Hardoi : हरदोई की लोनी चीनी मिल में भारी मात्रा में अवैध शीरा बरामद, डीसीएम श्रीराम लिमिटेड के कार्यकारी निदेशक समेत तीन पर एफआईआर दर्ज
जिला आबकारी अधिकारी केपी सिंह ने अपनी टीम के साथ 16 मार्च को डीसीएम श्रीराम लिमिटेड की लोनी इकाई का औचक निरीक्षण किया था। इस निरीक्षण के दौरान वहां कई महत्वपूर्ण अधिकारी मौजूद थे, जिनमें गन्ना उत्पादक सहकारी समिति लिमिटेड हरदोई
- राजस्व चोरी की बड़ी साजिश का पर्दाफाश: अभिलेखों में हेरफेर कर छिपाया गया 1700 कुंतल शीरा, आबकारी विभाग की छापेमारी के बाद हड़कंप
- उत्तर प्रदेश शीरा नियंत्रण अधिनियम के उल्लंघन में नपे बड़े अधिकारी, जिला आबकारी अधिकारी के औचक निरीक्षण में पकड़ी गई करोड़ों की अनियमितता
हरदोई जिले में स्थित शाहाबाद क्षेत्र की डीसीएम श्रीराम लिमिटेड शुगर यूनिट लोनी में शीरे के स्टॉक को लेकर एक बहुत ही गंभीर और बड़ी अनियमितता का मामला प्रकाश में आया है। जिला आबकारी विभाग द्वारा किए गए एक आकस्मिक निरीक्षण के दौरान मिल के स्टॉक रजिस्टरों और वहां मौजूद वास्तविक स्टॉक के बीच जमीन-आसमान का अंतर पाया गया। इस कार्रवाई ने चीनी मिल प्रबंधन के भीतर चल रही कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आबकारी विभाग की इस सतर्कता से यह स्पष्ट हो गया है कि मिल के भीतर नियमों को ताक पर रखकर भारी मात्रा में अतिरिक्त शीरे का भंडारण किया जा रहा था, जिसकी सूचना सरकारी अभिलेखों में दर्ज नहीं की गई थी। इस पूरे प्रकरण के सामने आने के बाद इलाके के औद्योगिक और प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है।
घटनाक्रम के अनुसार, जिला आबकारी अधिकारी केपी सिंह ने अपनी टीम के साथ 16 मार्च को डीसीएम श्रीराम लिमिटेड की लोनी इकाई का औचक निरीक्षण किया था। इस निरीक्षण के दौरान वहां कई महत्वपूर्ण अधिकारी मौजूद थे, जिनमें गन्ना उत्पादक सहकारी समिति लिमिटेड हरदोई के सचिव बृजभूषण शाक्य, उप आबकारी निरीक्षक सुशील कुमार और मिल के अधिकृत प्रतिनिधि दिव्येश तिवारी शामिल थे। जब टीम ने मिल के भीतर बने शीरा टैंकों की जांच शुरू की, तो प्रारंभिक तौर पर ही विसंगतियां दिखाई देने लगीं। अधिकारियों ने जब मिल के आधिकारिक दस्तावेजों की मिलान वहां मौजूद भौतिक स्टॉक से की, तो पाया गया कि मिल प्रबंधन ने उत्पादन की एक बड़ी मात्रा को सरकारी रिकॉर्ड से पूरी तरह गायब कर रखा था। यह निरीक्षण पूरी तरह से गोपनीय रखा गया था ताकि मिल प्रबंधन को साक्ष्य मिटाने का मौका न मिल सके।
जांच में यह तथ्य भी सामने आया है कि लोनी शुगर यूनिट से निकलने वाले शीरे को उसकी सहोदर इकाई, डीसीएम श्रीराम लिमिटेड हरियावां डिस्टलरी भेजा जाता है। इस डिस्टलरी में शीरे का उपयोग अल्कोहल और अंततः शराब बनाने के लिए किया जाता है। अधिकारियों को संदेह है कि इस अतिरिक्त 1700 कुंतल शीरे को चोरी-छिपे डिस्टलरी भेजकर उससे अवैध शराब का निर्माण किया जाना था। यदि यह स्टॉक पकड़ा न जाता, तो इससे निर्मित शराब को बाजार में खपाकर सरकार को मिलने वाले भारी-भरकम राजस्व को सीधे तौर पर चोट पहुंचाई जाती।
उत्तर प्रदेश शीरा नियंत्रण अधिनियम के तहत शीरे के उत्पादन, उसके रख-रखाव और निस्तारण के लिए अत्यंत कड़े नियम बनाए गए हैं। कानून के मुताबिक, चीनी मिल को हर बूंद का हिसाब रखना होता है क्योंकि शीरा एक नियंत्रित वस्तु है जिसका दुरुपयोग मादक पदार्थों के अवैध निर्माण में हो सकता है। मिल प्रबंधन की यह दोषपूर्ण मंशा इसलिए भी स्पष्ट होती है क्योंकि उन्होंने अतिरिक्त स्टॉक की सूचना जानबूझकर छिपाई थी। आबकारी विभाग के अनुसार, शीरे की मात्रा में इतना बड़ा अंतर दर्शाया जाना यह साबित करता है कि इसके माध्यम से न केवल आबकारी शुल्क की चोरी की योजना थी, बल्कि नियामक शुल्कों के भुगतान से बचने का भी प्रयास किया जा रहा था।
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