कोलकाता में बांग्लादेशी मॉडल-अभिनेत्री शांता पॉल फर्जी भारतीय दस्तावेजों के साथ गिरफ्तार, पुलिस जांच में रैकेट की आशंका। 

Bollywood News: कोलकाता पुलिस ने 28 वर्षीय बांग्लादेशी मॉडल और अभिनेत्री शांता पॉल को 30 जुलाई 2025 को फर्जी भारतीय पहचान पत्रों के साथ गिरफ्तार....

Aug 1, 2025 - 19:24
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कोलकाता में बांग्लादेशी मॉडल-अभिनेत्री शांता पॉल फर्जी भारतीय दस्तावेजों के साथ गिरफ्तार, पुलिस जांच में रैकेट की आशंका। 
कोलकाता में बांग्लादेशी मॉडल-अभिनेत्री शांता पॉल फर्जी भारतीय दस्तावेजों के साथ गिरफ्तार, पुलिस जांच में रैकेट की आशंका। 

कोलकाता पुलिस ने 28 वर्षीय बांग्लादेशी मॉडल और अभिनेत्री शांता पॉल को 30 जुलाई 2025 को फर्जी भारतीय पहचान पत्रों के साथ गिरफ्तार किया। शांता के पास से दो आधार कार्ड, एक वोटर आईडी, राशन कार्ड और कई बांग्लादेशी दस्तावेज बरामद किए गए। वह कोलकाता के बिक्रमार्गढ़ क्षेत्र में किराए के फ्लैट में रह रही थीं और कथित तौर पर भारतीय नागरिक बनकर कार रेंटल व्यवसाय चला रही थीं। पुलिस को संदेह है कि यह एक बड़े फर्जी दस्तावेज रैकेट का हिस्सा हो सकता है। मामले की जांच के लिए पुलिस ने आधार प्राधिकरण (UIDAI), चुनाव आयोग और पश्चिम बंगाल के खाद्य विभाग से संपर्क किया है। शांता को 8 अगस्त तक पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है।

घटना की शुरुआत तब हुई, जब कोलकाता पुलिस के गोल्फ ग्रीन पुलिस स्टेशन को शांता के खिलाफ संदिग्ध गतिविधियों की शिकायत मिली। शांता ने हाल ही में ठाकुरपुकुर पुलिस स्टेशन में धोखाधड़ी की शिकायत दर्ज की थी, जिसमें उन्होंने एक अलग पता दिया था। इस शिकायत के आधार पर कोलकाता पुलिस की एंटी-राउडी सेक्शन (ARS) ने पार्क स्ट्रीट पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया। 29 जुलाई 2025 को उनके बिक्रमार्गढ़ स्थित किराए के फ्लैट पर छापेमारी की गई। छापेमारी में पुलिस ने दो आधार कार्ड (एक कोलकाता और एक बर्दवान के पते पर), एक भारतीय वोटर आईडी, राशन कार्ड, कई बांग्लादेशी पासपोर्ट, रीजेंट एयरवेज (बांग्लादेश) का कर्मचारी आईडी, और ढाका शिक्षा बोर्ड का एक प्रवेश पत्र बरामद किया।

शांता पॉल बांग्लादेश के बारीसाल शहर की रहने वाली हैं। उन्होंने बांग्लादेश में मॉडलिंग और अभिनय में काम किया है और 2019 में केरल में आयोजित मिस एशिया ग्लोबल प्रतियोगिता में हिस्सा लिया था। वह पहले रीजेंट एयरवेज में क्रू मेंबर के रूप में काम कर चुकी हैं और बाद में एक फूड व्लॉग चलाने लगी थीं। पुलिस के अनुसार, शांता कुछ महीने पहले वैध बांग्लादेशी पासपोर्ट पर भारत आई थीं और कोलकाता के पार्क स्ट्रीट क्षेत्र में किराए पर रहने लगी थीं। वहां से उन्होंने एक एजेंट की मदद से राशन कार्ड बनवाया। बाद में, वे बिक्रमार्गढ़ में एक फ्लैट में शिफ्ट हो गईं और कथित तौर पर एक अन्य व्यक्ति की मदद से फर्जी आधार कार्ड और वोटर आईडी हासिल किया।

पुलिस पूछताछ में शांता इन भारतीय दस्तावेजों के स्रोत के बारे में संतोषजनक जवाब नहीं दे सकीं। प्रारंभिक जांच में पता चला कि बर्दवान का आधार कार्ड 2020 में जारी किया गया था। पुलिस को संदेह है कि शांता ने इन दस्तावेजों का इस्तेमाल भारतीय पासपोर्ट हासिल करने और विदेश यात्रा करने के लिए किया। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया, “शांता विदेश यात्रा करना चाहती थीं, लेकिन बांग्लादेश से ऐसा नहीं कर पाईं। इसलिए, उन्होंने भारत में फर्जी दस्तावेज बनवाकर भारतीय नागरिक के रूप में यात्रा करने की योजना बनाई।” पुलिस अब यह जांच कर रही है कि इन दस्तावेजों को बनाने में किन लोगों ने उनकी मदद की और क्या इसमें कोई सरकारी अधिकारी शामिल था।

शांता के पति, जो आंध्र प्रदेश के रहने वाले हैं, और उनके माता-पिता, जो उनके साथ कोलकाता के फ्लैट में रह रहे थे, भी पुलिस जांच के दायरे में हैं। एक पुरुष सहयोगी से भी पूछताछ की जा रही है, हालांकि अभी तक उसके खिलाफ कोई सबूत नहीं मिला है। शांता के सोशल मीडिया खातों की जांच में पता चला कि उन्होंने कुछ पोस्ट में उन लोगों को उजागर करने का दावा किया था, जो भारतीय और बांग्लादेशी दोनों पहचान पत्र रखते थे। यह विडंबना पुलिस के लिए जांच का एक अतिरिक्त पहलू बन गई है।

पुलिस ने भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 420 (धोखाधड़ी), 467 (दस्तावेजों की जालसाजी), 468 (जालसाजी के लिए धोखाधड़ी), 471 (जाली दस्तावेज का उपयोग), और 120B (आपराधिक साजिश) के तहत मामला दर्ज किया है। शांता को 30 जुलाई 2025 को कोर्ट में पेश किया गया, जहां उन्हें 8 अगस्त तक पुलिस हिरासत में भेज दिया गया। पुलिस ने UIDAI, चुनाव आयोग, और पश्चिम बंगाल के खाद्य विभाग से संपर्क किया है ताकि आधार, वोटर आईडी, और राशन कार्ड की प्रामाणिकता की जांच की जा सके।

यह गिरफ्तारी पश्चिम बंगाल में अवैध प्रवासियों के खिलाफ चल रही व्यापक कार्रवाई के बीच हुई है। उसी दिन, पश्चिम बंगाल पुलिस ने मुर्शिदाबाद जिले में छह अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों और एक स्थानीय भारतीय सहयोगी को गिरफ्तार किया था। यह घटना उस समय और महत्वपूर्ण हो जाती है, जब अवैध प्रवास और फर्जी दस्तावेजों के मुद्दे पर राजनीतिक बहस तेज है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार पर अवैध प्रवास को रोकने में विफल रहने का आरोप लगाया है और दावा किया है कि अन्य राज्यों में बंगाली प्रवासियों को उनकी भाषा के कारण परेशान किया जा रहा है।

सोशल मीडिया पर इस गिरफ्तारी को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं आई हैं। कुछ यूजर्स ने इसे सुरक्षा व्यवस्था में चूक बताया, जबकि अन्य ने फर्जी दस्तावेजों के रैकेट पर सख्त कार्रवाई की मांग की। एक यूजर ने लिखा, “यह शर्मनाक है कि कोई विदेशी नागरिक इतनी आसानी से हमारे दस्तावेज हासिल कर ले। आधार और वोटर आईडी की प्रक्रिया को और सख्त करना होगा।” एक अन्य यूजर ने टिप्पणी की, “यह सिर्फ एक व्यक्ति की बात नहीं है। इसके पीछे एक बड़ा रैकेट हो सकता है, जिसे उजागर करना जरूरी है।”

फर्जी दस्तावेजों का मुद्दा भारत में लंबे समय से चिंता का विषय रहा है। 2023 में, UIDAI ने 1,000 से अधिक आधार कार्डों को निष्क्रिय किया था, जो फर्जी दस्तावेजों के आधार पर बनाए गए थे। इसी तरह, 2024 में पश्चिम बंगाल में एक रैकेट का भंडाफोड़ हुआ था, जिसमें बांग्लादेशी नागरिकों को भारतीय पहचान पत्र उपलब्ध कराए जा रहे थे। विशेषज्ञों का कहना है कि फर्जी दस्तावेजों का उपयोग न केवल सुरक्षा के लिए खतरा है, बल्कि यह मतदाता सूची और सरकारी योजनाओं की विश्वसनीयता को भी प्रभावित करता है।

सामाजिक कार्यकर्ता अनिल वर्मा ने इस घटना पर चिंता जताते हुए कहा कि आधार और वोटर आईडी जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेजों की सुरक्षा के लिए और सख्त नियम बनाए जाने चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि बायोमेट्रिक सत्यापन और दस्तावेजों की जांच की प्रक्रिया को और पारदर्शी करना होगा। उन्होंने यह भी कहा कि अवैध प्रवास की समस्या से निपटने के लिए भारत और बांग्लादेश के बीच बेहतर समन्वय की जरूरत है।

पुलिस अब शांता के संपर्कों और उनके द्वारा इस्तेमाल किए गए एजेंटों की जांच कर रही है। यह भी पता लगाया जा रहा है कि क्या शांता ने इन दस्तावेजों का उपयोग किसी स्टार्टअप व्यवसाय या कार रेंटल बिजनेस के लिए किया था, जैसा कि उन्होंने दावा किया था। उनके सोशल मीडिया खातों और व्लॉग की भी जांच की जा रही है ताकि उनके इरादों और गतिविधियों का पता लगाया जा सके।

बांग्लादेशी मॉडल और अभिनेत्री शांता पॉल की कोलकाता में फर्जी भारतीय दस्तावेजों के साथ गिरफ्तारी ने एक बार फिर अवैध प्रवास और फर्जी पहचान पत्रों की समस्या को उजागर किया है। पुलिस की जांच से एक बड़े रैकेट का खुलासा होने की संभावना है। यह घटना आधार, वोटर आईडी और राशन कार्ड जैसे दस्तावेजों की प्रामाणिकता पर सवाल उठाती है।

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