देवबंद: इतिहास के गड़े मुर्दे उखाड़ने से देश को पहुंच रही गंभीर क्षति- मदनी
मौलाना महमूद मदनी ने बुधवार को जारी बयान में कहा कि पुराने गड़े मुर्दे उखाड़ने से देश की धर्मनिरपेक्ष बुनियादें हिल रही हैं। इसके साथ ही ऐतिहासिक संदर्भों को दोबारा वर्णित करने की कोशिशें राष्ट्रीय अखंडता के लिए कि...
जामा मस्जिद संभल विवाद पर जमीयत अध्यक्ष का बयान
By INA News Deoband.
जमीयत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी ने संभल की जामा मस्जिद के संबंध में पैदा हुए विवाद और कोर्ट द्वारा सर्वे के आदेश पर गहरी चिंता व्यक्त की है। मौलाना मदनी ने कहा कि इतिहास के झूठ और सच को मिलाकर सांप्रदायिक तत्व देश की शांति और व्यवस्था के दुश्मन बने हुए हैं।
मौलाना महमूद मदनी ने बुधवार को जारी बयान में कहा कि पुराने गड़े मुर्दे उखाड़ने से देश की धर्मनिरपेक्ष बुनियादें हिल रही हैं। इसके साथ ही ऐतिहासिक संदर्भों को दोबारा वर्णित करने की कोशिशें राष्ट्रीय अखंडता के लिए किसी भी तरह से अनुकूल नहीं हैं। उन्होंने याद दिलाया कि देश ने बाबरी मस्जिद की शहादत सहन की है और उसके प्रभावों से आज भी जूझ रहा है।
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इसी पृष्ठभूमि में पूजा स्थल (विशेष प्रावधान) अधिनियम, 1991 लागू किया गया था। ताकि देश मस्जिद-मंदिर विवादों का केंद्र न बनने पाए। मौलाना मदनी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने भी बाबरी मस्जिद मामले में निर्णय सुनाते हुए इस कानून को अनिवार्य बताया था। लेकिन अदालतें आज इसे नजरअंदाज कर फैसले दे रही हैं। हर गुजरते दिन के साथ कहीं न कहीं मस्जिद का विवाद खड़ा किया जा रहा है। फिर सच्चाई जानने के नाम पर न्यायालयों से सर्वेक्षण की अनुमति ली जाती है।
जिसके बाद सांप्रदायिक तायकें दो समुदायों के बीच दीवार बनाने का काम करती हैं। मौलाना मदनी ने कहा कि हम न्यायालय के फैसले का सम्मान करते हैं, लेकिन न्यायालयों को फैसला लेते समय यह जरूर देखना चाहिए कि देश और समाज पर इसके क्या प्रभाव पड़ेंगे। मौलाना महमूद ने कहा कि जामा मस्जिद की रक्षा के लिए जरुरत पड़ी तो जमीयत कानूनी कार्रवाई में मस्जिद कमेटी की पूरी मद्द करेगी।
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