एलपीजी सिलेंडर कीमतों में बड़ा बदलाव: 1 अप्रैल से कमर्शियल गैस हुई महंगी, जानें घरेलू ग्राहकों के लिए क्या हैं नए नियम।
वित्तीय वर्ष 2026-27 की शुरुआत होते ही रसोई गैस (LPG) से जुड़ी नई दरों और नियमों ने देशभर में हलचल पैदा कर दी है। 1 अप्रैल 2026 की सुबह
- अंतरराष्ट्रीय तेल संकट का असर: 195 रुपये से ज्यादा बढ़े कमर्शियल सिलेंडर के दाम, रेस्टोरेंट और होटल संचालकों की बढ़ी मुश्किलें
- उज्ज्वला योजना और केवाईसी अपडेट पर बड़ी खबर: रिफिल बुकिंग के समय में बदलाव और सुरक्षा जमा राशि को लेकर नई गाइडलाइंस जारी
वित्तीय वर्ष 2026-27 की शुरुआत होते ही रसोई गैस (LPG) से जुड़ी नई दरों और नियमों ने देशभर में हलचल पैदा कर दी है। 1 अप्रैल 2026 की सुबह तेल विपणन कंपनियों (OMCs) ने गैस सिलेंडर की कीमतों में भारी संशोधन की घोषणा की, जिसका सीधा प्रभाव व्यापारिक क्षेत्र पर पड़ा है। पिछले एक महीने से वैश्विक ऊर्जा बाजार में जारी अस्थिरता और पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की आपूर्ति श्रृंखला बाधित हुई है। इसी का परिणाम है कि कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में इस साल की अब तक की सबसे बड़ी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। हालांकि, सरकार ने आम आदमी को राहत देते हुए घरेलू रसोई गैस की कीमतों को फिलहाल स्थिर रखा है, लेकिन व्यावसायिक गैस की बढ़ती कीमतों से बाजार में महंगाई बढ़ने का अंदेशा गहरा गया है।
कमर्शियल एलपीजी यानी 19 किलोग्राम वाले नीले सिलेंडर की कीमतों में 1 अप्रैल से प्रति सिलेंडर 195.50 रुपये से लेकर 218 रुपये तक का इजाफा किया गया है। दिल्ली में अब एक कमर्शियल सिलेंडर की कीमत 2,078.50 रुपये हो गई है, जबकि कोलकाता में यह 2,208 रुपये के स्तर को पार कर गई है। मुंबई और चेन्नई जैसे महानगरों में भी इसी तरह की बढ़ोतरी देखी गई है। इस बदलाव का सबसे ज्यादा असर होटल, रेस्टोरेंट, ढाबा संचालकों और छोटे हलवाइयों पर पड़ेगा, जिनके लिए ईंधन की लागत में अचानक इतनी बड़ी वृद्धि उनके मासिक बजट को बिगाड़ सकती है। जानकारों का मानना है कि यदि कीमतें इसी तरह बढ़ती रहीं, तो आने वाले हफ्तों में बाहर खाना खाना और कैटरिंग सेवाएं काफी महंगी हो सकती हैं।
घरेलू उपभोक्ताओं (14.2 किलोग्राम सिलेंडर) के लिए राहत की बात यह है कि उनकी कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। दिल्ली में घरेलू सिलेंडर अभी भी 913 रुपये की अपनी पुरानी दर पर ही उपलब्ध है। हालांकि, पिछले महीने यानी मार्च में घरेलू सिलेंडर की कीमतों में करीब 60 रुपये की बढ़ोतरी की गई थी, जिसके बाद से मध्यम वर्गीय परिवारों की निगाहें इस बार की समीक्षा पर टिकी थीं। कीमतों के अलावा, पिछले एक महीने में घरेलू गैस के वितरण नियमों में भी कुछ तकनीकी बदलाव किए गए हैं। अब डिलीवरी के समय 'डिलीवरी ऑथेंटिकेशन कोड' (DAC) की प्रक्रिया को और अधिक अनिवार्य बना दिया गया है। इससे गैस की कालाबाजारी पर रोक लगाने और यह सुनिश्चित करने में मदद मिल रही है कि सिलेंडर केवल पंजीकृत उपभोक्ता तक ही पहुंचे।
उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों के लिए नई समय सीमा
प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY) के तहत मुफ्त गैस कनेक्शन लेने वाले परिवारों के लिए रिफिल बुकिंग के नियमों में कुछ बदलाव की खबरें चर्चा में रही हैं। कुछ क्षेत्रों में आपूर्ति को सुव्यवस्थित करने के लिए एक रिफिल और दूसरे रिफिल के बीच न्यूनतम 15 से 35 दिनों का अंतराल रखने की बात कही जा रही है। हालांकि यह नियम स्थानीय मांग और आपूर्ति की स्थिति पर निर्भर करता है, लेकिन लाभार्थियों को सलाह दी गई है कि वे अपने गैस डिस्ट्रीब्यूटर से संपर्क कर अपनी पात्रता और बुकिंग के अंतराल की पुष्टि जरूर कर लें ताकि समय पर सिलेंडर प्राप्त हो सके।
एलपीजी केवाईसी (KYC) को लेकर भी पिछले महीने काफी गहमागहमी रही है। तेल कंपनियों ने स्पष्ट किया है कि जिन उपभोक्ताओं ने लंबे समय से अपने आधार और पते का सत्यापन नहीं कराया है, उन्हें सब्सिडी प्राप्त करने में परेशानी हो सकती है। केवाईसी अपडेट करने की प्रक्रिया को अब पूरी तरह डिजिटल कर दिया गया है, जिससे लोग घर बैठे मोबाइल ऐप के जरिए अपनी जानकारी अपडेट कर सकते हैं। इसके साथ ही, 'वन हाउसहोल्ड, वन कनेक्शन' की नीति को भी सख्ती से लागू किया जा रहा है। यदि एक ही पते पर एक से अधिक गैस कनेक्शन पाए जाते हैं, तो उनमें से केवल एक को ही वैध माना जाएगा और अन्य को सरेंडर करना अनिवार्य होगा। इस कदम का उद्देश्य गैस सब्सिडी के दुरुपयोग को रोकना है।
नए गैस कनेक्शन के लिए दी जाने वाली सुरक्षा जमा राशि (Security Deposit) के नियमों में भी इस वित्तीय वर्ष से कुछ बदलाव देखने को मिल सकते हैं। 14.2 किलोग्राम के नए कनेक्शन के लिए अब सिलेंडर डिपॉजिट के रूप में 2,200 रुपये (पूर्वोत्तर राज्यों में 2,000 रुपये) और रेगुलेटर के लिए 250 रुपये जमा करने होंगे। जो लोग पीएनजी (PNG) पाइपलाइन की ओर शिफ्ट हो रहे हैं, उनके लिए पुराने एलपीजी कनेक्शन को सरेंडर करने की प्रक्रिया को और अधिक सरल बनाया गया है। सरकार का दीर्घकालिक लक्ष्य शहरी क्षेत्रों में एलपीजी की निर्भरता कम करके पाइप वाली प्राकृतिक गैस को बढ़ावा देना है, जिससे ऊर्जा वितरण की लागत को कम किया जा सके और पर्यावरण को भी लाभ पहुंचे।
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