Gonda : गोंडा में पेयजल परियोजना दो साल से अधर में, न सड़कें ठीक न गांवों तक पहुंचा पानी
ग्राम प्रधानों को भी परेशानी है। हलधरमऊ में बमडेरा के प्रधान प्रतिनिधि धीरेंद्र तिवारी बड़कऊ कहते हैं कि गांव में एक किलोमीटर सड़क खोदकर बदहाल कर दी गई। ग्रामीण रोज शिकायत करते हैं लेकि
गोंडा जिले में शुद्ध पेयजल पहुंचाने की बड़ी योजना अब बदहाली की मिसाल बन गई है। करोड़ों रुपये खर्च कर शुरू की गई इस परियोजना में इतनी कमियां हैं कि न तो सड़कों की मरम्मत पूरी हुई और न ही गांवों में पानी पहुंच पाया। दो साल बीत जाने के बाद भी ज्यादातर जगहों पर काम अधूरा पड़ा है। ग्रामीण आज भी हैंडपंप और पुराने स्रोतों पर निर्भर हैं। योजना के तहत गांव-गांव पानी की टंकियां बनाने और पाइपलाइन से पानी पहुंचाने का लक्ष्य था। जिले में करीब 145 टंकियां बनाने का दावा किया गया था। शुरू में काम तेजी से चला लेकिन कुछ महीनों बाद रुक गया। कई जगह टंकियों के ढांचे अधूरे खड़े हैं तो कहीं पाइपलाइन बिछाने के बाद सड़कें उखड़ी पड़ी हैं।
पाइपलाइन डालने के नाम पर सड़कों को खोद दिया गया लेकिन मरम्मत नहीं हुई। इससे ग्रामीणों को आने-जाने में परेशानी हो रही है। बरसात में कीचड़ और गड्ढों से हालात और खराब हो जाते हैं। ग्रामीण बताते हैं कि शुरू में अधिकारियों ने कहा था कि जल्द हर घर नल से पानी मिलेगा लेकिन अब तक पाइपलाइन पूरी नहीं हुई और टंकियों से सप्लाई शुरू नहीं हो पाई। कई निर्माण स्थल झाड़-झंखाड़ से भर गए हैं और टंकियों के आसपास गंदगी जमा है। सूत्रों के अनुसार बजट की कमी से भी काम प्रभावित हुआ। समय पर पैसा न मिलने से ठेकेदारों ने काम धीमा या बंद कर दिया। नतीजा यह हुआ कि करोड़ों की योजना लटक गई और ग्रामीणों को फायदा नहीं मिला। स्थानीय लोग कहते हैं कि जल्द काम पूरा न हुआ तो अब तक का निर्माण भी बर्बाद हो जाएगा। जिम्मेदार अधिकारी बताते हैं कि बजट मिलते ही काम तेज किया जाएगा।
ग्राम प्रधानों को भी परेशानी है। हलधरमऊ में बमडेरा के प्रधान प्रतिनिधि धीरेंद्र तिवारी बड़कऊ कहते हैं कि गांव में एक किलोमीटर सड़क खोदकर बदहाल कर दी गई। ग्रामीण रोज शिकायत करते हैं लेकिन मरम्मत के लिए पैसा कहां से लाएं। पंडरीकृपाल के भटवलिया के प्रधान विजय प्रकाश मिश्रा कहते हैं कि सड़कों की मरम्मत के लिए कोई अधिकारी सुनता नहीं। ठेकेदार मनमाने तरीके से काम कर चले जाते हैं। खैरा गांव के प्रधान सुरेश पाठक बताते हैं कि बनी टंकी झाड़-झंखाड़ से घिरी है। तत्कालीन डीएम नेहा शर्मा ने चौपाल में एक हफ्ते में चालू करने के निर्देश दिए थे लेकिन अब तक कोई सुधार नहीं हुआ। टंकियों को हैंडओवर का दबाव अलग से है। एक्सईएन जल निगम महेंद्र कुमार सिंह कहते हैं कि पिछले साल से बजट की कमी है। छह साल में सिर्फ 40 फीसदी धनराशि मिली जिससे कई काम ठप हो गए। अधूरे कामों की रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेजी गई है।
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