Trending: अहमदाबाद में वांटेड अपराधी अभिषेक उर्फ शूटर का हाई-वोल्टेज ड्रामा, पांचवीं मंजिल से कूदने की धमकी, कड़ी मशक्कत के बाद पुलिस ने दबोचा। 

गुजरात के अहमदाबाद के ओढ़व इलाके में एक सनसनीखेज घटना ने पूरे शहर का ध्यान खींचा। वांटेड अपराधी अभिषेक उर्फ शूटर संजयसिंह तोमर, जिसे कई...

Jun 8, 2025 - 15:23
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Trending: अहमदाबाद में वांटेड अपराधी अभिषेक उर्फ शूटर का हाई-वोल्टेज ड्रामा, पांचवीं मंजिल से कूदने की धमकी, कड़ी मशक्कत के बाद पुलिस ने दबोचा। 

7 जून 2025 को गुजरात के अहमदाबाद के ओढ़व इलाके में एक सनसनीखेज घटना ने पूरे शहर का ध्यान खींचा। वांटेड अपराधी अभिषेक उर्फ शूटर संजयसिंह तोमर, जिसे कई आपराधिक मामलों में तलाश थी, ने गिरफ्तारी से बचने के लिए हाई-वोल्टेज ड्रामा रचा। उसने न केवल पुलिस को खुली चुनौती दी, बल्कि एक बहुमंजिला इमारत की पांचवीं मंजिल पर चढ़कर सोशल मीडिया पर लाइव वीडियो शुरू किया और आत्महत्या की धमकी दी। तीन घंटे तक चले इस तनावपूर्ण ड्रामे के बाद, अहमदाबाद क्राइम ब्रांच और फायर ब्रिगेड की संयुक्त कार्रवाई से उसे सुरक्षित हिरासत में लिया गया। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसने न केवल पुलिस की मुस्तैदी को उजागर किया, बल्कि अपराधियों की नई रणनीतियों पर भी सवाल उठाए।

7 जून 2025 की सुबह, अहमदाबाद क्राइम ब्रांच को सूचना मिली कि कई आपराधिक मामलों में वांटेड अभिषेक उर्फ शूटर संजयसिंह तोमर (25) ओढ़व इलाके के शिवम आवास योजना में फ्लैट नंबर 505, बिल्डिंग X में छिपा हुआ है। क्राइम ब्रांच की एक टीम तुरंत मौके पर पहुंची। जब पुलिस ने फ्लैट का दरवाजा खटखटाया, तो अभिषेक ने अंदर से दरवाजा लॉक कर लिया और खोलने से इनकार कर दिया। पुलिस के बार-बार आदेश के बावजूद उसने कोई जवाब नहीं दिया। अंततः, क्राइम ब्रांच की टीम ने दरवाजा तोड़कर अंदर प्रवेश किया।

अंदर पहुंचने पर पुलिस को पता चला कि अभिषेक रसोई के पास की बालकनी के किनारे पर चढ़ गया था। उसने वहां से पांचवीं मंजिल की छत पर पहुंचकर पुलिस को चुनौती दी और सोशल मीडिया पर लाइव स्ट्रीमिंग शुरू कर दी। लाइव वीडियो में वह बार-बार कह रहा था, "मुझे पता है तुम मेरे साथ क्या करोगे। तुम्हारा व्यवहार बहुत खराब होगा। मैं तुम्हारे सामने सरेंडर करने के बजाय मरना पसंद करूंगा।" उसने धमकी दी कि अगर पुलिस ने उसे पकड़ने की कोशिश की, तो वह नीचे कूद जाएगा। इस दौरान, नीचे सैकड़ों लोगों की भीड़ जमा हो गई, और इलाके में तनाव का माहौल बन गया।

पुलिस ने तुरंत फायर ब्रिगेड और आपातकालीन सेवाओं को सूचित किया। फायर ब्रिगेड की एक टीम मौके पर पहुंची और अभिषेक को सुरक्षित नीचे लाने की कोशिश शुरू की। इस बीच, क्राइम ब्रांच के अधिकारी उससे बातचीत कर उसे शांत करने की कोशिश कर रहे थे। एक पुलिस अधिकारी द्वारा रिकॉर्ड किए गए वीडियो में अभिषेक को यह कहते सुना गया, "मुझे भरोसा दो कि मेरे साथ निष्पक्ष व्यवहार होगा।" पुलिस ने उसे आश्वासन दिया कि उसकी सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी, लेकिन वह अपनी जिद पर अड़ा रहा।

लगभग तीन घंटे की तनावपूर्ण बातचीत और सावधानीपूर्वक रणनीति के बाद, फायर ब्रिगेड और पुलिस ने मिलकर अभिषेक को किनारे से हटाया और उसे हिरासत में ले लिया। उसे तुरंत ओढ़व पुलिस स्टेशन ले जाया गया, जहां आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू की गई। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ, और कई न्यूज चैनलों, जैसे @ABPNews और @NavbharatTimes, ने इसे अपने एक्स हैंडल पर साझा किया। @ABPNews ने लिखा, "अहमदाबाद के ओढ़व इलाके में वांटेड अपराधी अभिषेक उर्फ शूटर का हाईवोल्टेज ड्रामा देखने को मिला।"

अभिषेक उर्फ शूटर का आपराधिक इतिहास

अभिषेक उर्फ शूटर संजयसिंह तोमर का आपराधिक इतिहास लंबा और गंभीर है। वह अहमदाबाद के पूर्वी हिस्से की कई पुलिस स्टेशनों, विशेष रूप से कृष्णानगर और निकोल, में दर्ज तीन सक्रिय FIRs में वांटेड था। इन मामलों में भारतीय दंड संहिता (IPC) की धाराओं 365 (अपहरण), 325 और 324 (गंभीर चोट), 294B (अश्लील कृत्य), 114 (साझा मंशा), 323 (स्वेच्छा से चोट पहुंचाना), 506(2) (आपराधिक धमकी), और गुजरात पुलिस अधिनियम की धारा 135(1) के तहत आरोप शामिल हैं। इसके अलावा, निकोल पुलिस स्टेशन में दर्ज एक FIR में IPC 115(2) के तहत गंभीर अपराध करने का प्रयास भी शामिल है।

क्राइम ब्रांच के अनुसार, अभिषेक पहले भी कई शारीरिक अपराधों में शामिल रहा है और सोशल मीडिया पर हथियारों के साथ वीडियो पोस्ट कर चुका है। उसका उपनाम "शूटर" उसके हिंसक स्वभाव और हथियारों के प्रति रुझान को दर्शाता है। वह कई महीनों से फरार था, और क्राइम ब्रांच उसकी गतिविधियों पर नजर रख रही थी। इस घटना से पहले, वह शिवम आवास में छिपा हुआ था, जहां वह अपने एक रिश्तेदार के फ्लैट में रह रहा था।

इस घटना में अहमदाबाद क्राइम ब्रांच और फायर ब्रिगेड की त्वरित और समन्वित कार्रवाई ने स्थिति को और बिगड़ने से रोका। क्राइम ब्रांच के डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस, अजीत राजियन, ने कहा, "अभिषेक उर्फ शूटर संजयसिंह तोमर कई अपराधों में वांटेड था। हमने उसे सुरक्षित हिरासत में ले लिया है, और आगे की जांच जारी है।"

फायर ब्रिगेड की टीम ने अभिषेक को किनारे से हटाने के लिए विशेष उपकरणों और तकनीकों का इस्तेमाल किया। ओढ़व पुलिस स्टेशन के इंस्पेक्टर जिन्जुवाडिया ने बताया कि अभिषेक एक अपहरण के मामले में कृष्णानगर पुलिस स्टेशन में वांटेड था। इस घटना ने पुलिस की संकट प्रबंधन क्षमता को भी प्रदर्शित किया, क्योंकि उन्होंने न केवल अभिषेक को सुरक्षित पकड़ा, बल्कि भीड़ को नियंत्रित करने में भी सफलता हासिल की।

अभिषेक द्वारा लाइव स्ट्रीमिंग शुरू करने ने इस घटना को तुरंत सुर्खियों में ला दिया। सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो ने न केवल लोगों का ध्यान खींचा, बल्कि अपराधियों द्वारा डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के दुरुपयोग पर भी सवाल उठाए। @NavbharatTimes ने इसे "शोले स्टाइल ड्रामा" करार दिया, जिसमें अभिषेक की हरकतों को 1975 की बॉलीवुड फिल्म 'शोले' के मशहूर दृश्य से जोड़ा गया।

सोशल मीडिया यूजर्स ने इस घटना पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं दीं। कुछ ने पुलिस की तारीफ की, तो कुछ ने अभिषेक की हिम्मत और ड्रामे को मजाक का विषय बनाया। @VistaarNews ने लिखा, "क्राइम ब्रांच को अभिषेक उर्फ शूटर AK 47 को पकड़ने में कड़ी मशक्कत करनी पड़ी।" यह घटना सोशल मीडिया की ताकत को दर्शाती है, जो किसी भी घटना को तुरंत राष्ट्रीय स्तर पर ले जा सकती है।

यह घटना कई महत्वपूर्ण सवाल उठाती है। सबसे पहले, यह अपराधियों द्वारा गिरफ्तारी से बचने के लिए अपनाई जाने वाली नई रणनीतियों को उजागर करती है। लाइव स्ट्रीमिंग का इस्तेमाल न केवल पुलिस पर दबाव बनाने के लिए किया गया, बल्कि यह जनता में सहानुभूति या समर्थन हासिल करने की कोशिश भी हो सकती है। यह डिजिटल युग में अपराध और कानून प्रवर्तन के बीच बदलते समीकरण को दर्शाता है।

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अहमदाबाद के ओढ़व में अभिषेक उर्फ शूटर का हाई-वोल्टेज ड्रामा एक ऐसी घटना है, जो अपराध, पुलिस कार्रवाई, और सोशल मीडिया की ताकत को एक साथ जोड़ती है। तीन घंटे तक चले इस तनावपूर्ण स्टैंडऑफ ने न केवल अहमदाबाद क्राइम ब्रांच की मुस्तैदी को दिखाया, बल्कि अपराधियों की नई रणनीतियों को भी उजागर किया। अभिषेक का लाइव स्ट्रीमिंग और आत्महत्या की धमकी देना यह दर्शाता है कि डिजिटल युग में अपराधी न केवल पुलिस, बल्कि जनता को भी प्रभावित करने की कोशिश करते हैं।

दूसरा, यह घटना शहरी क्षेत्रों में सुरक्षा और निगरानी की आवश्यकता को रेखांकित करती है। ओढ़व जैसे घनी आबादी वाले इलाकों में अपराधी आसानी से छिप सकते हैं, और पुलिस को उनकी तलाश में तकनीकी और मानवीय संसाधनों का सहारा लेना पड़ता है। इस घटना ने सीसीटीवी कैमरों और इंटेलिजेंस-आधारित पुलिसिंग की महत्वपूर्ण भूमिका को भी सामने लाया।

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