कनाडा में भारतीय मूल के युवक की सरेआम गोली मारकर हत्या: विदेशी धरती पर फिर लहूलुहान हुआ पंजाबी भाईचारा।
कनाडा के ब्रिटिश कोलंबिया प्रांत से एक बार फिर दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है, जहां भारतीय मूल के एक युवक की अज्ञात हमलावरों ने
- गैंगवार की आशंका से थर्राया वैंकूवर का इलाका: पुलिस ने शुरू की हमलावरों की तलाश, टारगेट किलिंग की ओर इशारा कर रहे हैं शुरुआती सबूत
- कनाडा में बढ़ती हिंसक घटनाओं ने बढ़ाई भारत की चिंता: सरे और आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा घेरा सख्त, संदिग्धों की धरपकड़ के लिए विशेष अभियान शुरू
कनाडा के ब्रिटिश कोलंबिया प्रांत से एक बार फिर दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है, जहां भारतीय मूल के एक युवक की अज्ञात हमलावरों ने अंधाधुंध गोलियां बरसाकर हत्या कर दी। यह घटना वैंकूवर के व्यस्त व्यावसायिक इलाके के पास हुई, जिसने स्थानीय प्रवासी भारतीय समुदाय के बीच गहरा डर पैदा कर दिया है। जैसे ही गोलियों की आवाज गूंजी, चारों तरफ अफरा-तफरी मच गई और लोग अपनी जान बचाने के लिए सुरक्षित स्थानों की ओर भागने लगे। पुलिस दल जब तक मौके पर पहुंचा, तब तक हमलावर अपनी तेज रफ्तार गाड़ी से फरार हो चुके थे। प्रारंभिक जांच में यह पाया गया है कि युवक को बेहद करीब से निशाना बनाया गया था, जिससे घटनास्थल पर ही उसकी मृत्यु हो गई। स्थानीय सुरक्षा एजेंसियों ने पूरे इलाके की घेराबंदी कर दी है और फोरेंसिक विशेषज्ञों की टीम साक्ष्य जुटाने में लग गई है।
कनाडाई पुलिस प्रशासन को इस जघन्य हत्याकांड के पीछे संगठित आपराधिक गिरोहों के आपसी विवाद का गहरा संदेह है। पिछले कुछ वर्षों में कनाडा के विभिन्न शहरों, विशेषकर सरे और एबॉट्सफ़ोर्ड में भारतीय मूल के युवाओं के बीच गैंगवार की घटनाएं तेजी से बढ़ी हैं। जांच अधिकारियों का मानना है कि यह हमला किसी पुराने विवाद या वर्चस्व की लड़ाई का परिणाम हो सकता है। हमलावरों ने जिस पेशेवर तरीके से वारदात को अंजाम दिया, उससे यह स्पष्ट होता है कि वे युवक की गतिविधियों पर पिछले काफी समय से नजर रख रहे थे। पुलिस वर्तमान में आसपास के सभी सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रही है ताकि हमलावरों के भागने के मार्ग और उनके द्वारा इस्तेमाल किए गए वाहन की पहचान की जा सके। यह घटना उस समय हुई है जब कनाडा में गन कल्चर और अवैध हथियारों की तस्करी को लेकर पहले से ही काफी बहस चल रही है।
मृतक युवक की पहचान को लेकर फिलहाल पुलिस ने गोपनीयता बनाए रखी है, लेकिन सूत्रों के अनुसार वह पंजाब के एक छोटे से जिले से कुछ साल पहले ही उज्जवल भविष्य की तलाश में कनाडा आया था। इस घटना के बाद मृतक के परिवार में मातम पसरा हुआ है और भारत में रहने वाले उसके परिजनों ने भारत सरकार से मामले में हस्तक्षेप करने की गुहार लगाई है। कनाडा में भारतीय मूल के लोगों की सुरक्षा अब एक गंभीर विषय बन गई है, क्योंकि पिछले कुछ महीनों में ऐसी कई घटनाएं हुई हैं जिनमें पंजाब और हरियाणा से ताल्लुक रखने वाले युवकों को निशाना बनाया गया है। पुलिस ने चेतावनी दी है कि जनता इस समय सावधानी बरते और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत अधिकारियों को दे। यह हत्याकांड केवल एक व्यक्ति की मौत नहीं है, बल्कि यह उन हजारों परिवारों के सपनों पर भी प्रहार है जो अपने बच्चों को बेहतर जीवन के लिए विदेश भेजते हैं।
कनाडा में गहराता गैंगवार
हालिया आंकड़ों के अनुसार, कनाडा में सक्रिय गिरोहों के बीच हिंसक झड़पें 30 प्रतिशत तक बढ़ गई हैं। इनमें ड्रग तस्करी, फिरौती और अवैध संपत्ति पर कब्जे को लेकर आपसी रंजिश मुख्य कारण बनकर उभरे हैं। कनाडाई सुरक्षा एजेंसियां अब इन गिरोहों के अंतरराष्ट्रीय संपर्कों की भी जांच कर रही हैं। यह देखा गया है कि सोशल मीडिया के माध्यम से युवाओं को इन गिरोहों में भर्ती किया जाता है और फिर उन्हें खतरनाक वारदातों के लिए इस्तेमाल किया जाता है। प्रशासन अब डिजिटल फुटप्रिंट्स के जरिए इन नेटवर्क को ध्वस्त करने की योजना बना रहा है।
वारदात वाली जगह पर रहने वाले लोगों के बीच दहशत का माहौल इतना अधिक है कि शाम होते ही सड़कों पर सन्नाटा पसर जाता है। स्थानीय निवासियों का मानना है कि पुलिस की गश्त और सुरक्षा व्यवस्था में ढिलाई के कारण अपराधियों के हौसले बुलंद हो रहे हैं। इलाके में कई भारतीय स्टोर और रेस्तरां हैं, जिनके मालिक अपनी सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। पुलिस ने इस मामले की गुत्थी सुलझाने के लिए एक 'स्पेशल टास्क फोर्स' का गठन किया है, जो केवल गैंगवार से जुड़े मामलों की ही निगरानी करेगी। पुलिस ने जनता से अपील की है कि वे किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान न दें और जांच प्रक्रिया में सहयोग करें। इस तरह की घटनाओं से न केवल सार्वजनिक सुरक्षा को खतरा पैदा होता है, बल्कि व्यापारिक गतिविधियों पर भी बहुत प्रतिकूल असर पड़ता है।
घटना के कुछ घंटों बाद ही पुलिस को घटनास्थल से कुछ दूरी पर एक जली हुई कार बरामद हुई है। जांचकर्ताओं को संदेह है कि हमलावरों ने पहचान छुपाने और सुबूत मिटाने के उद्देश्य से वारदात के बाद गाड़ी को आग के हवाले कर दिया। कनाडा में अपराधियों द्वारा यह एक सामान्य तरीका अपनाया जाता है ताकि फोरेंसिक टीम को किसी भी प्रकार का डीएनए या फिंगरप्रिंट न मिल सके। कार के चेसिस नंबर और अन्य तकनीकी विवरणों के जरिए उसके असली मालिक तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है। पुलिस यह भी पता लगा रही है कि क्या यह कार हाल ही में कहीं से चोरी की गई थी। इस नए सुबूत ने जांच की दिशा को और अधिक गंभीर बना दिया है, क्योंकि इससे यह पक्का होता है कि यह एक सोची-समझी साजिश थी न कि कोई आकस्मिक विवाद।
भारतीय उच्चायोग भी इस पूरे मामले पर अपनी पैनी नजर बनाए हुए है और कनाडाई विदेश मंत्रालय के संपर्क में है। भारत सरकार ने बार-बार कनाडा सरकार से वहां रहने वाले भारतीय नागरिकों और छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का आग्रह किया है। इस हत्याकांड के बाद दोनों देशों के बीच राजनयिक स्तर पर भी चर्चा होने की संभावना है, क्योंकि हिंसक घटनाओं का ग्राफ लगातार ऊपर जा रहा है। कनाडा में कानून-व्यवस्था की बिगड़ती स्थिति वहां रह रहे भारतीय समुदाय के मानसिक स्वास्थ्य और सामाजिक स्थिरता को प्रभावित कर रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक जमीनी स्तर पर अपराधियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई नहीं की जाती और उनके आर्थिक स्रोतों को बंद नहीं किया जाता, तब तक ऐसी हिंसक गतिविधियों पर अंकुश लगाना नामुमकिन होगा।
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