को दिए इंटरव्यू में धामी ने सफाई दी, 'मैंने किसी समुदाय का नाम नहीं लिया। यह साजिश है। हिंदू आरोपी होता तो भी यही कहता।' उन्होंने प्राकृतिक आपदाओं पर भी बात की, कहा कि राज्य बाढ़ और भूस्खलन से जूझ रहा है, लेकिन विकास जारी है।
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