Hardoi : हरदोई की लोनी चीनी मिल में भारी मात्रा में अवैध शीरा बरामद, डीसीएम श्रीराम लिमिटेड के कार्यकारी निदेशक समेत तीन पर एफआईआर दर्ज

जिला आबकारी अधिकारी केपी सिंह ने अपनी टीम के साथ 16 मार्च को डीसीएम श्रीराम लिमिटेड की लोनी इकाई का औचक निरीक्षण किया था। इस निरीक्षण के दौरान वहां कई महत्वपूर्ण अधिकारी मौजूद थे, जिनमें गन्ना उत्पादक सहकारी समिति लिमिटेड हरदोई

Mar 21, 2026 - 19:17
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Hardoi : हरदोई की लोनी चीनी मिल में भारी मात्रा में अवैध शीरा बरामद, डीसीएम श्रीराम लिमिटेड के कार्यकारी निदेशक समेत तीन पर एफआईआर दर्ज
Hardoi : हरदोई की लोनी चीनी मिल में भारी मात्रा में अवैध शीरा बरामद, डीसीएम श्रीराम लिमिटेड के कार्यकारी निदेशक समेत तीन पर एफआईआर दर्ज

  • राजस्व चोरी की बड़ी साजिश का पर्दाफाश: अभिलेखों में हेरफेर कर छिपाया गया 1700 कुंतल शीरा, आबकारी विभाग की छापेमारी के बाद हड़कंप
  • उत्तर प्रदेश शीरा नियंत्रण अधिनियम के उल्लंघन में नपे बड़े अधिकारी, जिला आबकारी अधिकारी के औचक निरीक्षण में पकड़ी गई करोड़ों की अनियमितता

हरदोई जिले में स्थित शाहाबाद क्षेत्र की डीसीएम श्रीराम लिमिटेड शुगर यूनिट लोनी में शीरे के स्टॉक को लेकर एक बहुत ही गंभीर और बड़ी अनियमितता का मामला प्रकाश में आया है। जिला आबकारी विभाग द्वारा किए गए एक आकस्मिक निरीक्षण के दौरान मिल के स्टॉक रजिस्टरों और वहां मौजूद वास्तविक स्टॉक के बीच जमीन-आसमान का अंतर पाया गया। इस कार्रवाई ने चीनी मिल प्रबंधन के भीतर चल रही कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आबकारी विभाग की इस सतर्कता से यह स्पष्ट हो गया है कि मिल के भीतर नियमों को ताक पर रखकर भारी मात्रा में अतिरिक्त शीरे का भंडारण किया जा रहा था, जिसकी सूचना सरकारी अभिलेखों में दर्ज नहीं की गई थी। इस पूरे प्रकरण के सामने आने के बाद इलाके के औद्योगिक और प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है।

घटनाक्रम के अनुसार, जिला आबकारी अधिकारी केपी सिंह ने अपनी टीम के साथ 16 मार्च को डीसीएम श्रीराम लिमिटेड की लोनी इकाई का औचक निरीक्षण किया था। इस निरीक्षण के दौरान वहां कई महत्वपूर्ण अधिकारी मौजूद थे, जिनमें गन्ना उत्पादक सहकारी समिति लिमिटेड हरदोई के सचिव बृजभूषण शाक्य, उप आबकारी निरीक्षक सुशील कुमार और मिल के अधिकृत प्रतिनिधि दिव्येश तिवारी शामिल थे। जब टीम ने मिल के भीतर बने शीरा टैंकों की जांच शुरू की, तो प्रारंभिक तौर पर ही विसंगतियां दिखाई देने लगीं। अधिकारियों ने जब मिल के आधिकारिक दस्तावेजों की मिलान वहां मौजूद भौतिक स्टॉक से की, तो पाया गया कि मिल प्रबंधन ने उत्पादन की एक बड़ी मात्रा को सरकारी रिकॉर्ड से पूरी तरह गायब कर रखा था। यह निरीक्षण पूरी तरह से गोपनीय रखा गया था ताकि मिल प्रबंधन को साक्ष्य मिटाने का मौका न मिल सके।

तकनीकी जांच और भौतिक सत्यापन के दौरान जो आंकड़े सामने आए, वे चौंकाने वाले थे। मिल द्वारा वर्ष 2025-26 के पेराई सत्र के दौरान उत्पादित शीरे को दो विशाल टैंकों में संचित किया गया था। जब इन दोनों टैंकों की गहराई (डिप) ली गई और वैज्ञानिक पद्धति से गणना की गई, तो वहां कुल 2,25,952.27 कुंतल शीरा मौजूद पाया गया। इसके विपरीत, जब चीनी मिल के स्टॉक लेजर और अन्य वैधानिक अभिलेखों की जांच की गई, तो उनमें केवल 2,24,252.60 कुंतल शीरा ही दर्ज मिला। इस प्रकार, भौतिक सत्यापन में कुल 1699.67 कुंतल (लगभग 1700 कुंतल) शीरा सरकारी कागजों से अधिक पाया गया। इतनी बड़ी मात्रा में बिना रिकॉर्ड के शीरा मिलना किसी मानवीय त्रुटि का परिणाम नहीं, बल्कि एक सुनियोजित अनियमितता की ओर संकेत करता है। 

इस मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला आबकारी अधिकारी ने तत्काल कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की। मामले में डीसीएम श्रीराम लिमिटेड के कार्यकारी निदेशक रोशनलाल टामक, यूनिट हेड संजीव तोमर और शीरा प्रबंधक दिव्येश तिवारी को मुख्य रूप से जिम्मेदार माना गया है। इन तीनों अधिकारियों के खिलाफ संबंधित धाराओं में एफआईआर दर्ज कराई गई है। आबकारी विभाग का मानना है कि इन अधिकारियों ने मिलीभगत कर जानबूझकर चीनी मिल के अभिलेखों में दर्ज मात्रा से अधिक शीरा संचित किया था। यह कृत्य सीधे तौर पर उत्तर प्रदेश शीरा नियंत्रण अधिनियम की विभिन्न धाराओं का उल्लंघन है, जिसके तहत उत्पादित और निस्तारित शीरे की सटीक जानकारी समय-समय पर शीरा नियंत्रक को देना अनिवार्य होता है। 

जांच का केंद्र: हरियावां डिस्टलरी का कनेक्शन

जांच में यह तथ्य भी सामने आया है कि लोनी शुगर यूनिट से निकलने वाले शीरे को उसकी सहोदर इकाई, डीसीएम श्रीराम लिमिटेड हरियावां डिस्टलरी भेजा जाता है। इस डिस्टलरी में शीरे का उपयोग अल्कोहल और अंततः शराब बनाने के लिए किया जाता है। अधिकारियों को संदेह है कि इस अतिरिक्त 1700 कुंतल शीरे को चोरी-छिपे डिस्टलरी भेजकर उससे अवैध शराब का निर्माण किया जाना था। यदि यह स्टॉक पकड़ा न जाता, तो इससे निर्मित शराब को बाजार में खपाकर सरकार को मिलने वाले भारी-भरकम राजस्व को सीधे तौर पर चोट पहुंचाई जाती।

उत्तर प्रदेश शीरा नियंत्रण अधिनियम के तहत शीरे के उत्पादन, उसके रख-रखाव और निस्तारण के लिए अत्यंत कड़े नियम बनाए गए हैं। कानून के मुताबिक, चीनी मिल को हर बूंद का हिसाब रखना होता है क्योंकि शीरा एक नियंत्रित वस्तु है जिसका दुरुपयोग मादक पदार्थों के अवैध निर्माण में हो सकता है। मिल प्रबंधन की यह दोषपूर्ण मंशा इसलिए भी स्पष्ट होती है क्योंकि उन्होंने अतिरिक्त स्टॉक की सूचना जानबूझकर छिपाई थी। आबकारी विभाग के अनुसार, शीरे की मात्रा में इतना बड़ा अंतर दर्शाया जाना यह साबित करता है कि इसके माध्यम से न केवल आबकारी शुल्क की चोरी की योजना थी, बल्कि नियामक शुल्कों के भुगतान से बचने का भी प्रयास किया जा रहा था।

फिलहाल, शाहाबाद पुलिस ने आबकारी विभाग की तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज कर लिया है और पुलिस अधीक्षक अशोक कुमार मीणा के निर्देशन में मामले की गहराई से जांच शुरू कर दी गई है। पुलिस अब इस बात की पड़ताल कर रही है कि क्या इस तरह की अनियमितता पिछले सत्रों में भी की गई थी। डीसीएम श्रीराम समूह की अन्य इकाइयों, जैसे हरियावां और शाहाबाद की चीनी मिलों पर भी इस कार्रवाई का असर देखने को मिल सकता है। आने वाले दिनों में जांच का दायरा बढ़ सकता है और मिल के कुछ अन्य कर्मचारी या विभाग भी जांच की जद में आ सकते हैं। फिलहाल, सभी संबंधित दस्तावेजों को पुलिस और आबकारी विभाग ने अपने कब्जे में ले लिया है ताकि साक्ष्यों के साथ किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ न की जा सके। 

प्रशासनिक स्तर पर इस कार्रवाई को मुख्यमंत्री की 'जीरो टॉलरेंस' नीति के तहत देखा जा रहा है, जिसमें राजस्व की हानि करने वाले किसी भी संस्थान या व्यक्ति को रियायत न देने के निर्देश हैं। जिला आबकारी अधिकारी केपी सिंह ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में भी इस प्रकार के औचक निरीक्षण जारी रहेंगे ताकि चीनी मिलों और डिस्टलरी के बीच होने वाले शीरे के खेल को पूरी तरह समाप्त किया जा सके। इस बड़ी बरामदगी ने जिले के अन्य औद्योगिक समूहों के बीच भी चेतावनी का संदेश दिया है कि नियमों की अनदेखी और डेटा में हेरफेर भारी पड़ सकता है। वैधानिक प्रक्रिया के तहत अब आरोपियों को अपनी सफाई पेश करनी होगी, लेकिन प्राथमिक साक्ष्य उनके खिलाफ काफी मजबूत नजर आ रहे हैं।

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