तिरंगे के सम्मान में मुख्यमंत्री का बड़ा फैसला: उमर अब्दुल्ला ने उद्घाटन समारोह में रिबन काटने से किया इनकार।

जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला एक बार फिर चर्चा के केंद्र में हैं, लेकिन इस बार वजह कोई राजनीतिक बयान नहीं, बल्कि राष्ट्रीय

Apr 16, 2026 - 14:55
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तिरंगे के सम्मान में मुख्यमंत्री का बड़ा फैसला: उमर अब्दुल्ला ने उद्घाटन समारोह में रिबन काटने से किया इनकार।
तिरंगे के सम्मान में मुख्यमंत्री का बड़ा फैसला: उमर अब्दुल्ला ने उद्घाटन समारोह में रिबन काटने से किया इनकार।
  • श्रीनगर में 'नो योर आर्टिसन' कार्यक्रम के दौरान मिसाल: सीएम ने राष्ट्रीय ध्वज के रंगों वाले रिबन को खुलवाकर सुरक्षित रखवाया
  • प्रोटोकॉल और देशभक्ति का संगम: उमर अब्दुल्ला के वायरल वीडियो ने सोशल मीडिया पर बटोरीं सुर्खियां, विपक्ष ने भी की सराहना

जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला एक बार फिर चर्चा के केंद्र में हैं, लेकिन इस बार वजह कोई राजनीतिक बयान नहीं, बल्कि राष्ट्रीय ध्वज के प्रति उनका गहरा सम्मान और सूझबूझ है। बुधवार, 15 अप्रैल 2026 को श्रीनगर के 'कश्मीर हाट' में आयोजित एक आधिकारिक कार्यक्रम के दौरान एक ऐसी स्थिति उत्पन्न हुई जिसने वहां मौजूद सभी लोगों का ध्यान आकर्षित किया। मुख्यमंत्री 'नो योर आर्टिसन' (अपने कारीगरों को जानें) नामक हस्तशिल्प प्रदर्शनी का उद्घाटन करने पहुंचे थे। जैसे ही वह रिबन काटने के लिए आगे बढ़े, उनकी नजर वहां लगे रिबन पर पड़ी जो केसरिया, सफेद और हरे रंगों की धारियों से बना था, जो बिल्कुल भारतीय तिरंगे जैसा प्रतीत हो रहा था। राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति अपनी संवेदनशीलता दिखाते हुए उमर अब्दुल्ला ने तत्काल रुकने का फैसला किया और रिबन काटने से स्पष्ट मना कर दिया।

घटना के दौरान जो दृश्य कैमरे में कैद हुए, उनमें मुख्यमंत्री को बहुत ही संयत और गंभीर मुद्रा में देखा जा सकता है। जैसे ही उन्हें आभास हुआ कि रिबन के रंग राष्ट्रीय ध्वज का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं, उन्होंने अपने बगल में खड़े उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी की ओर मुड़कर कहा कि वे इसे नहीं काट सकते। मुख्यमंत्री का तर्क था कि तिरंगे के रंगों वाले किसी भी वस्त्र या रिबन पर कैंची चलाना राष्ट्रीय गरिमा के खिलाफ हो सकता है। उन्होंने केवल मना ही नहीं किया, बल्कि मौके पर मौजूद अधिकारियों और आयोजकों को निर्देश दिया कि इस रिबन को काटा न जाए, बल्कि इसे दोनों सिरों से सावधानीपूर्वक खोल दिया जाए। उनके इस निर्णय ने कार्यक्रम के माहौल को एक गरिमापूर्ण दिशा प्रदान की और प्रोटोकॉल के पालन का एक नया मानक स्थापित किया। मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद अधिकारियों ने तुरंत रिबन को दोनों तरफ से खोलकर हटाया। उमर अब्दुल्ला ने स्वयं इसमें सहायता की और सुनिश्चित किया कि रिबन को जमीन पर गिरने या अपमानित होने के बजाय सम्मान के साथ समेटकर आयोजकों को वापस सौंप दिया जाए। उन्होंने आयोजकों से यह भी कहा कि इस रिबन को भविष्य के लिए सुरक्षित और सम्मानजनक तरीके से रखा जाना चाहिए। इसके बाद ही उन्होंने प्रदर्शनी का विधिवत उद्घाटन किया और कारीगरों द्वारा लगाए गए स्टालों का अवलोकन किया। यह पूरी घटना सोशल मीडिया पर तेजी से प्रसारित हो गई, जिसके बाद लोग उनके इस कदम की जमकर तारीफ करने लगे। यह दर्शाता है कि एक संवैधानिक पद पर बैठा व्यक्ति किस प्रकार सूक्ष्म विवरणों पर ध्यान देकर राष्ट्रीय प्रतीकों की गरिमा की रक्षा कर सकता है। भारतीय ध्वज संहिता और 'राष्ट्रीय सम्मान के अपमान का निवारण अधिनियम, 1971' के तहत राष्ट्रीय ध्वज या उसके रंगों का अनादर करना एक गंभीर अपराध है। हालांकि रिबन काटना सीधे तौर पर ध्वज का अपमान नहीं माना जाता, लेकिन मुख्यमंत्री ने किसी भी प्रकार के विवाद या अनजाने में होने वाले अनादर से बचने के लिए नैतिकता के आधार पर यह निर्णय लिया।

इस घटना के बाद राजनीतिक गलियारों से भी सकारात्मक प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। विपक्षी दलों के नेताओं, विशेषकर भारतीय जनता पार्टी के प्रतिनिधियों ने भी मुख्यमंत्री के इस विवेकपूर्ण निर्णय की सराहना की है। नेताओं का मानना है कि राष्ट्रीय ध्वज किसी दल का नहीं बल्कि पूरे देश का होता है और उसके सम्मान में लिया गया कोई भी फैसला स्वागत योग्य है। हालांकि, कुछ हलकों से आयोजकों की इस चूक पर सवाल भी उठाए गए हैं कि आखिर उद्घाटन के लिए तिरंगे के रंगों वाले रिबन का चुनाव ही क्यों किया गया। भाजपा के स्थानीय प्रवक्ताओं ने इस मामले में जांच की मांग करते हुए कहा है कि इस तरह की लापरवाही से बचना चाहिए ताकि भविष्य में राष्ट्रीय प्रतीकों का उपयोग सजावट या रिबन के रूप में न हो।

उमर अब्दुल्ला हमेशा से ही प्रोटोकॉल और राष्ट्रीय मर्यादाओं के पालन के लिए जाने जाते रहे हैं। अतीत में भी कई मौकों पर उन्होंने राष्ट्रगान और ध्वज से जुड़े मामलों में अपनी स्पष्ट राय और आचरण पेश किया है। श्रीनगर की इस घटना ने उनके उस व्यक्तित्व को और मजबूती दी है जो कश्मीर में बदलती राजनीति और राष्ट्रीय मुख्यधारा के साथ जुड़ाव को प्रदर्शित करता है। मुख्यमंत्री के करीबियों का कहना है कि वे हमेशा सार्वजनिक कार्यक्रमों में इस बात का ध्यान रखते हैं कि कोई भी कार्य देश की अखंडता और सम्मान को ठेस पहुंचाने वाला न हो। यह घटना न केवल एक प्रशासनिक सुधार का उदाहरण है, बल्कि यह सार्वजनिक जीवन में संवेदनशीलता के महत्व को भी दर्शाती है। कार्यक्रम के समापन के बाद मुख्यमंत्री ने मीडिया से बातचीत के दौरान अन्य मुद्दों पर भी प्रकाश डाला, लेकिन रिबन वाली घटना मुख्य आकर्षण बनी रही। उन्होंने हस्तशिल्प विभाग के प्रयासों की सराहना की और कहा कि कश्मीर के कारीगरों को अंतरराष्ट्रीय मंच प्रदान करना उनकी सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि नए जम्मू-कश्मीर में विकास के साथ-साथ हमारी सांस्कृतिक और राष्ट्रीय पहचान का संरक्षण भी आवश्यक है। श्रीनगर की सड़कों और डिजिटल मंचों पर आज इस घटना की चर्चा है, जिसे लोग एक 'सकारात्मक बदलाव' के रूप में देख रहे हैं। मुख्यमंत्री का यह व्यवहार आने वाले समय में अन्य सार्वजनिक हस्तियों के लिए भी एक मार्गदर्शक के रूप में कार्य करेगा।

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