Lakhimpur- Kheri : सरकारी केंद्रों पर बोरे न मिलने से गेहूं खरीद ठप, बिचौलियों को औने-पौने दाम पर फसल बेचने को मजबूर किसान
कफारा और धौरहरा क्षेत्र के दर्जनों किसानों का आरोप है कि वे कई दिनों से ट्रैक्टर-ट्रॉली में गेहूं लादकर केंद्रों के चक्कर काट रहे हैं। बोरे न होने से उनकी लागत बढ़ रही है और समय भी बर्बाद हो रहा है। खुले आसमान के नीचे अनाज रखे होने के
लखीमपुर खीरी की धौरहरा तहसील में सरकारी गेहूं खरीद की व्यवस्था पूरी तरह बेपटरी हो गई है। क्षेत्र में कहने को तो 14 खरीद केंद्र बनाए गए हैं, लेकिन खरीद शुरू हुए एक सप्ताह से अधिक समय बीतने के बाद भी अधिकांश केंद्रों पर बोरे और जरूरी उपकरण उपलब्ध नहीं हैं। शासन ने इस बार गेहूं का समर्थन मूल्य 2585 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है, ताकि किसानों को उनकी मेहनत का सही दाम मिल सके। इसके उलट, जब किसान अपना अनाज लेकर केंद्रों पर पहुंच रहे हैं, तो उन्हें बोरे न होने की बात कहकर वापस भेज दिया जा रहा है। इस अव्यवस्था के कारण किसान अपनी उपज को 2100 से 2130 रुपये के कम दाम पर बिचौलियों को बेचने के लिए मजबूर हैं।
कफारा और धौरहरा क्षेत्र के दर्जनों किसानों का आरोप है कि वे कई दिनों से ट्रैक्टर-ट्रॉली में गेहूं लादकर केंद्रों के चक्कर काट रहे हैं। बोरे न होने से उनकी लागत बढ़ रही है और समय भी बर्बाद हो रहा है। खुले आसमान के नीचे अनाज रखे होने के कारण मौसम बिगड़ने पर फसल खराब होने का डर भी सता रहा है। किसानों का कहना है कि सरकार के दावों के बावजूद जमीनी हकीकत इसके ठीक उलट है। इस मामले में क्षेत्रीय विपणन अधिकारी राजेश राम ने स्वीकार किया कि अभी किसी भी केंद्र पर बोरे नहीं पहुंचे हैं। उन्होंने उम्मीद जताई है कि एक सप्ताह के भीतर बोरों की व्यवस्था कर ली जाएगी और इसके लिए व्यापारियों से बातचीत की जा रही है। तब तक किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
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