आरबीआई की क्रांतिकारी पहल: अब मोबाइल नंबर की तरह बदल सकेंगे अपना बैंक, अकाउंट पोर्टेबिलिटी पर तेजी से चल रहा है काम।

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) देश की बैंकिंग प्रणाली को अधिक उपभोक्ता-केंद्रित और लचीला बनाने के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाने की तैयारी कर

Apr 1, 2026 - 12:29
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आरबीआई की क्रांतिकारी पहल: अब मोबाइल नंबर की तरह बदल सकेंगे अपना बैंक, अकाउंट पोर्टेबिलिटी पर तेजी से चल रहा है काम।
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  • पेमेंट्स विजन 2028 के तहत बैंकिंग सेवाओं में होगा बड़ा बदलाव: अकाउंट नंबर बदले बिना एक से दूसरे बैंक में जा सकेंगे ग्राहक
  • डिजिटल बैंकिंग का नया अध्याय: पेमेंट स्विचिंग सर्विस (PaSS) के जरिए ईएमआई और एसआईपी का माइग्रेशन होगा और भी आसान

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) देश की बैंकिंग प्रणाली को अधिक उपभोक्ता-केंद्रित और लचीला बनाने के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाने की तैयारी कर रहा है। मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी (MNP) की अपार सफलता के बाद, अब केंद्रीय बैंक 'बैंक अकाउंट पोर्टेबिलिटी' की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। आरबीआई के 'पेमेंट्स विजन 2028' (Payments Vision 2028) दस्तावेज में इस योजना का खाका तैयार किया गया है, जिसका मुख्य उद्देश्य ग्राहकों को बैंकों के एकाधिकार से मुक्ति दिलाना है। इस नई व्यवस्था के लागू होने के बाद, यदि कोई ग्राहक अपने मौजूदा बैंक की सेवाओं से असंतुष्ट है, तो वह अपना बैंक खाता नंबर बदले बिना ही किसी दूसरे बैंक में स्विच कर सकेगा। यह पहल न केवल बैंकिंग क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देगी, बल्कि बैंकों को अपनी सेवा की गुणवत्ता सुधारने के लिए भी मजबूर करेगी, क्योंकि अब ग्राहकों के पास बिना किसी जटिल कागजी कार्रवाई के बैंक बदलने का विकल्प होगा।

बैंक अकाउंट पोर्टेबिलिटी की अवधारणा को अमली जामा पहनाने के लिए आरबीआई 'पेमेंट्स स्विचिंग सर्विस' (PaSS) नामक एक केंद्रीकृत प्रणाली विकसित करने की योजना बना रहा है। वर्तमान में, बैंक बदलने की प्रक्रिया अत्यंत जटिल है क्योंकि एक बचत खाते के साथ कई तरह के 'स्टैंडिंग इंस्ट्रक्शंस' जैसे ईएमआई, एसआईपी, और बिजली-पानी के बिलों के ऑटो-डेबिट जुड़े होते हैं। नया बैंक खाता खोलने पर इन सभी निर्देशों को दोबारा सेट करना पड़ता है, जो ग्राहकों के लिए एक बड़ा प्रशासनिक बोझ होता है। 'PaSS' प्लेटफॉर्म इन सभी भुगतानों और मैंडेट्स को एक केंद्रीय हब पर ले आएगा। जब कोई ग्राहक अपना बैंक पोर्ट करेगा, तो यह सिस्टम स्वचालित रूप से उसके सभी पुराने मैंडेट्स को नए बैंक खाते से जोड़ देगा, जिससे उसकी वित्तीय गतिविधियों में कोई रुकावट नहीं आएगी।

आरबीआई का मानना है कि बचत खाते वर्तमान में अपनी 'स्टिकिनेस' (Stickiness) के कारण ग्राहकों को बांधे रखते हैं। यानी, लोग चाहकर भी बैंक नहीं बदल पाते क्योंकि उन्हें अपना पुराना अकाउंट नंबर, जिसे उन्होंने हर जगह (जैसे आधार, पैन, और ऑफिस रिकॉर्ड्स) दे रखा है, खोने का डर रहता है। प्रस्तावित योजना के तहत, आपका बैंक अकाउंट नंबर एक 'यूनिवर्सल फाइनेंशियल आईडी' की तरह काम करेगा, जो किसी एक विशेष बैंक की संपत्ति नहीं होगा। जैसे ही आप पोर्टेबिलिटी का अनुरोध करेंगे, नया बैंक आपके इसी पुराने नंबर को अपने सिस्टम में सक्रिय कर देगा। हालांकि, बैंक की शाखा के आधार पर आईएफएससी (IFSC) कोड बदल सकता है, लेकिन आपकी मुख्य पहचान यानी अकाउंट नंबर वही रहेगा, जिससे आपको विभिन्न सरकारी योजनाओं और सब्सिडी के रिकॉर्ड अपडेट करने की चिंता नहीं रहेगी।

क्या होगा क्रेडिट हिस्ट्री और लोन का?

बैंक अकाउंट पोर्ट करने की स्थिति में आपकी क्रेडिट हिस्ट्री और चल रहे लोन का विवरण भी सुरक्षित रूप से नए बैंक में स्थानांतरित किया जा सकेगा। 'पेमेंट्स विजन 2028' के अनुसार, आरबीआई एक ऐसा इकोसिस्टम बनाना चाहता है जहां ग्राहक का डेटा पूरी तरह से उसके नियंत्रण में हो। यदि आपका किसी बैंक के साथ पुराना संबंध है और आप उसे पोर्ट करते हैं, तो आपकी बैंकिंग प्रोफाइल और सिबिल (CIBIL) स्कोर पर इसका कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा। यह प्रक्रिया पूरी तरह से पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए कड़े सुरक्षा मानकों और प्राधिकरण प्रोटोकॉल का पालन किया जाएगा।

इस योजना के पीछे आरबीआई का एक बड़ा उद्देश्य क्रॉस-बॉर्डर पेमेंट्स (सीमा पार भुगतान) को भी सरल बनाना है। जब बैंक खाते पोर्टेबल होंगे और डेटा मानकीकृत होगा, तो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फंड ट्रांसफर करना और डिजिटल मुद्रा (CBDC) का उपयोग करना बहुत आसान हो जाएगा। 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी होने वाले कई अन्य बैंकिंग सुधारों के साथ, अकाउंट पोर्टेबिलिटी का यह विचार भारत को ग्लोबल फिनटेक लीडर के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। जी-20 के वैश्विक मानकों के अनुरूप भारतीय प्रणालियों को ढालने की कोशिश की जा रही है ताकि भारत के डिजिटल भुगतान तंत्र को पूरी दुनिया में मान्यता और सुलभता मिल सके।

वित्तीय समावेशन के दृष्टिकोण से भी यह नियम अत्यंत महत्वपूर्ण है। ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले लोग, जो अक्सर बैंकों की खराब सेवाओं या ऊंचे शुल्कों से परेशान रहते हैं, अब बिना किसी हिचकिचाहट के बेहतर सेवा देने वाले बैंकों का चुनाव कर सकेंगे। आरबीआई ने दिसंबर 2025 के अपने दिशा-निर्देशों में पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि बेसिक सेविंग्स बैंक डिपॉजिट (BSBD) खातों के लिए भी मोबाइल और इंटरनेट बैंकिंग अनिवार्य होगी। अब पोर्टेबिलिटी सुविधा जुड़ जाने से बैंकिंग क्षेत्र में एक बड़ा लोकतांत्रिक बदलाव आएगा, जहां ग्राहक की पसंद ही सर्वोपरि होगी। बैंकों को अब ग्राहकों को अपने पास बनाए रखने के लिए न केवल प्रतिस्पर्धी ब्याज दरें देनी होंगी, बल्कि डिजिटल सेवाओं के मामले में भी खुद को अपडेट रखना होगा।

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