Sambhal : 'चूहे मार दवाई से नहीं मरते चूहे'… कविता के मंच से गूंजा व्यंग्य, गौरैया और साहित्य के नाम यादगार आयोजन

संस्था की अध्यक्ष डॉ. विजय लक्ष्मी शर्मा ने सरस्वती वंदना और भारत वंदना प्रस्तुत कर माहौल को भक्तिमय बना दिया। वहीं उप मंत्री पूजा शर्मा ने गौ सेवा की प्रक्रिया संपन्न कराई। कार्यक्रम में कविता

Mar 21, 2026 - 19:26
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Sambhal : 'चूहे मार दवाई से नहीं मरते चूहे'… कविता के मंच से गूंजा व्यंग्य, गौरैया और साहित्य के नाम यादगार आयोजन
Sambhal : 'चूहे मार दवाई से नहीं मरते चूहे'… कविता के मंच से गूंजा व्यंग्य, गौरैया और साहित्य के नाम यादगार आयोजन

Report : उवैस दानिश, सम्भल

विश्व कविता दिवस और विश्व गौरैया दिवस के अवसर पर अंतर्राष्ट्रीय साहित्य कला संगम की ओर से एक भव्य कवि सम्मेलन का आयोजन संस्था की महामंत्री पूनम शुक्ला के आवास पर किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत मां सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन और माल्यार्पण के साथ हुई, जिसमें समारोह अध्यक्ष सुभाष चंद्र शर्मा, मुख्य अतिथि शिव शंकर शर्मा और विशिष्ट अतिथि सुमंत शुक्ला मौजूद रहे।संस्था की अध्यक्ष डॉ. विजय लक्ष्मी शर्मा ने सरस्वती वंदना और भारत वंदना प्रस्तुत कर माहौल को भक्तिमय बना दिया। वहीं उप मंत्री पूजा शर्मा ने गौ सेवा की प्रक्रिया संपन्न कराई। कार्यक्रम में कविता और प्रकृति संरक्षण दोनों विषयों पर गंभीर चर्चा हुई। संस्थापक डॉ. डी.एन. शर्मा ने कहा कि कविता सदियों से जन-प्रेरणा का सशक्त माध्यम रही है और समाज में बदलाव लाने की ताकत रखती है। उन्होंने बताया कि संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा 21 मार्च को विश्व कविता दिवस घोषित किया गया है ताकि कविता और कवियों के योगदान को सम्मान मिल सके।मुख्य अतिथि शिव शंकर शर्मा ने विश्व गौरैया दिवस के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि पक्षियों के संरक्षण के लिए समाज में जागरूकता बढ़ाना जरूरी है। वहीं सुमंत शुक्ला ने लोगों से पक्षियों की सेवा और संरक्षण का संकल्प लेने की अपील की। काव्य गोष्ठी में कवियों ने अपनी रचनाओं से समां बांध दिया। व्यंग्य कवि अतुल कुमार शर्मा के संचालन में आयोजित कार्यक्रम में कवियों ने सामाजिक, पर्यावरणीय और मानवीय मुद्दों को अपनी कविताओं में पिरोया।

प्रख्यात कवि सुभाष चंद्र शर्मा ने भ्रष्टाचार पर तीखा प्रहार करते हुए कहा—

“नकली घी, दूध और दवा स्वास्थ्य को लाभ नहीं करते हैं,
चूहे मार दवाई खाकर, चूहे नहीं मरा करते हैं…”
इस व्यंग्यपूर्ण पंक्ति ने पूरे सभागार में तालियों की गूंज भर दी।

इसके अलावा पूनम शुक्ला, नवीन प्रकाश शर्मा, शिव शंकर शर्मा और अन्य कवियों ने भी अपनी रचनाओं से श्रोताओं को भाव-विभोर कर दिया। कार्यक्रम में पक्षियों के लिए जलपात्र रखने और पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया गया। अंत में संस्था के संरक्षक कमलकांत तिवारी ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में साहित्य प्रेमी और गणमान्य लोग उपस्थित रहे, जिससे आयोजन सफल और यादगार बन गया।

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